Latest Updates
-
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय
की-बोर्ड और रिमोट से भी फैल सकता है स्वाइन फ्लू, जानें इस वायरस से बचने की दवा का नाम

स्वाइन फ्लू एक बार फिर देश में पांव पसार रहा है, देश के अलग-अलग जगहों से स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। फ्लू से डरने के बजाय जरूरत इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की है। आइए जानें स्वाइन फ्लू कैसे फैलता है और आप कैसे छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इससे बच सकते हैं।
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। इसके वायरस सबसे ज्यादा सूअरों में पाए जाते हैं जिससे ये फैलता हैं इसीलिए इसको स्वाइन फ्लू नाम दिया गया है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है। मानसून के आसपास ये फ्लू या वायरस ज्यादा सक्रिय होता है। 2009 में पहली बार इस बीमारी का वायरस दुनिया के सामने आया था। ये वायरस पहली बार किसी इंसान में पाए गए थे।
इसके बाद इस वायरस ने एक महामारी का रुप ले लिया था। धीरे-धीरे करके एक ही समय में पूरी दुनियाभर भर से इस बीमारी के मामले सामने आने लगे थे।

स्वाइन फ्लू के लक्षण
- बुखार
- तेज ठंड लगना
- गला खराब हो जाना
- मांसपेशियों में दर्द होना
- तेज सिरदर्द होना,
- खांसी आना
- कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं।
- पांच साल से कम उम्र के बच्चे, खासतौर से दो साल से कम उम्र वाले, 65 साल या इससे अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिला या जच्चा को मातृत्व के बाद दो हफ्तों तक।
- ऐसे लोग जो पुरानी मेडिकल समस्याओं से पीड़ित हों जैसे कि फेफड़े की बीमारी जिसमें अस्थमा भी शामिल है, खासतौर से जिसने पिछले एक साल में स्टेरॉइड लिया हो; किडनी की पुरानी बीमारी हो, लिवर की बीमारी हो, हाइपरटेंशन हो, डायबीटीज हो, सिकल सेल डिजीज हो, अन्य पुरानी बीमारियां एवं गंभीर मोटापा।
- गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉर्मोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। इस समय उनका इस वायरस के ज्यादा सम्पर्क में आने का खतरा रहता है।
- साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।
- जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें।
- मुंह ढंकने के लिए इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।
- जिन लोगों को जुकाम हो उन लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से खासतौर पर बचें।
- फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
- फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें, ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं।
- बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।

सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में फर्क
स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है।

संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए चीजों से भी फैलता है ये फ्लू
खांसने या छींकने की वजह से हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह इस भयानक वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

इन लोगों को बचने की सख्त जरुरत

ध्यान रखें इन बातों का

एन-95 मास्क ही लगाएं
जेन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के इंटरर्नल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. विक्रांत शाह ने बताया कि स्वाइन फ्लू से बचने के लिए बहुत जरुरी है कि आप मुंह और नांक ढंककर रखें, सड़क किनारे मिलने वाले मामूली मास्क को पहनने से बचें, खास स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने के लिए बनें एन-95 मास्क ही पहनें। ये हर मेडिकल स्टोर और अस्पताल में आसानी से मिल जाते हैं।

ओसेलटामिविर एंटीबॉयोटिक है इलाज
डॉ. विक्रांत शाह ने बताया कि स्वाइन फ्लू की शुरुआती लक्षण को खत्म करने के लिए ओसेलटामिविर नामक एक दवा दी जाती है। इसे दिन में दो बार 75 मिलीग्राम तक की मात्रा में लिया जाना चाहिए। और रोगी की देखभाल करने वाला व्यक्ति भी इस संक्रमण के चपेट में न आ जाएं। उसे भी दिन में ये दवा एक बार लेनी चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications











