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एयर पॉल्यूशन कहीं कैंसर का ना बन जाए कारण, रहें थोड़ा सतर्क
कैंसर को एक बेहद ही घातक व जानलेवा बीमारी समझा जाता है। हालांकि, वर्तमान में कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन फिर भी अगर इस बीमारी का देरी से पता लगता है तो व्यक्ति की जान बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। यूं तो व्यक्ति को कई तरह के कैंसर हो सकते हैं, लेकिन इसमें लंग कैंसर को काफी घातक माना जाता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उन्हें लंग कैंसर होने की संभावना अधिक रहती है। लेकिन अगर आप नॉन-स्मोकर हैं तो भी वायु प्रदूषण लंग कैंसर के रिस्क को बढ़ा सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको वायु प्रदूषण और लंग कैंसर के आपसी कनेक्शन के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं-

अध्ययन में हुआ है साबित
आपको शायद पता ना हो, लेकिन अध्ययनों में पाया गया है कि वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है। दरअसल, 2013 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने वायु प्रदूषण को ग्रुप 1 कार्सिनोजेन घोषित किया गया था। वहीं, फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने पाया कि वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर के कारण मृत्यु दर के जोखिम को बढ़ा सकता है।

नॉन-स्मोकर के लिए है खतरनाक
आमतौर पर यह माना जाता है कि स्मोकिंग करने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। लेकिन धूम्रपान न करने वालों में भी वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर को ट्रिगर कर सकता है। दरअसल, जलवायु परिवर्तन से जुड़े कण वायुमार्ग की कोशिकाओं में विपरीत परिवर्तन को प्रेरित करते हैं। यह कण फेफड़ों के कैंसर के उच्च जोखिम की वजह बनते हैं। हालांकि, वायु प्रदूषण से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम धूम्रपान के जोखिम से अपेक्षाकृत कम होता है।

पहचानें लंग कैंसर के लक्षण
लंग कैंसर की गिनती सबसे अधिक खतरनाक कैंसर में से एक में होती है। यहां तक कि अगर इसकी सही समय पर पहचान करके इलाज शुरू ना किया जाए तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि इस प्रकार का कैंसर फेफड़ों में शुरू होता है और फिर यह शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। यूं तो इस कैंसर के लक्षण जल्द नजर नहीं आते हैं, लेकिन फिर भी व्यक्ति कुछ बदलावों से इसकी पहचान कर सकता है-

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षणों इस प्रकार हैं-
• कफ खांसी
• घरघराहट
• कमज़ोरी व सुस्ती महसूस होना
• भूख में बदलाव
• वजन घटना
• श्वासप्रणाली में संक्रमण
• सीने में दर्द जो हर सांस के साथ बढ़ता जाता है

फेफड़ों के कैंसर के बाद में नजर आने वाले लक्षण
कई बार व्यक्ति इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देता है और ऐसे में व्यक्ति का शरीर बाद में भी कुछ संकेत देता है। हालांकि, फेफड़ों के कैंसर के रोगियों को अलग-अलग लक्षणों का अनुभव हो सकता है। यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि नए ट्यूमर कहां बन रहे हैं।
• कॉलरबोन या गर्दन में बम्पस
• हड्डियों में विशेष रूप से कूल्हों, पसलियों या पीठ में असुविधा होना
• सिर दर्द
• चक्कर आना
• संतुलन की समस्या
• हाथ या पैर में झुनझुनी
• पीलिया
• कंधों में दर्द

लंग कैंसर से बचने के उपाय
चूंकि हवा के प्रदूषण के कारण लंग कैंसर का खतरा बढ़ता है और हवा के बिना सांस लेना संभव नहीं है, इसलिए हवा तो आपके शरीर के भीतर जाएगी ही, लेकिन फिर भी कुछ तरीकों के जरिए आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। मसलन-
• बाहर निकलने से पहले एक बार एयर क्वालिटी को जरूर चेक करें और यदि प्रदूषण का स्तर अधिक है तो अपनी गतिविधि को सीमित करें।
• वायु प्रदूषण के कम करने के लिए लकड़ी, कचरा या पराली को ना जलाएं।
• ईंधन से चलने वाले वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करने का प्रयास करें। स्कूटर या बाइक की जगह साइकिल को प्राथमिकता दें या फिर पैदल जाएं।
• जितना हो सके, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और लोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें। पौधे हवा की क्वालिटी को सुधारने में मदद करते हैं।
• संतुलित आहार लें। जब आप अच्छा भोजन करते हैं तो आपकी इम्युनिटी पावर मजबूत होती है और आप खुद को बीमारियों से सुरक्षित रख पाते हैं।
• नियमित रूप से व्यायाम करें। व्यायाम आपको शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और बीमारियों से भी बचाव करता है।



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