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महिलाओं को मोटा करते हैं ये हारमोन्स...
महिलाओं की सारी जिन्दगी, उनके हारमोन्स पर निर्भर करती है। हारमोन्स ही उनके शरीर के हर विकास, चरण और रिश्तों के लिए जिम्मेदार होते हैं। हारमोन्स के प्रभाव से लड़कियों में स्तनों का विकास होता है, उन्हे पीरियड्स आने शुरू होते हैं और वह मां बनती हैं।
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लेकिन क्या आपको मालूम है कि हारमोन्स के कारण ही महिलाएं, मोटी होती हैं। जी हां, महिलाओं के शरीर में एक उम्र के बाद हारमोन्स में ऐसा बदलाव होता है कि उनका शरीर फैलने लगता है और उन्हे लगता है कि ऐसा उनके खान-पान पर काबू न होने के कारण हुआ।
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हाल ही में हुए एक सर्वे से पता चला है कि हारमोन्स का प्रभाव सबसे ज्यादा पीएमएस के दौरान रहता है। इन दिनों बहुत तनाव रहता है और मेटाबोल्जिम में गड़बड़ रहती है। आइए जानते हैं कि कौन से हारमोन्स, कम या ज्यादा होने पर महिलाओं को मोटा बना देते हैं:

1. कार्टिसोल हारमोन्स:
इस हारमोन्स को स्ट्रेस हारमोन भी कहा जाता है। जब किसी महिला को बहुत ज्यादा तनाव होता है तो इस हारमोन का स्तर सबसे उच्च बिंदू पर होता है। शरीर में इस हारमोन के स्त्रावित होने से मोटापा बढ़ाने वाले कारक सक्रिय हो जाते हैं।

2. टेस्टोस्टेरॉन हारमोन:
जो महिलाएं पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) नामक सिंड्रोम से पीडित होती हैं, उनमें इसकी मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इस कारण, चेहरे पर बाल आने लगते हैं और मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं।

3. एस्ट्रोजन हारमोन:
मेनोपॉज के दौरान, इस हारमोन की मात्रा शरीर में कम हो जाती है। इससे महिलाओं के पेट में टायर बनना शुरू हो जाते हैं। ये महिलाओं को मोटा कर देना वाला हारमोन होता है।

4. इंसुलिन हारमोन:
जिस महिला के शरीर में इंसुलिन हारमोन की अधिकता होती है, वह जल्दी वजन बढ़ा लेती हैं। इसमें हारमोन के असंतुलित से शरीर में वसा और कार्बोहाईड्रेट की अधिकता हो जाती है।

5. प्रोजेस्टेरॉन हारमोन:
प्रोजेस्टेरॉन हारमोन की शरीर में कमी होने पर, वसा की मात्रा नहीं बढ़ती है लेकिन शरीर, पानी को बनाएं रखने के लिए फूल जाता है जिससे महिला मोटी प्रतीत होती है। इस हारमोन के शरीर में कम होने पर ऐसी दिक्कत आ जाती है।

6. थॉयराइड हारमोन:
महिलाओं के शरीर में थॉयराइड हारमोन अक्सर असंतुलित हो जाता है जिसके कारण या तो वह बहुत दुबली हो जाती है या बहुत मोटी। आमतौर पर महिलाएं मोटी हो जाती हैं। अगर अचानक से मोटापा बढ़ने लगता है तो थॉयराइड की जांच करवानी चाहिए। थॉरूराइड हारमोन असंतुलित होने की अवस्था को हाईपोथ्रायोडिज्म कहा जाता है, इसके कारण त्वचा में रूखापन आ जाता है और कब्ज की दिक्कत भी हो जाती है।



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