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मासिक दुर्गा अष्टमी: माँ दुर्गा करेंगी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी
दुर्गा अष्टमी प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनायी जाती है। इस दिन माँ दुर्गा की आराधना की जाती है। दुर्गाष्टमी हर महीने आती है इसलिए इसे मासिक दुर्गाष्टमी कहते हैं, इस अवसर पर व्रत और पूजन का बड़ा ही ख़ास महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे दिल और श्रद्धा से जो भी कामना की जाए माता उसे ज़रूर पूरा करती है। अन्य किसी भी पूजा की तरह हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। आपको बता दें इस बार दुर्गा अष्टमी 22 मई, मंगलवार को है।
आज इस लेख के माध्यम से हम आपको मासिक दुर्गाष्टमी से जुड़ी कुछ ख़ास जानकारी देंगे।

जब माता ने किया था दुर्गम राक्षस का वध
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार दुर्गम नामक एक असुर ने तीनों लोकों में उत्पात मचा रखा था। उसके अत्याचार से सभी देवी देवता परेशान रहने लगे, तब त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव जी) की शक्ति से माँ दुर्गा की उत्पत्ति हुई। कहा जाता है कि सभी देवी देवताओं ने माता का आह्वाहन किया और उनसे प्रार्थना की कि वे उन्हें दुर्गम के अत्याचार से मुक्त करा दें, तब माता ने उस राक्षस का वध कर दिया इस कारण माता को दुर्गसैनी भी कहा जाता है।
दुर्गाष्टमी में माता की पूजा की विधि
वैसे तो हर महीने एक दुर्गाष्टमी आती है लेकिन उन सभी में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण दुर्गा अष्टमी 'महाष्टमी’ होती है जो नवरात्री में आती है किन्तु माना जाता है कि अगर प्रत्येक माह पूरे विधि विधान से दुर्गाष्टमी पर व्रत और पूजन किया जाए तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सबसे पहले स्नान करके शुद्ध हो जाएं, फिर पूजा के स्थान को गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। इसके पश्चात लकड़ी के पाट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर लें। फिर माता को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, फिर प्रसाद के रूप में आप फल और मिठाई चढ़ाएं अब धुप और दीपक जलाएं। दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर माता की आरती करें। फिर हाथ जोड़कर देवी से प्रार्थना करें माता आपकी इच्छा ज़रूर पूरी करेंगी।
देवताओं के देह से निकले हुए तेज से बने हैं देवी के विभिन्न अंग
जैसा की हमने आपको बताया कि माता की उत्पत्ति त्रिदेव की शक्ति से हुई है किन्तु माता के विभिन्न अंग अन्य सभी देवताओं के तेज से उत्पन्न हुए हैं जैसे शिव जी के तेज से देवी का मुख प्रकट हुआ, यमराज के तेज से मस्तक के केश, विष्णु के तेज से भुजाएं, चंद्रमा के तेज से स्तन, इंद्र के तेज से कमर, वरुण के तेज से जंघा, पृथ्वी के तेज से नितंब, ब्रह्मा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से दोनों पैरों की उँगलियाँ, प्रजापति के तेज से सारे दांत, अग्नि के तेज से दोनों नेत्र, संध्या के तेज से भौहें, वायु के तेज से कान तथा बाकी अंग अन्य देवताओं के तेज से बने हैं।
2018 मासिक दुर्गाष्टमी की तिथियां
22 मई 2018, मंगलवार
20 जून 2018, बुधवार
20 जुलाई 2018, शुक्रवार
18 अगस्त 2018, शनिवार
17 सितम्बर 2018, सोमवार
17 अक्टूबर 2018, बुधवार
16 नवम्बर 2018, शुक्रवार
15 दिसम्बर 2018, शनिवार



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