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Eid-e-Milad-Un-Nabi 2021: इस दिन मनाया जाएगा यह खास त्योहार, जानें इसकी मान्यता और इतिहास
इस्लाम धर्म में ईद मिलाद-उन-नबी बहुत ही खास त्योहार माना जाता है। यह त्योहार अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद को समर्पित है क्योंकि लोग इसे उनके जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं। इस त्यौहार को बारावफात के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग मस्जिद में जाकर कुरान पढ़ते हैं। इसके अलावा रात भर अपनों के लिए दुआएं मांगते हैं। इस दिन जुलूस भी निकाले जाते हैं। आइए आपको इस त्योहार से जुड़ी कुछ खास बातें विस्तार से बताते हैं।

साल 2021 में इस दिन है ईद मिलाद-उन-नबी का पर्व
माना जाता है कि 571 ई. में इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे माह रबी उल अव्वल की 12 तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था। हजरत मोहम्मद अंतिम पैगंबर थे जो सऊदी अरब के मक्का में पैदा हुए थे। साल 2021 में इनका जन्मदिन 19 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा। 18 अक्टूबर की शाम से इस त्यौहार की शुरुआत हो जाएगी जो कि 19 अक्टूबर की शाम को समाप्त होगी। इस त्योहार को पहली बार मिस्र में एक पर्व के रूप में मनाया गया था। 11 वीं शताब्दी के दौरान ईद मिलाद-उन-नबी ज्यादा लोकप्रिय हुआ था।

फरिश्ते ने दी कुरान की शिक्षा
ऐसी मान्यता है कि एक रात जब पैगंबर एक पर्वत की गुफा में अपने ध्यान में लीन थे तो एक फरिश्ते ने आकर उन्हें कुरान की शिक्षा दी थी। इसके बाद पैगंबर ने यह मान लिया था कि अल्लाह ने उन्हें कुरान के संदेशों को दूसरों तक पहुंचाने का जरिया बनाया है। तब से वे लोगों को कुरान के संदेश और अल्लाह से जुड़ी बातें बताने लगे।

कहीं नहीं है पैगंबर की मूर्ति या चित्र
कहा जाता है कि पैगंबर मूर्ति या चित्र की पूजा के सख्त तत्व खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने किसी को भी अपनी मूर्ति या चित्र बनाने की इजाजत नहीं दी थी। उन्होंने यह तक कह दिया था कि जो भी उनकी चित्र या मूर्ति बनाएगा उसे अल्लाह सजा देंगे। यही वजह है कि लोगों के पास उनका कोई भी चित्र या मूर्ति नहीं है।

मदीना की लड़ाई को किया खत्म
मदीना के लोग वहां के आपसी झगड़ों से काफी परेशान हो गए थे। ऐसे में पैगंबर साहब के संदेशों से उस जगह पर शांति का वास हुआ। कुछ ही समय में पैगंबर साहब के कई अनुयायी हो गए। सन् 632 में हजरत मुहम्मद साहब की मृत्यु हो गई। उनकी मौत से पहले तक पूरा अरब देश इस्लाम कबूल कर चुका था।

घरों और मस्जिदों की होती है साथ सजावट
ईद मिलाद-उन-नबी के त्योहार पर लोग अपने घरों की खूब साथ सजावट करते हैं। इसके अलावा मस्जिदों को भी अच्छी तरह से सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गरीबों को दान करने से और जरूरतमंदों की मदद करने से अल्लाह प्रसन्न होते हैं।



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