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कैसे एक गिलहरी बनी थी गौतम बुद्ध की प्रेरणा
भारत में कई ऐसे महान शख़्सियतों का जन्म हुआ है जिन्होंने अपने ज्ञान की रौशनी से कई लोगों का मार्गदर्शन किया है। इन्हीं महान आत्माओं में से एक थे हमारे गौतम बुद्ध जिन्होंने एक नए धर्म को जन्म दिया और लाखों लोगों के जीवन को एक अर्थ दिया। उन्हें एक नयी दिशा दिखाई लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह महान नायक जो हज़ारों लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है आखिर इन्हें प्रेरणा कहां से मिली? कौन है जिसने इन्हें प्रेरित किया?
जी हां, इनकी भी प्रेरणा है। प्रकृति केवल जीवन का स्रोत नहीं बल्कि इसमें ज्ञान का भी भण्डार है जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं लेकिन हर किसी के पास वो दिव्य शक्ति नहीं होती जिससे वह प्रकृति के ज्ञान को हासिल कर सके। इस तरह के ज्ञान को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या और अपनी अंतरात्मा को जानने की ज़रुरत है।

तो चलिए जानते हैं गौतम बुद्ध से जुड़ी एक रोचक कहानी जिसमें हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार और किस से गौतम बुद्ध प्रेरित हुए थे।
बुद्ध ज्ञान की तलाश में
एक कथा के अनुसार गौतम बुद्ध को एक गिलहरी ने प्रेरित किया था। ये कहानी उस समय की है जब बुद्ध ने ज्ञान हासिल करने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया था और वे वन में चले गए थे। जीवन का सत्य और अपनी अंतरात्मा के बारे में जानने के लिए शुरुआत में बुद्ध ने बहुत ही कठिन उपवास रखे जब उन्हें इससे संतुष्टि नहीं मिली तो वे एक संत पुरुष के शिष्य बन गए।
कुछ समय उन्होंने अपने गुरु से शिक्षा प्राप्त की किन्तु यहां भी उन्हें संतुष्टि नहीं मिली। बाद में उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि खुद को जानने और समझने का सबसे सही माध्यम है ध्यान। वे कई वर्षों तक गहरे ध्यान में डूबे रहे और अंत में पूर्णिमा के दिन बोध गया में एक वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
झील के किनारे एक गिलहरी
गौतम बुद्ध ने इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए कई सारी कठिनाइयों का सामना किया था। एक दिन ऐसा भी आया जब वे थक गए थे क्योंकि उन्हें कहीं भी संतुष्टि नहीं मिल रही थी। एक दिन झुँझलाहट में आकर वे एक झील के किनारे बैठ गए। गौतम प्रकृति प्रेमी थे इसलिए वहां बैठ कर प्रकृति की दिव्य सुन्दरता को देख रहे थे।
गहरे ख्यालों में खोए बुद्ध की नज़र अचानक एक गिलहरी पर पड़ी जो अपने मुख में अखरोट दबाए झील के किनारे दौड़ रही थी। गौतम उस गिलहरी को देख कर मुस्कुराए और सोचने लगे कि अपने आज के भोजन को प्राप्त कर लेने पर वह कितनी खुश है।
गिलहरी ने अखरोट झील में गिरा दिया
अगले ही पल गौतम बुद्ध ने देखा कि उस गिलहरी ने अखरोट झील में गिरा दिया लेकिन वह गिलहरी ना तो घबराई और न ही परेशान हुई। यह गौतम बुद्ध के लिए बहुत ही आश्चर्यजनक था। उन्होंने देखा कि वह गिलहरी पानी में कूद गई फिर थोड़ी देर में बाहर आ कर उसने अपने शरीर से पानी को झाड़ा और फिर वापस झील में चली गयी। इस प्रकार वह यह सोच कर बार बार झील में कूद जाती की इस तरह वह झील के पानी को सुखा देगी और उसमें गिरे हुए अपने अखरोट को पा लेगी।
बुद्ध को लगा कि वह गिलहरी कितनी बेवकूफी वाली हरकत कर रही थी क्योंकि उसके लिए पूरी झील को खाली करना नामुमकिन है लेकिन उसकी लगातार कोशिश ने गौतम बुद्ध का दिल जीत लिया था।
गिलहरी की कोशिश से गौतम बुद्ध हुए प्रेरित
गिलहरी को इस तरह बार बार कोशिश करते देख गौतम बुद्ध सोचने लगे कि जब एक गिलहरी के अंदर इतनी इच्छा शक्ति है कि वह इतने विशाल झील के पानी को सुखाने का लगातार प्रयास कर रही है तो फिर मनुष्य क्यों अपनी हार से घबराता है। गौतम को यह बात समझ आ गयी थी कि उन्हें भी ज्ञान प्राप्त करने की अपनी कोशिश को नहीं छोड़ना चाहिए।
यह घटना गौतम बुद्ध के लिए प्रेरणा बन गयी और वे एक बार फिर झील के किनारे एक छायादार वृक्ष के नीचे, गिलहरी से प्रेरणा लेकर दिल में ईश्वर के प्रति आस्था लेकर और इस बार ज़्यादा समर्पण लेकर ध्यान में लीन हो गए।



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