Latest Updates
-
Corona Alert: सिंगर कुमार सानू के बेटे को हुआ कोविड, आंध्र प्रदेश में मिले सबसे ज्यादा मरीज, जानें लक्षण -
स्कूल टिफिन के लिए 15 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट और स्पंजी सूजी के अप्पे, नोट कर लें आसान रेसिपी -
संडे स्पेशल डिनर के लिए परफेक्ट है पनीर कॉर्न पुलाव, स्वाद ऐसा कि सब मांगेंगे दोबारा -
सूरज की तपिश से काला पड़ गया है चेहरा? इन 3 देसी नुस्खों से हटाएं जिद्दी सन टैन -
क्या बारिश से हुए नुकसान पर सरकार और इंश्योरेंस कंपनी से मिलता है मुआवजा? हां, तो जानें कैसे करें क्लेम? -
छोटी हाइट वाली लड़कियों पर सबसे ज्यादा जंचते हैं ये आउटफिट, दिखती हैं सुपर स्टाइलिश और लंबी -
बरसात में इन 5 लोगों को गलती से भी नहीं खाना चाहिए दही, वरना बिगड़ सकती है सेहत -
Ravi Pradosh Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है रवि प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और शिव आरती -
World Paper Bag Day 2026: कब और क्यों हुई पेपर बैग दिवस की शुरुआत? जानें इसका दिलचस्प इतिहास -
गलती से भी पास-पास न रखें मनी प्लांट और तुलसी का पौधा, वरना कंगाली के साथ आ जाएंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें
जब श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने शिवजी की नगरी काशी को किया भस्म
धर्म की रक्षा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कई बार अपने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया। कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का शस्त्र है जो उन्हें शिवजी के द्वारा वरदान के रूप में मिला था। जब उन्होंने श्री कृष्ण के रूप में अपना आठवां अवतार लिया था तब भी उन्होंने इसे अपने अस्त्र के रूप में धारण किया था।
लेकिन क्या आप यह जानते है कि महादेव के दिए हुए शस्त्र से श्री कृष्ण ने उनकी ही नगरी काशी को भस्म कर दिया था।
आज हम अपने इस लेख के माध्यम से आपको सुदर्शन चक्र के निर्माण के पीछे की कहानी और श्री कृष्ण द्वारा काशी को जलाकर राख करने के पीछे छिपी वजह के बारे बताएंगे।

कैसे हुआ सुदर्शन चक्र का निर्माण
कहा जाता है कि एक बार दैत्यों के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास गए। तब विष्णुजी ने इस समस्या के समाधान के लिए कैलाश पर जाकर भगवान भोलेनाथ की आराधना की। श्री हरी ने शिवजी के हज़ारों नामों की स्तुति की और हर नाम के साथ एक कमल का पुष्प उन्हें अर्पित करते गए। तब भोलेनाथ ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए उन कमल के पुष्पों में से एक पुष्प छिपा दिया। इस बात से अनजान कि यह शिवजी की माया है, विष्णु जी खोया हुआ पुष्प ढूंढने लगे। जब उन्हें फूल नहीं मिला तो उन्होंने अपना एक नेत्र निकाल कर फूल की जगह रख दिया।
श्री हरी की भक्ति से भोलेनाथ अत्यधिक प्रसन्न हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। तब विष्णुजी ने दैत्यों के अत्याचार से देवताओं को बचाने के लिए एक अजय शस्त्र का वरदान माँगा। भोलेनाथ ने सुदर्शन चक्र का निर्माण किया और विष्णु जी को सौंप दिया। श्री हरि ने उस सुदर्शन चक्र से सभी राक्षसों का वध कर दिया और देवाताओं को उनके उत्पात से मुक्ति दिला दी।
कहा जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर भगवान विष्णु ने सुद्रशन चक्र माता पार्वती को दे दिया था जिसे बाद में माता ने श्री कृष्ण को सौंप दिया था।

सुदर्शन चक्र ने काशी को किया भस्म
द्वापरयुग में मगध का राजा जरासंध था जो बहुत ही अत्याचारी था। उसके अत्याचार से सारी प्रजा दुखी थी। उस दुष्ट राजा की दो पुत्रियाँ थी अस्ति और प्रस्ति जिनका विवाह उसने मथुरा के राजा कंस से करा दिया था। जब श्री कृष्ण ने कंस का वध कर दिया तो जरासंध प्रतिशोध की अग्नि में जलने लगा। अपने दामाद की मृत्यु का बदला लेने के लिए जरासंध ने कलिंगराज पौंड्रक और काशीराज को अपने साथ मिला लिया किन्तु युद्ध में उनकी हार हुई। जरासंध तो जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भाग निकला लेकिन कलिंगराज और काशीराज का श्री कृष्ण ने वध कर दिया।
काशीराज की मृत्यु के पश्चात उसके पुत्र ने उसकी जगह ले ली और श्री कृष्ण से बदला लेने का दृढ़ निश्चय किया। श्री कृष्ण को पराजित करने करने के लिए उसने भगवान शिव की आराधना करके उन्हें प्रस्सन किया और वरदान स्वरुप श्री कृष्ण की मृत्यु मांग ली। अपने भक्त की इच्छापूर्ति के लिए भोलेनाथ ने उसे एक भयंकर कृत्या प्रदान करते हुए कहा कि इस भयंकर कृत्या का प्रयोग किसी ब्राह्मण भक्त पर ना किया जाए नहीं तो यह निष्फल हो जाएगा।
काशिराज ने उस कृत्या को श्री कृष्ण का वध करने के लिए भेज दिया किन्तु वह यह भूल गया कि नन्दलाल एक ब्राह्मण भक्त हैं। इस वजह से वह कृत्या वापस लौट आई और स्वयं श्री कृष्ण ने उसके पीछे अपना सुदर्शन चक्र भेज दिया।
इस प्रकार श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने पूरे काशी को भस्म कर दिया। बाद में वारा और असि नामक दो नदियों के कारण काशी पुनः स्थापित हुआ और आज इसे वाराणसी के रूप में जाना जाता है।

विनाशक हथियारों में से एक सुदर्शन चक्र
पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सुदर्शन चक्र सबसे विनाशक हथियारों में से एक था। यह ब्रह्मास्त्र की तरह एक ऐसा अचूक शस्त्र था जो अपने लक्ष्य को पूरा करके ही अपने स्थान पर वापस आता था। इतना ही नहीं यह किसी भी खोयी हुई वस्तु को वापस ढूंढ़कर लाने में भी सक्षम था।
इसका प्रयोग अति आवश्यक होने पर ही किया जाता था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसके निर्माण को भी गुप्त रखा था ताकि इसका दुरूपयोग न हो।



Click it and Unblock the Notifications