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Women’s Equality Day 2022: विश्व की प्रेरणादायक महिलाओं के पावरफुल कोट्स!
26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जाता है। महिलाओं को अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना पड़ा था। जिसकी वो हकदार थीं। लेकिन महिलाओं को 1920 में संयुक्त राज्य अमेरिका में वोट देने का अधिकार प्राप्त हो सका था। महिलाओं को वोटिंग का अधिकार 26 अगस्त, 1920 को दिया गया था, इसलिए यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में इस दिन को महिला समानता दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता हैं।
महिला समानता दिवस पर यहां पर हम कुछ प्रेरणादायक महिलाओं के उद्धरणों को यहां बता रहे हैं। जो आज की और आने वाली जेनरेशन के लिए रोल मॉडल हैं। अपनी दम पर उन्होंने सफलता का नया अध्याय लिखा है।

मदर टेरेसा:
"हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते। लेकिन हम छोटे-छोटे काम बड़े प्यार से कर सकते हैं," । मदर टेरेसा विश्व में शांति और मानवता का संदेश पहुंचाने वाली महान हस्ती हैं। उनके द्वारा पूरे विश्व में मिशनरी के कार्य किये गये। वो गरीबों और असहायों की मां थीं। 17 अक्टूबर 1979 को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कल्पना चावला:
"अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि आप कहां हैं।"
कल्पना चावला 1997 में अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। 1 फरवरी, 2003 को, जब अंतरिक्ष यान कोलंबिया पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर रहा था तब वो टूट गया, जिसके कारण कल्पना चावला की मृत्यु हो गई। कल्पना के साथ ही सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी।

इंदिरा नूयी:
"सफलता का एक महत्वपूर्ण गुण स्वयं बनना है।''
इंदिरा कृष्णमूर्ति नुई पेप्सिको कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारिणी रही हैं। इसके साथ इनका नाम दुनिया की प्रभावशाली महिलाओं में शुमार है।

अरुंधति रॉय:
"राष्ट्र पर दया आती है, जिसे अपने मन की बात कहने के लिए अपने लेखकों को चुप कराना पड़ता है।"
अरुंधति रॉय का पूरा नाम सुजाना अरुंधति रॉय है। रॉय भारतीय लेखिका, राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। इन्हे उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स (1997) के लिए बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया था। पर्यावरण और मानव अधिकारों के लिए ये आवाज उठाती रही हैं।
नीरजा भनोट:
"अपना कर्तव्य करो, जो हो सके आओ। किसी भी अन्याय को कभी बर्दाश्त न करें और कभी भी स्वाभिमान से समझौता न करें"
नीरजा भनोट प्लेन पैन ऍम उड़ान 73 की क्रू में शामिल थीं। 5 सितंबर, 1986 को आतंकियों ने भारत से न्यूयॉर्क जाते हुए इस विमान का पाकिस्तान से अपहरण कर लिया। इन्होंने अपनी जान देकर यात्रियों की जान बचाई थी। भारत के सबसे बड़े पराक्रमी पुरुस्कार "अशोक चक्र" से सम्मानित किया गया था।
इंदिरा गांधी:
"प्रश्न करने की शक्ति सभी मानव प्रगति का आधार है"
इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी भारतीय राजनीतिज्ञ थीं। वो 1966 में भारत के तीसरे प्रधान मंत्री के रूप में चुनी गईं और भारत की पहली और आज तक की एकमात्र महिला प्रधान मंत्री थीं। इंदिरा गांधी भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं।

मलाला यूसूफ़जई:
"जब पूरी दुनिया चुप है, तो एक आवाज भी शक्तिशाली हो जाती है।"
मलाला यूसुफजई, पाकिस्तानी कार्यकर्ता, जिनको लड़कियों की पढ़ाई को लेकर अपने लेखों पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने गोली मार दी थी। लेकिन उनकी जान बच गई थी। इनको नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


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