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प्रेगनेंसी में मां और बच्चें के लिए क्यूं जरुरी है आयरन
आम तौर पर एक स्वस्थ महिला को हर दिन 15 से 18 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। वहीं गर्भवती महिलाओं को 27- 30 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती हैं। यही वजह है कि डॉक्टर प्रेगनेंसी में महिलाओं को आयरन की गोलियां खाने की सलाह देते हैं। प्रेगनेंसी में आयरन की कमी के वजह से डिलीवरी के समय महिला और उसके होने बच्चें के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
एनीमिया के रोगियों और मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा रक्त स्राव झेलने वाली महिलाओं के लिए अतिरिक्त आयरन जरूरी होता है। गर्भवती महिलाओं को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक रक्त वहन करना पड़ता है। अत: आपकी आयरन की आवश्यकता भी उसी अनुसार बढ़ जाती है। यदि आपको आहार से आयरन की उतनी मात्रा नहीं मिल पा रही, जितनी शरीर को जरूरत है, तो आपको आयरन की कमी या एनीमिया हो सकता है। कुछ लोग इसे खून की कमी भी कहते हैं।

प्रेगनेंसी में एनीमिया
एनीमिया, वह स्थिति है, जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। इसे 'आयरन की कमी' या 'खून की कमी' भी कहा जाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं की ऑक्सीजन के संग्रहण और उसे पूरे शरीर में पहुंचाने में मदद करता है। आपके रक्त में पर्याप्त हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर के अंगों और ऊतकों को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी।

ये हो सकता है खतरा
सर्वेक्षणों में पता चलता है कि भारत में 10 में से छह गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। गर्भावस्था में आयरन की कमी या एनीमिया होने से इन जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है, जैसेः
- शिशु का अपनी गर्भावधि (जैस्टेशनल) उम्र के हिसाब से छोटा होना
- समय से पहले शिशु का जन्म होना (प्रीमैच्योर)
- कम वजन का शिशु पैदा होना
- गर्भावस्था में मुझे कितना आयरन लेना चाहिए?
- मटन
- चिकन (मुर्गी), ख़ास तौर पर चिकन की जाँघों और टांगों में पाया जाने वाला गहरे रंग का मांस अच्छा होता है
- सीपदार मछली जैसे झींगा (प्रॉन), शम्बूक (मसल्स), तिसरियो (क्लैम्स)
- पारम्परिक तौर पर आयरन के भरपूर स्रोत के लिए कलेजी खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अनेक विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान कलेजी का सेवन न करने की सलाह देते हैं।
- आयरन से भरपूर सब्जियां जैसे चुकंदर, कद्दू, शकरकंदी और हरी गोभी
- मेवे और बीज जैसे काजू, नारियल, कद्दू के बीज, सरसों के बीज, तिल, पिस्ता, किशमिश, साबुत धनिया और अखरोट
- फलियां और दालें जैसे सोयाबीन, लोबिया, राजमा, सूखी मटर, छोले, साबुत काले चने और अन्य दालें
- कुछ पेय जैसे खजूर का शरबत या नारियल पानी में भी कुछ आयरन होता है

सीबीसी जांच है जरुरी
कंसीव होने के बाद डॉक्टर आपको सबसे पहले ब्लड टेस्ट के लिए कहेंगे।
इनमें से एक ‘कम्पलीट ब्लड काउंट' (सीबीसी) जांच होगी, जिससे आपके हीमोग्लोबिन के स्तर का पता चलेगा। अगर आपका हीमोग्लोबिन स्तर ठीक है, तो भी गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से बचने के लिए आपको रोजाना आयरन की एक गोली लेने की जरुरत होगी। अगर आपके रक्त की रिपोर्ट दर्शाती है कि आपको एनीमिया है, तो शायद आपको हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार आने तक प्रतिदिन आयरन की दो गोलियां लेनी पड़ सकती हैं।

आयरन की कमी के लक्षण
कमजोरी होना, बहुत ज्यादा थकान होना, सांस लेने में समस्या होना, नाखूनों, आखों या होठों का पीला होना आयरन की कमी के लक्षण हैं।

कितनी मात्रा में ले आयरन
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को रोज 30 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती है। गर्भावस्था की पहली एवं तीसरी तिमाही में आयरन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को रोज 120 मिलीग्राम का आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए। इसके अलावा नॉनवेज और वेज डाइट से भी प्रेगनेंट महिलाएं इस कमी को पूरा कर सकती हैं।

आयरन के मांसाहारी स्रोतों में शामिल हैं:

आयरन के शाकाहारी स्रोत:
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे चौली, पालक, फूलगोभी का हरा हिस्सा, शलगम का साग, पुदीना, मूली के पत्ते, प्याज की कलियां, सरसों का साग और मेथी का साग आयरन के अच्छे स्त्रोत हैं। इसलिए इन्हें किसी न किसी रूप में प्रतिदिन अपने आहार में शामिल करने का प्रयास करें। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 100 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इनमें आयरन और फॉलिक एसिड दोनों की भरपूर मात्रा होती है




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