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खराब पाचन क्रिया को ठीक करे ये आयुर्वेदिक डाइट टिप्स
कई बार हम स्वाद के चक्कर में जरुरत से अधिक खाना खा लेते हैं। उस वक़्त खुद को रोकना मुश्किल होता है लेकिन बाद में पछताना भी पड़ता है। जब हमारा पेट इस खाने को हज़म नहीं कर पाता तो हमें अपच, एसिडिटी, कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं से जुजना पड़ता है। इतना ही नहीं, ये समस्याएं हमें कमजोर बना देती हैं व हमारी ऊर्जा के स्तर को भी घटा देती हैं।
लेकिन हमारी 5,000 साल से भी अधिक पूरी आयुर्वेदिक चिकित्सा में 3 दिनों में पाचनक्रिया को फिर से ठीक करने की प्रक्रिया मौजूद है। यह प्रक्रिया हमारे पाचन तंत्र को ठीक करके उसे पहले की तरह कार्यशील बना देती है।
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हमारा पाचन तंत्र अपनी तय की गई समय सीमा के अनुसार चलता है। इस समय सीमा के कारण हमें दिन के अलग-अलग पहर में भूख लगती है। खाने के बाद हमारा पचान तंत्र अपना काम करना आरंभ करता है तथा जैसे ही उनका काम खत्म होता है वह अगली क्रिया प्रारंभ करने के लिए मस्तिष्क को संकेत भेजता है। अगर इस प्रक्रिया में बाधाएं डाल दी जाएं तो ये हमारी पाचन शक्ति के साथ शारीरिक शक्ति को भी घटाते हैं। ऐसी स्थिति में इन तरीकों को आज़माएं।

पेट की खराबी के दौरान नीचे दी गई इस प्रक्रिया का पालन करें :
पहले दिन
दिन की शुरुआत नाश्ते से करें तथा नाश्ते को सुबह उठने के 1-2 घंटे के बाद खाएं। दोपहर में घर का खाना खाएं लेकिन खाने में चाट या शराब को शामिल ना करें। सुबह के नाश्ते का एवं दोपहर के खाने का सेवन सामान्य रुप से करें। रात का खाना जरुरत के हिसाब से खाएं तथा डिनर सोने से 2 घंटे पहले खाना चाहिए। डिनर के बात 2 गिलास गुनगुने पानी के पिएं।
दूसरे दिन
पाचनक्रिया को रीसेट करने से पहले इसकी गति को धीमा करने की जरुरत है जोकि खाना खा कर नहीं बल्कि पानी पी कर की जा सकती है।
सुबह-शाम वॉकिंग जाएं तथा पूरे दिन में 3-4 गिलास जूस के पिएं। जूस को आप भूख लगने पर या अपनी इच्छा अनुसार पी सकते हैं। पानी का अधिक सेवन करें तथा साथ ही नींबू पानी का भी सेवन करें। इस दौरान अपना मन शांत रखें व अपने दिन को हलके-फुलके काम करते बिताएं।
तीसरे दिन
इस प्रक्रिया के अंतिम दिन पर आपको अपनी पाचनक्रिया को रीसेट करने की आवश्यकता है तथा इस क्रिया को अपनी सामान्य कार्यशीलता पर वापस भेजने की जरुरत है।
इसके लिए आप जगने के 1-2 घंटे के बाद नाश्ता करें फिर दोपहर को खाना खाएं। दोपहर के खाने के बाद सीधे रात का खाना खाएं। नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने तक व खाने से लेकर डिनर के बीच कुछ ना खाएं। डिनर को सोने से 2-3 घंटे पहले खाएं। डिनर की मात्रा दोपहर के खाने से कम होनी चाहिए।
अब आपकी पाचनक्रिया अपनी सामान्य गति पर पहुंच चुकी है। यह क्रिया आपको स्वयं भूख का आभास कराती रहेगी।
जगने के 1 या 2 घंटे के बाद नाश्ता करना, समय पर दोपहर का भोजन खाना व सोने के कुछ घंटे पहले रात का भोजन खाना। ये सारे नियम आपके पाचन की कार्यशीलता को बनाए रखेंगे।
अगर किसी कारणवश आपका हाज़मा खराब हो जाएं तो ऊपर दी गई कार्यप्रणाली का क्रमाशः अनुसार पालन करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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