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अदरक के ऐसे स्वास्थ्य लाभ जो कोई नहीं जानता
अदरक, 3-दिनों की क्लीनजिंग डाइट सहित, कई विषाक्तता अनुप्रयोगों में इस्तेमाल की जाने वाली सबसे अच्छी जड़ी-बूटी मानी जाती है। इसकी सही और वास्तविक गुणवत्ता के बारे में जानकार मेडीसीन स्पेशलिस्ट बता पाते हैं जो कि विशेष रूप से भारत, चीन आदि में होते हैं, अन्य देश भी इस प्रकार के तरीकों को प्राकृतिक रूप से बीमारियों का इलाज करने के लिए अपनाने का प्रयास कर रहा है।
इन जानकार मेडीसीन प्रोफेशनल्स के अनुसार, अदरक में शरीर की क्लीनिंग के लिए सरल और सहज परिणाम देखने को मिले हैं जबकि इसमें पाये जाने वाले विटामिन शरीर के भीतर तक डिटॉक्सीफिकेशन की प्रक्रिया को अच्छी तरह पूरा कर देते हैं।
अदरक को सबसे अच्छी डिटॉक्सीफिकेशन (विषहरण) जड़ी-बूटी के रूप में माना जा सकता है जिसे इन दिनों कई प्रकार के व्यंजनों और पेय पदार्थों को बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, यही कारण है कि हर किचेन की टोकरी में अदरक जरूर मिलती है।

क्या इसे पिछले 300 सालों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है, अदरक को चिकित्सा औषधि के साथ-साथ एक व्यंजन हर्ब भी माना जाता है। ऐसा क्यूं ?
सारे मसालों की अपेक्षा अदरक में बिल्कुल अलग फ्लेवर होता है, साथ ही धरती के अंदर दबी रहने के कारण इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं। इसे अक्सर अदरक की जड़ समझा जाता है, लेकिन यह वास्तव में अदरक का प्रकंद होता है, जो कि संभवत: जड़ की बजाय भूमि के अंदर वाला तना होता है।

बहुत बार, लोगों को सूखी अदरक (सोंठ) का इस्तेमाल करते हुए देखा गया है। इसके अतिरिक्त, पाउडर अदरक का इस्तेमाल या सोंठ के पाउडर का उपयोग, पाचन क्रिया सम्बंधी समस्याओं को दूर करने और प्रोटीन्स को ब्रेक डाउन करने के लिए भी किया जाता है, जो कि काफी मददगार साबित होता है।
इसके अलावा, यह आसान और उपयुक्त होता है क्योंकि आप इसे छीलकर, काटकर रेफ्रीजेरेटर में रख सकते हैं और काफी दिनों तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे अच्छे 3-दिन डिटॉक्सीफिकेशन फायदे के अलावा, अदरक पेट में बनने वाली गैस को कम कर देती है। कई लोगों को गैस ऊपर चढ़ने की समस्या होने लगती है, जब वे बहुत ज्यादा मात्रा में प्रोटीन का सेवन कर लेते हैं।
भोजन में अदरक को डालने पर, यह गैस बनने या ऊपर की ओर चढ़ने की समस्या को दूर कर देती है और मतली, दस्त में होने वाली कमजोरी, साथ ही साथ हर सुबह उल्टी लगने वाली संवेदना का भी उपचार करती है।

दरअसल यह लालिमा को कम करने में भी मददगार होती है, जिसके फलस्वरूप इसका उपयोग, कुछ प्रकार के विकारों जैसे- अल्सरेटिव कोलाइटिस और गठिया का इलाज करने में भी किया जाता है।
साथ ही शोधकर्ताओं ने हाल ही में बताया है कि अदरक में हेरपेस सिंप्लेक्स वायरस रिप्लीकेशन के इनहैबीटेंश के कारण एंटी-इंफ्लामेंट्री गुण भी होते हैं। जबकि डिटॉक्सीफिकेशन (विषहरण) , प्राकृतिक शरीर की सफाई और मरम्मत करता है। यह शरीर को सक्षम बनाता है कि शरीर, वायरस द्वारा होने वाली बीमारियों जैसे- बुखार या फ्लू से लड़ सके।

यह रक्त के परिसंचरण में मददगार होता है और थक्के को जमने से रोकता है, जिसकी वजह से भविष्य में लम्बे समय तक घातक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता है। अदरक में शोगोल्स और जिंजरोल्स होता है, ये दोनों तत्व न सिर्फ अदरक को विशेष प्रकार का फ्लेवर देते हैं बल्कि शरीर की मरम्मत करने, साथ ही पाचन क्रिया को दुरूस्त बनाने में भी सहायक होते हैं।
अदरक में पाया जाने वाला वोलाटाइल ऑयल, पाचन एंजाइमों को व्यवस्थित रखता है, जो एसिड को बेअसर कर देता है और पूरी पाचन क्रिया को सुविधाजनक बनाएं रखता है। नतीजतन, आप पेटदर्द, डायरिया और यहां तक कि कब्ज की समस्या को भी अदरक का सेवन करने के बाद टाटा बाय-बाय बोल सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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