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खिचड़ी पकाओं नहीं खाओं.. जानिए खिचड़ी खाने के एक से बढ़कर एक फायदें

अभी पूरे देश में खिचड़ी की बहुत चर्चा चल रही है। चाहे वो नेशनल फूड बनाने की चर्चा हो या फिर कोई रिकॉर्ड बनाने की बात। लेकिन एक बात तो माननी पड़ेगी खिचड़ी खाने के फायदें बहुत है। कभी सोचा है कि बीमार पड़ते ही डॉक्टर खिचड़ी खाने की हिदायत ही क्यूं देते हैं।
खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से खिचड़ी बहुत मशहूर हैं। उत्तर भारत में मकरसंक्रान्ति के पर्व पर मूंग दाल की खिचड़ी बनाई जाती है, वहीं राजस्थान में अक्षय तृतीया के मौके पर भी खिचड़ी बनाई जाती है जिसे खीच कहा जाता है और गुजरात में कई जगह खिचड़ी को खिचड़ा भी कहा जाता है। जानिए क्या है लहसुन वाला नमक और इसके सेवन से होने वाले ख़ास फायदे
हेल्थ के हिसाब से खिचड़ी खाने के कई फायदें हैं इससे शरीर में ऊर्जा बनी हुई रहती है। यहां तक की हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को खिचड़ी अति प्रिय है। आइए जानते है खिचड़ी खाने के क्या फायदें हैं।

पोषण से भरी
खिचड़ी एक पौष्टिक भोजन है, जिसमें पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है। चावल, दाल और घी का संयोजन आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम प्रदान करता है। कई लोगों इसके पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए इसमें सब्जियां भी मिला देते हैं।जानें, विदेशी लोग वजन कम करने के लिये क्या-क्या उपाय करते हैं

पचाने में आसान
खिचड़ी पेट और आंतों को स्मूथ बनाती है। सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से यह बच्चों और बुजुर्ग दोनों के लिये बेहतर भोजन है।

इम्यूनिटी रखता है बरकरार
खिचड़ी शरीर को ऊर्जा तो देने का काम करती ही है, साथ ही ये रोग प्रतिरक्षा तंत्र को भी बूस्ट करने का काम करती है। शरीर को शांत व डीटॉक्सीफाई कर आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है।

त्रिदोषिक आहार
खिचड़ी आयुर्वेदिक आहार का एक मुख्य भोजन है, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वत्ता, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है। यह क्षमता ही खिचड़ी को त्रिदोषिक आहार बनाती है।

ग्लूटेन मुक्त आहार
ग्लूटेन अर्थात लस से परहेज कर रहे लोगों के लिये भी खिचड़ी एक बेहद फायदेमंद आहार विकल्प होती है। इसमें मौजूद दालों, सब्जियों व चावल में ग्लूटेन नहीं होता है और सभी लोग इसका निश्चिंत होकर सेवन कर सकते हैं।

ऊर्जावर्धक आहार
सुपाच्य भोजन होने के नाते खिचड़ी फैट व आलस्य नहीं पैदा कतरती है। यही कारण है कि धार्मिक लोगों व मौंक्स का खिचड़ी प्रमुख आहार होता है। पर्याप्त प्रोटीन देने के साथ रक्त में शर्करा की स्थिरता बनाए रखने में सहायक खिचड़ी मन की शांति और शांति की भावनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है।

प्रोटीन का सोर्स
प्रोटीन से भरी दाल में एक प्रकार का अमिनो एसिड नहीं होता इसलिए केवल दाल का सेवन न कर दाल-चावल या खिचड़ी के रूप में खाएं। खिचड़ी कॉम्बिनेशन में सेवन करने से यह कम्प्लीट प्रोटीन बन जाता है।

धार्मिक महत्व
खिचड़ी बनने की परंपरा को भगवान शिव का अंश माने जाने वाले बाबा गोरखनाथ ने शुरू किया। माना जाता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते और कमज़ोर होते जा रहे थे। इस समस्या का समाधान बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पका कर निकाला। यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था। इससे शरीर को तुरंत उर्जा मिलती। और फिर बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा।



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