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क्यों व्हाइट नहीं, ब्राउन ब्रेड होती है हेल्दी?
ब्राउन ब्रेड गेहूं से बनी होती है जबकि व्हाइट ब्रेड मैदे से बनी होती है। इसलिए डाइटिशियन भी ब्राउन ब्रेड खाने की सलाह देते हैं। आइए जानते है इस बारे में।
अक्सर डाइटिशियन हमें ब्राउन ब्रेड खाने की सलाह देते है जानते है क्यों ? क्योंकि ये व्हाइट ब्रेड की तुलना में हेल्दी होती ब्राउन ब्रेड और व्हाइट ब्रेड में वास्तव में क्या अंतर है?
ब्राउन ब्रेड गेहूं से बनी होती है जबकि व्हाइट ब्रेड मैदे से बनी होती है। रिफाइंड अनाज (संशोधित अनाज) के साथ समस्या यह होती है कि इसमें अनाज की बाहरी परत निकाल दी जाती है।
इस छिलके में फाइबर अधिक मात्रा में होने के कारण इसमें पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गेहूं में चोकर के साथ साथ बीज और एंडोस्पर्म (अनाज के आंतरिक भाग) भी पाया जाता है।
रिफाइंड अनाज में चोकर और बीज नहीं होते। अनाजों की रिफाइनिंग की प्रक्रिया के दौरान अनाज की बाहरी परत में उपस्थित पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। यही कारण है कि गेंहू की ब्रेड हेल्दी होती है। आइए जानते है-

फैक्ट #1
ब्राउन ब्रेड में नियासिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन, फोलेट, विटामिन के, विटामिन ई, पैंटोथेनिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम और फाइबर पाया जाता है।

फैक्ट #2
ब्राउन ब्रेड में कम कैलोरीज़ पाई जाती हैं। व्हाइट ब्रेड में एडिटिव पदार्थ होते हैं जो कैलोरी की मात्रा बढ़ाते हैं। गेहूं की ब्रेड से आपको वज़न नियंत्रण में रखने में सहायता मिलती है।

फैक्ट #3
ब्राउन ब्रेड का ग्ल्य्समिक इंडेक्स (सूचकांक) कम होता है। अत: इससे आपकी ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इससे डाइबिटीज होने की संभावना कम हो जाती है।

फैक्ट #4
ब्राउन ब्रेड अच्छी से पच जाती है। ब्राउन ब्रेड में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे आपको मल त्याग में आसानी होती है।
ब्राउन ब्रेड में उपस्थित चोकर आपके मल को नरम बनाते हैं जिससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या नहीं होती। यदि आप प्रतिदिन ब्राउन ब्रेड खाते हैं तो आपको लेक्सेटिव की आवश्यकता नहीं होती।

फैक्ट #5
अनेक अध्ययनों के अनुसार ब्राउन ब्रेड के सेवन से हृदय के रोग होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। वास्तव में रिफाइंड अनाज की तुलना में संपूर्ण अनाज अधिक अच्छे होते हैं। वे ख़राब कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं।

फैक्ट #6
यदि आप नियमित तौर पर ब्राउन ब्रेड खाते हैं और व्हाइट ब्रेड का सेवन नहीं करते तो मोटापे का खतरा 40% कम हो जाता है (यह अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।



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