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स्वस्थ फेफड़े पाने के 9 उपाय
अगर हम अपने फेफड़ों की सही देखभाल करते हैं तो वह ज़िंदगी भर सही चल सकते हैं। अगर फेफड़ों पर बाहर से हमला न हो तो वह काफी टिकाऊ होते हैं। कुछ अपवाद को छोड़कर हमारे फेफड़े तब तक मुसीबत में नहीं पड़ते जब तक हम उन्हें मुसीबत में नहीं डालते।
यहाँ पर कुछ ऐसे उपाय हैं जो हम सब को करना चाहिए ताकि हमारे फेफड़े बढ़ती उम्र के साथ भी स्वस्थ रह सकें।

1. धूम्रपान न करें
रोज़ धूम्रपान करना फेफरों को सबसे ज़यादा नुकसान पहुंचा सकता है। जब धूम्रपान की बात आती है तो कोई सुरक्षित दहलीज़ नहीं है। आप जितना ज्यादा धूम्रपान करेंगे आपको फेफरों का कैंसर और सीओपीडी (जिसके अंदर दीर्घकालिक फेफरों का सूजन और एफिसेमा आता है) होने का ख़तरा उतना ही ज्यादा होगा। धुंआ काफी खतरनाक होता है। ऐसा पाया गया है कि उस वातावरण में रहने मात्र से जहाँ लोगों ने धूम्रपान किया हो काफी खतरनाक साबित हो सकता है। सिर्फ धूम्रपान त्याग देना ही काफी नहीं है। मारिजुआना, पाइप या सिगार भी आपके फेफरों के लिए उतना ही खतरनाक है।

2. स्वच्छ हवा के लिए मारामारी
155 मिलियन से ज्यादा लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ हवा का प्रदूषण जान के लिए ख़तरा है। हवा प्रदूषण से न सिर्फ अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियां होती हैं पर कई मामलों में इससे लोगों की मौत भी हो गयी है। आप स्वच्छ हवा के लिए बनाये गए नियम का साथ देकर और अधिनियम को काटने के प्रयास का विरोध कर बदलाव ला सकते हैं। आप अपने स्तर पर बिजली की बचत करें, लकड़ी या कूड़े को जलाने से बचें और गाड़ी कम चलायें।

3. ज्यादा वर्कआउट करें
एक्सरसाइज से आपके फेफड़े बहुत ज़यादा मजबूत नहीं हो जायेंगे पर वर्कआउट के बाद फेफरों से ज़यादा काम लिया जा सकता है। जितना ज्यादा अच्छा आपका हृदय स्वास सम्बन्धी फिटनेस होगा, उतना ही आपके फेफरों को हृदय और मासपेशियों को ऑक्सीजन देने में आसानी होगी। रोज़ाना वर्कआउट करना ज़रूरी है अगर आपको दीर्घकालिक फेफरों की बीमारी है। आपके फेफरों को वह सारी मदद चाहिए जो उसे मिलनी चाहिए। अगर ठंडी हवा के कारण आपका अस्थमा बढ़ गया है तो स्कार्फ या फिर मास्क का इस्तमाल करें ताकि ठंडी हवा आपके फेफरों तक न पहुँच पाये।

4. बाहर के वायु प्रदूषण से बचें
ज़्यादातर गर्मी के महीने में कुछ क्षेत्रों में ओजोन और दूसरे प्रदूषक के कारण एक्सरसाइज या आपका बाहर समय बिताना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। फेफरों की समस्या से जूझ रहे लोग ज़्यादातर वायु प्रदूषण से संवेदनशील होते हैं।

5. घर की हवा को स्वच्छ रखें
वायु प्रदूषण सिर्फ बाहर की समस्या नहीं है। कई घर की चीज़ें हैं जैसे लकड़ी से जलने वाले स्टोव, अंगीठी, मोल्ड, निर्माण वस्तुएं और कुछ मोमबत्तियां और एयर फ्रेशनर भी वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। यहाँ पर तीन तरह के उपाय ज़रूरी हैं: स्रोत को हटाना, वेंटिलेशन को बढ़ाना और वायु को स्वच्छ रखने का बंदोबस्त करना। एयर क्लीनर गैस पर कोई असर डाले हुए वायु को स्वच्छ बनाये रखती है।

6. पौष्टिक खाना खाएं
ऐसा माना जाता है कि ऐसा खाना जिसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं फेफरों के लिए फायदेमंद होता है। 2011 में की गई एक खोज से पता चला कि वह लोग जो फूलगोभी, ब्रॉकली, बंदगोभी खाते हैं उनमें फेफरों का कैंसर होने की सम्भावना उन लोगों से काफी कम होती है जो यह चीज़ें नहीं खाते। इन हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में ज्यादा मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जिसका फेफरों पर रक्षात्मक असर होता है।

7. काम करते समय फेफरों का बचाव करें
कई काम जैसे निर्माण हो या बालों की स्टाइलिंग हो, इनमें फेफरों पर ख़तरा बना रहता है। पेंट की भभक, धूल, डीजल निकास सम्भावित दोषी हैं। अगर आपका बॉस आपको बचाव के लिए साधन देता है तो आप इसका इस्तमाल अवश्य करें। अगर नहीं तो अपने यूनियन लीडर या लोकल एजेंसी से संपर्क करें जिनका काम स्वास्थ्य व्यवस्था से मिलता जुलता है।

8. रेडन के स्तर की जांच कर लें
पृथ्वी तल पर यूरेनियम की खराबी से उत्पन्न होता है एक रेडियोएक्टिव गैस जिसे रेडन कहते हैं। अगर आपके घर की दीवार या नींव में कोई दरार है तो वहाँ से यह आपके घर के अंदर घुस सकता है। रेडन से उन लोगों को भी कैंसर होने की सम्भावना होती है जो धूम्रपान नहीं करते। अपने घर की जांच करवा लें। रेडन का कोई जाना हुआ सुरक्षित स्तर नहीं है इसलिए यह जितना कम होगा आपके फेफरों के लिए उतना ही अच्छा होगा।

9. सुरक्षित उत्पाद ही खरीदें
कई घर की गतिविधियां जैसे सफाई, हॉबी या घर का सुधार में आपके फेफरों के सामने खतरनाक गैस आती हैं। आपको सुरक्षित उत्पाद लेकर इनसे बचना चाहिए। हमेशा ऐसे क्षेत्र में काम करें जो हवादार हो और ज़रुरत हो तो डस्ट मास्क पहन लें। उन पेंट का इस्तमाल नहीं करें जो आयल बेस्ड हो बल्कि वाटर बेस्ड पेंट का इस्तमाल करें। सफाई करने वाले उत्पाद में भी खतरनाक केमिकल जैसे अमोनिया और ब्लीच हो सकते हैं। किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले लेबल ज़रूर पढ़ें।



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