कब्ज़ के बारे में मिथक और सत्य

By Super

आज कब्‍ज जैसी पेट की समस्‍या से हर दूसरा इंसान परेशान है। कब्‍ज की समस्‍या होने पर पेट ठीक से साफ नहीं होता। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।


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अगर आपको कब्‍ज की बीमारी है और आपने उसका जल्‍दी से जल्‍दी निदान नहीं किया तो, शरीर मे अन्‍य बीमारियां पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा लोगों के दिमाग में आम मिथक भी देखे गए हैं, जिन्‍हें लोग आंख मूंद कर विश्‍वास कर लेते हैं और हर वक्‍त परेशान रहते हैं। आइये जानते हैं क्‍या हैं वे कब्‍ज के बारे में मिथक और सत्‍य बात ।

मिथक: आपको प्रतिदिन एक बार टॉयलेट जरूर जाना चाहिए

मिथक: आपको प्रतिदिन एक बार टॉयलेट जरूर जाना चाहिए

कौन सी बात किसके लिए सामान्य है यह व्यक्ति दर व्यक्ति बदलता रहता है। कुछ लोग दिन में तीन बार मल त्याग करते हैं जबकि अन्य एक सप्ताह में तीन बार जाते हैं। हालाँकि दिन में एक बार मल त्याग करना सामान्य है, वही यदि किसी दिन मल त्याग न हो तो कोई बात नहीं है। कब्ज़ से तात्पर्य है सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग। यदि आप सप्ताह में एक बार से कम मल उत्सर्जन करते हैं तो आप गंभीर रूप से कब्ज़ से ग्रसित हैं। यदि अचानक कब्ज़ हो या यदि दो सप्ताह से अधिक समय से आप कब्ज़ की समस्या से ग्रस्त हों तो तो मेडिकल जांच करवाएं।

 मिथक: कब्ज़ के कारण विषैले पदार्थों का निर्माण होता है जिससे स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं होती हैं

मिथक: कब्ज़ के कारण विषैले पदार्थों का निर्माण होता है जिससे स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं होती हैं

कुछ लोगों का ऐसा विश्वास है कि कब्ज़ के कारण मल में उपस्थित विषैले पदार्थ शरीर द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। उनका ऐसा मानना है कि इसके कारण कई बीमारियाँ जैसे ऑर्थराइटिस, अस्थमा और कोलोन कैंसर आदि हो सकती हैं। परन्तु इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि मल में विषैले पदार्थ होते हैं या पेट की सफ़ाई, लेक्सेटिव या एनीमा से कैंसर या अन्य बीमारियों से बचा जा सकता है।

मिथक: कब्ज़ का अर्थ है कि आपको फाइबर का सेवन अधिक करना चाहिए

मिथक: कब्ज़ का अर्थ है कि आपको फाइबर का सेवन अधिक करना चाहिए

आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से कब्ज़ की परेशानी दूर होती है। परंतु पुरानी कब्ज़ वास्तविक समस्या की ओर संकेत करती है। यह मधुमेह या थाईराइड ग्रंथि के कार्य में खराबी का संकेत करती है। पार्किन्संस की बीमारी या हृदयाघात के परिणामस्वरूप भी यह समस्या आ सकती है या किसी दवाई की प्रतिक्रिया के कारण भी यह समस्या हो सकती है। बहुत ही कम मामलों में यह कोलोरेक्टल कैंसर या ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत करती है। यदि यह समस्या दो सप्ताह से अधिक समय तक रहे या आपके मल में रक्त आने लगे, मल त्याग करते समय दर्द हो या बिना किसी कारण वज़न कम हो रहा हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।

 सत्य: डेयरी उत्पादों का सेवन करने से कब्ज़ हो सकती है

सत्य: डेयरी उत्पादों का सेवन करने से कब्ज़ हो सकती है

यदि आपको लैक्टोस सहन नहीं होता तो दुग्ध पदार्थों का सेवन करने से कब्ज़ की समस्या आ सकती है। एक अध्ययन से पता चला है कि जिन बच्चों को लैक्टोस सहन नहीं होता उन्हें कब्ज़ की समस्या हो जाती है। ऐसे लोग जिन्हें लैक्टोस सहन नहीं होता वे दिन में दिन में कम से कम एक बार लैक्टोस की थोड़ी मात्रा अवश्य खानी चाहिए। यदि इसकी थोड़ी मात्रा से भी आपको कब्ज़ हो तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

 सत्य: यदि आप बबलगम निगलते हैं तो वह पेट में चिपक सकती है

सत्य: यदि आप बबलगम निगलते हैं तो वह पेट में चिपक सकती है

यह सत्य है - परन्तु केवल कुछ मामलों में, विशेषकर छोटे बच्चों में जिन्हें यह मालूम नहीं होता कि बबलगम को निगलना नहीं है। कभी कभी बबलगम की अधिक मात्रा या इसके कई टुकड़ों को एक साथ निगल लेने पर भी एक बड़ा गोला बन जाता है जो पाचन तंत्र को ब्लॉक कर सकता है, विशेष रूप से तब जब आपने इसे अन्य न पचने योग्य चीज़ों के साथ खा लिया हो। इस ब्लॉकेज के कारण कब्ज़ की समस्या आ सकती है। परन्तु अधिकांश लोगों में बबलगम का न पचने योग्य भाग आँतों के रास्ते होते हुए अन्य खाद्य पदार्थों की तरह शरीर से बाहर निकल जाता है। अत: कभी कभी बबलगम निगलने से कोई नुकसान नहीं होता।

तथ्य: छुट्टियों के कारण कब्ज़ की समस्या हो सकती है

तथ्य: छुट्टियों के कारण कब्ज़ की समस्या हो सकती है

यात्रा करने के कारण आपकी दिनचर्या और आहार में परिवर्तन होता है जिसके कारण कब्ज़ की समस्या आ सकती है। पानी की कमी के कारण होने वाली कब्ज़ की समस्या को अधिक पानी पीकर दूर करें विशेष रूप से तब जब आप हवाई यात्रा कर रहे हों। इसके अलावा जब भी संभव हो चलें - उदाहरण के लिए जब आप अगली उड़ान की प्रतीक्षा कर रहे हों या जब कार चला रहे हों तो बीच में थोडा आराम करें। यात्रा से संबंधित अन्य सलाहें: व्यायाम, अल्कोहल का सीमित सेवन तथा फल और सब्जियों का सेवन।

सत्य: आपका मूड आपकी नियमितता को प्रभावित कर सकता है

सत्य: आपका मूड आपकी नियमितता को प्रभावित कर सकता है

तनाव के कारण कब्ज़ की समस्या आ सकती है या बढ़ सकती है। आप मेडिटेशन, योग, बायोफीडबैक और रिलेक्सेशन की तकनीकों द्वारा आप तनाव को कम कर सकते हैं। एक्यूप्रेशर या शिअत्सू मसाज भी तनाव को दूर करने में सहायक है। पेट की मसाज करने से भी मांसपेशियों को आराम मिलता है जिससे आँतों को सहायता मिलती है तथा मल त्याग आसानी से हो जाता है।

मिथक: इसे रोकने से परेशानी नहीं होती

मिथक: इसे रोकने से परेशानी नहीं होती

यदि आप टॉयलेट जाना टालते जाते हैं तो आप न केवल शारीरिक रूप से असुविधाजनक महसूस करते हैं बल्कि इसके कारण कब्ज़ की समस्या भी बढ़ जाती है तथा समय के साथ मल त्याग के संकेत भी कमज़ोर होते जाते हैं। कुछ लोग इसके लिए समय निर्धारित कर देते हैं जैसे सुबह के नाश्ते के बाद या खाने के बाद। परन्तु इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ता। जब भी मल त्याग करने की इच्छा हो, करें।

 सत्य: दवाईयों के कारण कब्ज़ हो सकती है

सत्य: दवाईयों के कारण कब्ज़ हो सकती है

दर्द, तनाव, उच्च रक्तचाप और पार्किंसंस की दवाईयों से कब्ज़ की समस्या हो सकती है। बहुत अधिक कैल्शियम और आयरन लेने से भी कब्ज़ की समस्या हो सकती है। यदि कैल्शियम संपूरक अन्य किसी संपूरक या दवाई के साथ लिया जाए तो भी समस्या आ सकती है। यदि आप चिंतित हैं तो डॉक्टर को दिखाएं।

 तथ्य: आहार में फाइबर की कम मात्रा होने से भी कब्ज़ हो सकती है

तथ्य: आहार में फाइबर की कम मात्रा होने से भी कब्ज़ हो सकती है

आहार में फाइबर की कम मात्रा लेने से भी कब्ज़ की समस्या आ सकती है। इसे रोकने के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 ग्राम फाइबर लें, अधिक मात्रा लेना और अच्छा होगा। अधिक मात्रा में फल और सब्जियां खाएं, चांवल, पास्ता और ब्रेड की जगह चोकर युक्त आहार लें। गैस तथा पेट फूलने से बचने के लिए फाइबर युक्त आहार लें। पानी मल त्याग में सहायक होता है अत: प्रतिदिन 2 से 4 गिलास अतिरिक्त पानी पीयें। परिणामों की शीघ्र अपेक्षा न करें - एक महीने नियमित तौर पर फाइबर का सेवन करने से आपको सुधार नज़र आने लगेगा।

 सत्य: आलू बुखारा आपको नियमित रहने में सहायक है

सत्य: आलू बुखारा आपको नियमित रहने में सहायक है

यह छोटा, सूखा फल कब्ज़ के लिए प्राकृतिक औषधि है। आलू बुखारे (जिन्हें सूखे बेर भी कहा जाता है) के कारण कब्ज़ के लक्षण बढ़ सकते हैं या कम हो सकते हैं। इनमें घुलनशील फाइबर होता है तथा प्राकृतिक लैक्सेटिव सोर्बिटॉल और डाईहाइड्रोफिनायलीसेटिंन होता है। आलूबुखारे में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रोल को भी कम करने में सहायक होता है। तथा वे कब्ज़ में भी सहायक होते हैं। वे बच्चे जिन्हें आलू बुखारे पसंद नहीं होते वे इसका जूस पी सकते हैं या इसके स्वाद से बचने के लिए इसके जूस को अन्य किसी जूस के साथ मिला कर पी सकते हैं।


Story first published: Tuesday, November 4, 2014, 11:14 [IST]
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