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क्या रात में ठीक से नींद नहीं आती? तो हो सकती है ये बीमारी
जिस तरह से ऊर्जा लेने के लिए आपको रोजाना खाने की जरूरत होती है, उसी तरह रात को अच्छी नींद लेना भी महत्वपूर्ण है।
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नींद की कमी के कारण डेफिसिट सर्कैडियन डिसऑर्डर (एडीएचडी) का खतरा हो सकता है, जो लगभग 75 प्रतिशत बच्चों और वयस्कों को प्रभावित करता है।
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एडीएचडी नींद से जुड़े कई विकारों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें रेस्टलेस-लेग सिंड्रोम, स्लीप एपनिया, सर्कैडियन रीदम डिस्टर्बेंस और डिलेड फेज सिंड्रोम आदि शामिल हैं।

नीदरलैंड में वीयू यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर सैंड्रा कुईज के अनुसार, 'शोध में यह पता चलता है कि एडीएचडी से पीड़ित लोग नींद की समस्यायों से पीड़ित हो सकते हैं।'
एडीएचडी के 75 फीसदी रोगियों में साइकोलोजिकल स्लीप फेज में साइकोलोजिकल संकेत स्लीप हार्मोन 'मेलेटनिन' के लेवल में परिवर्तन से जुड़े हैं। इसके अलावा नींद से संबंधित आंदोलन में 1.5 घंटे तक की कमी हो सकती है।
कुईज के अनुसार, शाम को मेलेटोनिन लेने या सुबह के समय ब्राइट लाइट थेरेपी से कई पीड़ित रोगियों का लाभ होता है, जो सर्कैडियन रीदम को रीसेट करने में मदद कर सकते हैं।
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शोधकर्ता विटामिन डी लेवल, ब्लड ग्लूकोज, कोर्टिसोल लेवल, 24 घंटे का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट जैसे बायोमार्कर ढूंढकर इस शारीरिक-मानसिक संबंध की पुष्टि करने के लिए काम कर रहे हैं, जो एडीएचडी को गैर-औषधीय तरीकों से इलाज करने में मदद कर सकते हैं।
कुईज ने कहा, 'हालांकि हम यह नहीं कहते हैं कि सभी एडीएचडी समस्याएं इन सर्कैडियन पैटर्न से जुड़ी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण कारक है।'
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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