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मुंह में जाते ही पिघल जाती है चॉकलेट, कहीं आप चॉकलेट के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे हैं?
चॉकलेट का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। चॉकलेट हर किसी को फेवरेट होता है। प्राचीन मेसोअमेरिकन में तो इसे 'देवताओं का खाना' कहा गया है। इसका मखमली अहसास और कई ड्रायफूट्स से मिलकर बना चॉकलेट हर किसी को अपने मिठास से दीवाना बना देता है। आपने घर में भी देखा होगा कि छोटे से लेकर बड़े तक हर कोई चॉकलेट्स खाना बहुत पसंद करता है। मुंह में जाते ही चॉकलेट्स एकदम से पिघल जाती है, कभी आपने गौर किया है कि आपकी चॉकलेट मुंह में जाते ही कैसे पिघल जाती है। इसके पीछे दो कारण हो सकते है एक तो आपकी चॉकलेट शुद्ध कोकी बींस से बनी हो या फिर उसमें वेजिटेबल ऑयल यानी वनस्पति तेल का यूज हो रहा हो।
जी हां, सुनकर थोड़ा धक्का लगा होगा लेकिन ये सच है कि मार्केट में मिलने वाली चॉकलेट असल में चॉकलेट ही नहीं है। बस चॉकलेट के नाम पर पैकेट में बंद करके बेची जा रही जो आपको बीमार कर सकती है। आइए जानते है इस पूरी रिपोर्ट में चॉकलेट से जुड़ी कुछ सच्चाईयां।
चॉकलेट दरअसल कोको बीन्स से बनती है, लेकिन पिछले कुछ समय से कोको बींस के उत्पादन में डिमांड की तुलना में काफी कमी आई है। ऐसे में अब सवाल यह है कि कोको बीन्स का उत्पादन कम होने के बावजूद भी बाजार हमेशा चॉकलेट की कमी क्यों नहीं आई?

क्यों मुंह में जाते ही पिघल जाती है चॉकलेट
चॉकलेट जो चीज अलग बनाती है वो है इसका स्वाद और इसका क्रीमी टेक्सचर। चॉकलेट का क्रीमी टेक्सचर कोको बटर या 'द ओब्रोमा ऑयल' की वजह से बनता है। कोको बटर में काफी मात्रा में प्राकृतिक सैचुरैटेड फैट होता है, ये कमरे के तापमान पर निर्भर करता है। जैसे ही तापमान थोड़ा बढ़ने लगता है तो यह पिघलने लगता है। जो कि एक अच्छी चॉकलेट की विशेषता होती है। यही वजह है कि जैसे ही आप चॉकलेट अपने मुंह में डालते हो तो ये पिघल जाता है।

कोको बटर की जगह हाईड्रोजनीकृत तेल का इस्तेमाल
हालांकि चॉकलेट्स की लोकप्रियता से यह बात समझना एकदम आसान है कि चॉकलेट खाना हम सबको खूब पसंद है। ये इसकी लोकप्रियता का ही कमाल है कि दुनियाभर में चॉकलेट की डिमांड कभी कम नहीं हुई। लेकिन बढ़ती डिमांड के आगे कोको बटर का उत्पादन कम है, जिसके वजह से कोको बटर के दाम मार्केट में ऊंचाईयां छू रहे है। कोको बटर की महंगे होने के वजह से लागत बचाने के लिए कई चॉकलेट उत्पादक चॉकलेट में इसकी बजाय वनस्पति तेल जैसे नारियल का तेल, ताड़ का तेल,सफेद सरसों का तेल, सोयाबीन का तेल के अलावा कई तरह के तेल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

सेहत के लिए नुकसानदायक
बाज़ार में मौजूद चॉकलेट खरीदते समय अगर आप अगर पैकेट पर ध्यान दें, तो आपको हाईड्रोजनीकृत वनस्पति तेल नामक सामग्री का पता चलेगा। यह सामग्री न तो सिर्फ स्वाद, बल्कि असली चॉकलेट के महक को भी खत्म करती है। साथ ही यह सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
वनस्पति तेल कमरे के तापमान पर स्थिर रहता है, जो हाईड्रोजिनेशन की प्रक्रिया के बाद सख़्त बनता है। ऐसा करने से चॉकलेट के उपयोग होने तक की अवधि बढ़ जाती है। लेकिन इसकी वजह से शरीर में सैचूरेटेड फैट या ट्रांस फैट बनना शुरु हो जाता है जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इसके प्रयोग से शरीर में डायबिटीज़, हृदय संबंधी रोग और मोटापे की परेशानी भी हो सकती है।

चॉकलेट सामग्री पर दे ध्यान
मार्केट में उपलब्ध चॉकलेट की सामग्री में हाईड्रोजनीकृत वनस्पति तेल शामिल किया जा रहा है, जो आपकी सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। आप जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में हाईड्रोजनीकृत तेल से निर्मित चॉकलेट पर प्रतिबंध लगा हुआ है, वहां सिर्फ 100 प्रतिशत कोको बटर से निर्मित चॉकलेट ही बिक्री और खरीदने की इजाजत है।

चॉकलेट के नाम पर क्या खा रहे हैं आप?
अब जो आप पढ़ेंगे, इसके बाद हो सकता है आप खुद को ठगा सा महसूस करें, क्योंकि भारत में आने वाली सभी चॉकलेट, जिनमें हाईड्रोजनीकृत वनस्पति तेल होता है, उसके पैकेट पर कहीं भी ‘चॉकलेट' शब्द का जिक्र नहीं होता है। इसका मतलब यह है कि कोई भी ब्रांड यह दावा नहीं कर रहा है कि हकीकत में ये असली चॉकलेट ही है।
इसलिए दूसरी बार अपने बच्चों के लिए चॉकलेट्स खरीदने से पहले पूरी जांच पड़ताल कर लें।

देखकर खरीदें
आप देखेंगे कि चॉकलेट के नाम पर बिकने वाली इस वस्तु के पैकेज के पीछे सामग्री की सूची में आपको हाईड्रोजनीकृत तेल लिखा हुआ मिलेगा। जो कि सेहत के हिसाब से बहुत नुकसानदायक है।



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