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दिल बेचारा में एक्ट्रेस को होता है थाइराइड कैंसर, जानें लक्षण और इलाज
बॉलीवुड के शानदार अभिनेता रहे सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम फिल्म 'दिल बेचारा' को दर्शक खूब प्यार दे रहे हैं। यह फिल्म 24 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी-हॉटस्टार पर रिलीज हुई और खूब देखी जा रही है। उनकी इस अंतिम फिल्म की एक्ट्रेस हैं, संजना सांघी। फिल्म में उनका नाम किजी है। फिल्म और प्रोमों में संजना को उनके नाक में एक पाइप लगी हुई के साथ देखा जाता है जो एक छोटे से ऑक्सीजन सिलेंडर से जुड़ी होती है। किजी हमेशा अपने साथ वह सिलेंडर ढोती हैं। दर्शक सोचते हैं कि आखिर उन्हें कौन सी बीमारी है। फिल्म शुरू होती है और वह अपने बारे में बताना शुरू करती हैं, तो दर्शको को पता चलता है। वह कहती हैं, उन्हें थायराइड कैंसर है। क्या है यह बीमारी, कैसे होती है, इसके लक्षण क्या हैं और क्या इसका इलाज है?

क्या होता है थायराइड?
सबसे पहले तो यह जानिए कि थायराइड क्या है। यह बटरफ्लाई यानी तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित होती है। हार्मोन का स्त्राव करना इसका काम होता है। ये हार्मोन हमारे शरीर और दिमाग को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अनुवांशिक या अन्य कई कारणों से इस ग्रंथि के साथ बड़ी समस्या हो जाती है। ऐसा होना व्यक्ति के लिए कई तरह से हानिकारक होता है।


क्या है थायराइड कैंसर?
कैंसर यानी असामान्य रूप से कोशिकाओं का बढ़ता जाना। शरीर के जिस हिस्से में ऐसा होता है, उसे उसी कैंसर के नाम से जाना जाता है। जैसे मुंह में कोशिकाएं बढ़ती जाए तो मुंह का कैंसर। जब थायराइड ग्रंथि में असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं तो यह थायराइड कैंसर कहलाता है। अगर इसका समय से इलाज नहीं कराया गया तो बड़ी समस्या हो सकती है। थायराइड कैंसर से हार्मोन असंतुलित हो जाते है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को होने की संभावना ज्यादा होती है।

थायराइड कैंसर के लक्षण
- गर्दन में गांठ पड़ना
- ठंड न होते हुए भी खांसी की समस्या होना
- गला बैठना या फिर आवाज में परिवर्तन
- गर्दन में सूजन होना
- खाना निगलने में कठिनाई होना
- कर्कश आवाज

थायराइड कैंसर के कुछ और लक्षण
- स्किन और बालों का डाई और रुखा होना
- आंख संबंधी समस्या होना
- सोचने और बोलने की क्षमता पर प्रभाव पड़ना
- स्मरणशक्ति कमजोर हो जाना
- वजन घटना या फिर बढ़ना

इसके कारण
यह किसी व्यक्ति को अनुवांशिक तौर में मिल सकता है। यानी कि परिवार की पिछली पीढ़ियों में किसी को यह बीमारी रही हो। इसे कम्यूटर थायराइड कार्सिनोमा नाम से भी जाना जाता है। एडिएशन के कारण या आयोडीन की कमी के कारण भी थायराइड कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
इलाज
थायराइड कैंसर के इलाज के लिए सबसे जरूरी है, जल्द से जल्द लक्षणों पर गौर कर इसकी पहचान करना। अगर इसक बीमारी के बारे में समय रहते जान लिया तो व्यक्ति जल्दी ठीक हो सकता है। लेकिन देरी होने पर यह गंभीर हो जाता है। कई बार थायराइड ग्रंथि को निकाल दिया जाता है। इस स्थिति में कृत्रिम थायराइड ग्रंथि का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसके अलावा थायराइड कैंसर का उपचार रेडियोधर्मी आयोडीन की मदद से भी किया जाता है। मरीज को यह दोबारा न हो, इसके लिए उसे खुद का पूरा ध्यान रखना पड़ता है।



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