Latest Updates
-
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल -
गुड फ्राइडे पर घर पर बनाएं रुई जैसे सॉफ्ट 'हॉट क्रॉस बन्स', यहां देखें सबसे आसान रेसिपी -
Good Friday 2026: गुड फ्राइडे क्यों मनाया जाता है? जानें शोक के इस दिन को ‘गुड’ फ्राइडे क्यों कहा जाता है -
Good Friday 2026 Bank Holiday: गुड फ्राइडे पर बैंक खुले हैं या बंद? देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
Good Friday 2026: क्या थे सूली पर चढ़ते मसीह के वो आखिरी 7 शब्द, जिनमें छिपा है जीवन का सार -
हनुमान जयंती पर जन्में बेटे के लिए ये 12 पावरफुल नाम, जानें इस दिन पैदा हुए बच्चे क्यों होते हैं खास? -
World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म क्या होता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण, इलाज और बचाव -
सच हुई बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी! मिडिल ईस्ट वॉर के बीच इंडोनेशिया में भूकंप और सुनामी अलर्ट -
Hanuman Jayanti पर दिल्ली के इन 5 मंदिरों में उमड़ती है भारी भीड़, एक तो मुगल काल से है प्रसिद्ध
इस मुस्लिम देश में सदियों से जल रही मां भगवती की अखंड ज्योत
दुनियाभर में देवी मां के कई मंदिर मौजूद है, लेकिन किसी 95 फीसदी वाले मुस्लिम देश में देवी मां का मंदिर होना हमें चौंका देता है। लेकिन इससे भी हैरान कर देता है जब हम सुनते है कि उस मंदिर में सदियों से अखंड ज्योत जलती आ रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं। अजरबैजान की जहां सुराखानी में सदियों से मां भगवती का एक प्राचीन मंदिर स्थित है।
कई सदियों के बाद भी यह मंदिर शान से खड़ा है। हालांकि अब मंदिर सुनसान रहता है, यहां इक्का दुक्का लोग दिख जाते है। इस मंदिर को आतिशगाह अथवा टेंपल ऑफ फायर नाम से भी जाना जाता है।
यहां कई वर्षों से एक पवित्र अग्नि निरंतर जल रही है। यह मंदिर मुख्यत: अग्नि को ही समर्पित है। चूंकि हिंदू धर्म में अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता है। इसलिए यहां जल रही ज्योति को साक्षात भगवती का रूप माना गया है। उल्लेखनीय है कि ऐसी ही ज्योति मां ज्वालाजी के मंदिर में भी जल रही है।

निरतंर लपटें निकलती रहती है
मंदिर में प्राचीन वास्तुकला का उपयोग किया गया है। यहां एक प्राचीन त्रिशूल स्थापित है। निकट ही अग्निकुंड से निरंतर लपटें निकलती रहती हैं। मंदिर की दीवारों पर गुरुमुखी में लेख अंकित हैं।

हिंदुस्तान के कारोबारी ने बनाया था ये मंदिर
मंदिर की कथा के अनुसार, पुराने जमाने में हिंदुस्तान के कारोबारी इसी रास्ते से सफर करते थे। उन्होंने मां ज्वालाजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह मंदिर बनवाया। इतिहास के जानकारों का मानना है कि मंदिर के निर्माता का नाम बुद्धदेव था। वे हरियाणा में मादजा गांव के निवासी थे, जो कुरुक्षेत्र के निकट स्थित है। मंदिर में संवत 1783 का उल्लेख किया गया है। एक और शिलालेख के अनुसार उत्तमचंद व शोभराज ने मंदिर निर्माण में महान भूमिका अदा की थी। माना जाता है कि जब हिंदुस्तानी व्यापारी इस रास्ते से गुजरते तो वे मंदिर मे मत्था जरूर टेकते थे।

भक्तों का है इंतजार
ईरान से भी लोग यहां पूजा करने आते थे। यहां आने वाले लोग मंदिर के पास बनी कोठरियों में विश्राम करते थे। 1860 ई. में यहां से पुजारी चले गए। उसके बाद यहां किसी पुजारी के आने का विवरण उपलब्ध नहीं है। माना जाता है कि फिर कोई पुजारी यहां लौटकर नहीं आया। तब से यह मंदिर भक्तों का इंतजार कर रहा है।



Click it and Unblock the Notifications











