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क्यों होता है आंखों का रंग भूरा, नीला और हरा, जानें इसके पीछे का मैजिक

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कहते हैं कि आंखें किसी के दिलतक जानें का रास्ता होती हैं। आंखों की इस यूनिक क्वालिटी के वजह से प्रशंसा करने वाले अनगिनत कवियों, लेखकों और कलाकारों के साथ ये आपके इनर सेल्फ और और आपकी फीलिंग का रिफ्लेक्शन होती हैं। आंखों के रंगों का जादू भी चलता है। जरा सोंचे की अगर आंखों में कोई रंग ना हो तो कैसा लगेगा। आंखे भूरी, काली नीली और ग्रीन भी होती हैं और आंखों के रंगों के इस जादू को जानने के लिए आपको ये लेख पढ़ना होगा-

किस वजह से होता आंखों का रंग अलग-अलग है?

आइरिस का रंग मेलेनिन पिगमेंटेशन की मात्रा से निर्धारित होता है। जितना अधिक पिगमेंट होगा, आईरिस उतना ही गहरा होगा। नीली, ग्रे और हरी आंखें हल्की होती हैं क्योंकि आइरिस के अंदर मेलेनिन कम होता है। अब तक, दुनिया में सबसे आम आंखों का रंग भूरा है, जिसमें 55% से अधिक आबादी इस श्रेणी में आती है। एक व्यक्ति के जन्म के आधार पर, आंखों के रंग की डेमोग्राफिक अलग अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, अफ्रीकी और एशियाई वंश के लगभग सभी व्यक्तियों की आंखें भूरी होती हैं। भूरी आंखों की एक परिभाषित विशेषता उनकी बहु-रंगीन उपस्थिति है जो प्रकाश के आधार पर कॉपर से हरे रंग में अलग हो सकती है। हेज़ल आंखों में आइरिस की सीमा के आसपास मेलेनिन की हाई कॉन्टंट्रेशन होती है। अनुमान बताते हैं कि दुनिया की 5 से 8 प्रतिशत आबादी हरी और भूरी दोनों है। दुनिया की केवल 2% आबादी के पास हरी आंखें हैं।

बच्चों को आंखों का रंग कैसे विरासत में मिलता है ?

पेरेंट्स की आंखें नीली हैं, तो अगर बच्चे के भी नीली आंखें होने की संभावना है। यह इस प्रकार है कि आईरिस रंग आनुवंशिकी द्वारा नियंत्रित होता है। बहुत टाइम पहले तक डॉक्टर भी सोचते थे कि आंखों का रंग एक जीन द्वारा सेट हो जाता है। जिसकी वजह से भूरी आंखें, नीली आंखों पर हावी होने लगती हैं। सोच यह थी कि अगर दो माता-पिता दोनों की नीली आंखें हैं तो वे भूरी आंखों से बच्चा नहीं हो सकता। इसके बजाय, कई विभिन्न संभावनाएं मौजूद हैं क्योंकि पेरेंट्स के प्रत्येक गुणसूत्र पर दो जोड़े जीन होते हैं। कहा जा सकता है कि आंखों का रंग एक पॉलीजेनिक विशिष्टताहै, जिसका मतलब है कि ये कई जीनों द्वारा निर्धारित हो सकता है।

आंखों का रंग जीवन में कई बार बदलता है

आईरिस, आंखों का रंगीन हिस्सा, जरूरी रूप से एक मांसपेशी है। इसकी भूमिका पुतली के आकार को नियंत्रित करना है ताकि हम अलग-अलग लाइट सिस्टम की स्थिति में बेहतर देख सकें। जब कम लाइट होती है, तो पुतलियां बड़ी हो जाती हैं और इसके विपरीत, तेज प्रकाश में छोटी हो जाती हैं। जब आप पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जैसे कि आप जिस किताब को पढ़ रहे हैं, उस पर ध्यान केंद्रित करने पर पुतली भी सिकुड़ जाती है। जब पुतली का आकार बदलता है, तो रंग भी श्रिंक हो सकते हैं या अलग हो सकते हैं, जिससे आंखों का रंग थोड़ा बदल सकता है।

English summary

Everything you need to know about what makes eyes colored in Hindi

Most people in the world have brown eyes. Because the reason for this is that the genes that develop it are present in most people. People with blue eyes are the fewest in the world. It is believed that about 10 thousand years ago there was a change in the gene, due to which the color of the eyes of the people started turning blue. At the same time, only 2% of the world's population has green eyes.
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