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दीया मिर्जा ने दिया बेटे को जन्म, सेप्सिस इंफेक्शन से हुआ था प्रीमैच्योर डिलीवरी
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने बेटे को जन्म दिया है। दीया ने इंस्टाग्राम पर इमोशनल पोस्ट शेयर कर बेटे जन्म की जानकारी दी है। एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट में बताया है कि उनके बेटे अव्यान आजाद रेखी का जन्म 14 मई को हुआ था। एक्ट्रेस की प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई थी। बेटे को काफी समय तक ICU में रखा गया है। दीया मिर्जा ने बेटे के जन्म के दो महीने बाद 14 जुलाई को खुशखबरी शेयर की हैं। एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट में बताया है कि उनके बेटे का जन्म जल्दी हुआ है इसके बाद बच्चा आईसीयू में नर्सों और डॉक्टर की देखभाल में रहा है।

दीया ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रेग्नेंसी के दौरान अचानक एपेंडेक्टोमी हुई और बाद में सीरियस बैक्टेरियल इंफेक्शन हुआ है, जिससे सेप्सिस हो सकता था। इससे मेरी जान को भी खतरा हो सकता था। डॉक्टर ने समय पर देखभाल की और इमरजेंसी सी- सेक्शन से बेटे का जन्म हुआ। एक्ट्रेस को एपेंडेक्टोमी हुआ था जिसकी वजह से दीया को ब्लड इंफेक्शन हो गया था। इसी कारण उन्हें सेप्सिस हुआ था। चलिए जानते हैं एपेंडेक्टोमी और सेप्सिस इंफेक्शन क्या है।

क्या है सेप्सिस ?
ब्लड इंफेक्शन को सेप्सिस या फिर सेप्टिसीमिया कहते है। सेप्सिस संक्रमण काफी हानिकारक होती है। सेप्सिस तब होता है जब संक्रमण से बचने के लिए ब्लड में घुलने वाले केमिकल से पूरे शरीर में जलन और सूजन हो जाती है, तो इसे सेप्सिस कहते है। प्रेग्नेंट महिलाओं को भी सेप्सिस हो सकता है। सेप्सिस की वजह से शरीर के टिशू डैमेज हो जाते है वहीं ऑर्गन फेल्योर भी हो सकता है, कई बार सेप्सिस मौत का कराण भी बन सकता है। सेप्सिस अक्सर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को गंभीर रुप से प्रभावित करता है। समय पर इलाज के द्वारा सेप्सिस से निजात पाया जा सकता है।

सेप्सिस इंफेक्शन के स्टेज
सेप्सिस- इस स्टेज में संक्रमण से लड़ने वाला इम्यून सिस्टम ब्लड में केमिकल छोड़ता है जिससे शरीर में सूजन हो जाती है। अगर ध्यान ना दिया जाए तो आगे चलकर सेप्टिक शॉक भी हो सकता है।
सीवियर सेप्सिस- इस स्टेज में ऑर्गन फेल्योर देखा जाता है। सीवियर सेप्सिस में किडनी और लिवर डिसफंक्शन हो सकता है।
सेप्टिक शॉक- सेप्सिस इंफेक्शन में यह स्टेज सबसे ज्यादा गंभीर होता है। इस स्टेज पर शरीर का ब्लड प्रेशर गिर जाता है। सेप्टिक शॉक जानलेवा कि स्थिति होती है। सेप्सिस को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड इंफेक्शन होने का कारण
-सेप्सिस होने का सबसे बड़ा कारण बैक्टीरियल संक्रमण होता है। लेकिन सेप्सिस हल्की चोट और खंरोंच से भी हो सकता है।
- निमोनिया, यूरिनरी इंफेक्शन और अपेंडिक्स मरीज को सेप्सिस होने का खतरा अधिक रहता है।
- सर्जिकल टांके और छालों से भी सेप्सिस हो सकता है।
- पेड, किडनी संक्रमण से भी सेप्सिस हो सकता है।

गर्भावस्था में सेप्सिस के लक्षण
-प्रेग्नेंसी के दौरान तेज बुखार
- पेट के निचले हिस्से में दर्द
- सांस फूलना या फिर तेजी से सांस लेना
- सिर दर्द, मतली
- वजाइना से गुलाबी कलर का डिस्चार्ज

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड इंफेक्शन का इलाज
एंटीबायोटिक- इंफेक्शन को कम करने के लिए एंटीबायोटिक दिया जाता है। डॉक्टर प्रेग्नेंट महिलाओं की कंडीशन के अनुसार ट्रीटमेंट देते हैं।
सर्जरी- कुछ केस में डॉक्टर सर्जरी भी कर सकते हैं। सर्जरी के द्वारा पेल्विस में जमा पस को निकाला जाता है या फिर पेल्विस के संक्रमित हिस्से को भी निकाल सकते हैं।
वेंटिलेशन- ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला को वेंटिलेशन पर भी रखा जा सकता हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान सेप्सिस इंफेक्शन से बचाव
-प्रेग्नेंसी के दौरान साफ पानी का इस्तेमाल करें।
- गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल करें।
- डॉक्टर की दी हुई दवा और डाइट का सेवन करें।
- प्रेग्नेंसी के दौरान हल्की चोट, घाव का ध्यान रखें, जब तक की घाव ठीक नहीं हो जाते।
- प्रेग्नेंसी के दौरान समय पर टीकाकरण करवाएं।
- प्रेग्नेंसी के दौरान हेल्की डाइट का सेवन करें।
- किसी भी तरह की परेशानी हो तो डॉक्टर से बात करें या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।



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