Latest Updates
-
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान? -
कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन इन 4 राशियों पर मंडरा रहा संकट, कहीं आपकी राशि भी तो लिस्ट में नहीं? -
Corona Alert: सिंगर कुमार सानू के बेटे को हुआ कोविड, आंध्र प्रदेश में मिले सबसे ज्यादा मरीज, जानें लक्षण -
स्कूल टिफिन के लिए 15 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट और स्पंजी सूजी के अप्पे, नोट कर लें आसान रेसिपी -
संडे स्पेशल डिनर के लिए परफेक्ट है पनीर कॉर्न पुलाव, स्वाद ऐसा कि सब मांगेंगे दोबारा -
सूरज की तपिश से काला पड़ गया है चेहरा? इन 3 देसी नुस्खों से हटाएं जिद्दी सन टैन -
क्या बारिश से हुए नुकसान पर सरकार और इंश्योरेंस कंपनी से मिलता है मुआवजा? हां, तो जानें कैसे करें क्लेम?
शशांकासन- दूर करे हृदय रोग
शशांक का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन में बैठते समय व्यक्ति का आकार खरगोश के समान हो जाता है, इसलिए इसे शशांकासन कहते हैं।
विधि:- शशांकासन को करने के लिए नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं। दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और एड़ियों पर बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए सांस को बाहर निकालें और दोनो हाथों को आगे की ओर फैलाते हुए हथेलियों को फर्श पर टिकाएं। अपने सिर को भी फर्श पर टिकाकर रखें।

आसन की इस स्थिति में आने के बाद कुछ समय तक सांस को बाहर छोड़कर और रोककर रखें। फिर सांस लेते हुए शरीर में लचक लाते हुए पहले पेट को, फिर सीने को, फिर सिर को उठाकर सिर व हाथों को सामने की तरफ करके रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहे और फिर सीधे होकर कुछ समय तक आराम करें और पुन: इस क्रिया को करें। इस क्रिया को 4 से 5 बार करें।
लाभ:-
शशांकासन के अभ्यास से हृदय रोग दूर होते हैं, इसलिए हृदय रोगियों के लिए यह आसन अधिक लाभकारी है। इस आसन की क्रिया में श्वासन करने से फेफड़ों में स्वच्छ हवा पहुंचने से फेफड़े स्वस्थ बन जाते हैं। इस आसन को करने से आंते, यकृत, अग्न्याशय भी स्वस्थ होते हैं। इस आसन से नसें-नाड़ियां स्वस्थ व लचीली होकर सुचारू रूप से कार्य करती है। यह आसन नितंब और गुदा स्थान के मध्य स्थित मांसपेशियों को सामान्य रखता है। इस अभ्यास से साइटिका के स्नायुओं को शिथिल करता है और एड्रिनल ग्रंथि के कार्यों को नियमित करता है। यह आसन कब्ज को दूर करता है तथा सामान्य रूप से कामविकारों को दूर करता है। यह आसन उन महिलाओं के लिए भी लाभकारी है, जिनका वस्तिप्रदेश अविकासित होता है।
सावधानी-
अगर आप वर्टिगो, स्लिप डिस्क, हाई ब्लड प्रेशर संबन्धी समस्या से पीडित हैं तो इसे न करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications