पित्‍त दोष बढ़ने पर आजमाएं ये 5 जड़ी बूटियां

Posted By: Staff
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आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष शरीर की चयापचय अभिक्रियाओं को नियंत्रित करता है। पानी और अग्नि से बना हुआ यह दोष पाचन की प्रक्रिया को नियमित करने के साथ हमारी इन्द्रियों के माध्यम से दुनिया के प्रति हमारी धारणा को भी नियमित करता है।

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जब पित्त बढ़ जाता है तो व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे स्किन रैश, हार्टबर्न, डायरिया, एसिडिटी, बालों का समय से पहले सफ़ेद होना या बाल पतले होना, नींद न आना, चिडचिडापन, पसीना आना और क्रोध आदि। 

ऐसी स्थिति में कुछ जड़ी बूटियों का उपयोग करके पित्त दोष को संतुलित किया जा सकता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों के बारे में बताया गया है।

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Brahmi

ब्राह्मी

ब्राह्मी को बहुत ताकतवर हर्ब है जो शरीर को तरोताजा करती है तथा एक अनुकूलक की तरह काम करती हैं जो शारीरिक तथा मानसिक दोनों तनावों से निपटने में सहायक होती है। यह शरीर में पित्त के दोष को संतुलित करती है तथा शरीर को ठंडा रखती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर का चयापचय तंत्र ठीक तरह से कार्य करता है। इसके अलावा यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र पर भी प्रभावी रूप से काम करती है जिसके परिणामस्वरूप सीखने की क्षमता, एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने में सहायक होती है।

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cardmom

इलायची

पित्त दोष से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए इलायची ठंडे मसाले की तरह कार्य करती है क्योंकि यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है तथा प्रोटीन के चयापचय में सहायक होती है।

Shatavari

शतावरी

शतावरी एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसका उपयोग प्राचीन काल से महिलाओं के प्रजनन अंगों को मज़बूत बनाने तथा उनके अच्छी तरह से काम करने के लिए किया जा रहा है। इसमें पित्त को कम करने और पित्त से आराम दिलाने का गुण होता है जिसके कारण इसका उपयोग अपचन, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और हार्टबर्न के उपचार में किया जाता है। इसके अलावा यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को मज़बूत बनाती है जो रोगजनक जीवों और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायक होती है। इस प्रकार यह प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाने तथा उसे व्यवस्थित करने में सहायक होती है।

 Herbs to balance pitta dosha

त्रिफला

अपनी अनूठी रचना के कारण त्रिफला में सभी प्रकार के दोषों को संतुलित करने की तथा शुद्ध करने का गुण होता है। अमलाकी तरोताजा करने में सहायक होता है तथा यह प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट की तरह कार्य करता है जो आपके प्रतिरक्षा तंत्र को पोषण प्रदान करता है। हरितकी में बंधनकारी और लेक्सेटिव गुण पाए जाते हैं। बिभितकी भी बंधनकारी और तरोताजा करने वाली हर्ब है जो विशेष रूप से श्वसन तंत्र के अच्छी तरह कार्य करने में सहायक होती है। यदि इसे बताई गयी मात्रा में लिया जाए तो त्रिफला अतिरिक्त पित्त दोष को दूर करने में सहायक होता है। त्रिफला : सभी दुखों का इलाज

Kesar

केसर

केसर की विशिष्टता यह है कि यह ठंडक पहुंचाता है जबकि अन्य रक्त वाहक गर्मी उत्पन्न करते हैं। ऐसे व्यक्ति जो बढे हुए पित्त दोष के कारण ऑर्थराइटिस, हेपिटाईटिस और मुंहासों की समस्या से परेशान हैं उनके लिए केसर बहुत लाभकारी होता है। खोजों से पता चला है कि इस हर्ब में एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं तथा इसमें सूजन और कैंसर से रक्षा करने का गुण भी पाया जाता है।

इन सब हर्ब्स के अलावा यह भी आवश्यक है कि पित्त दोष को बढ़ने से बचाने के लिए कुछ बातों पर अमल किया जाए। बहुत अधिक गर्म खाना न खाएं; खाने से पहले इसे कमरे के तापमान तक लायें। मीठे, सूखे, कसैले और कडवे पदार्थ खाएं तथा खट्टे, नमक युक्त, चटपटे और तैलीय पदार्थों का सेवन न करें। ठंडक प्रदान करने वाले तेल जैसे नारियल के तेल से नियमित तौर पर मालिश करें।

English summary

Herbs to balance pitta dosha

When pitta is aggravated, In such a situation, the solution lies in using some herbs to balance the pitta dosha and the most important ones are discussed here.
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