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आयुर्वेद डाइट: बिना दवा-इलाज के ऐसे रहें स्वस्थ्य
आयुर्वेद कहता है कि शरीर का निर्माण व पोषण 'युक्त आहार' से होता है और 'अयुक्त आहार' शरीर में रोग उत्पन्न कर देता है। हमारे शरीर में वात, पित्त, कफ- ये तीन दोष अनिवार्य रूप से उपस्थित रहते हैं। इन दोषों के विकृत हो जाने पर शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं।
शरीर की जैसी प्रकृति हो, शरीर में जैसा विकार हो- उसे ध्यान में रखकर ही भोजन करना चाहिए। इसके अलावा शरीर को पानी पी कर हमेशा तरो ताजा बनाए रखना चाहिये। ऐसे ही कई और भी टिप्स हैं, जो आज हम आपको बताएंगे जिसे आयुर्वेद हमें मानने को बोलता है।

1. पोषणयुक्त आहार खाइये
अगर आपको स्वस्थ रहता है तो कोशिश करें की जितना ज्यादा ताजा फल और सब्जी खा सकें खाएं। इन चीजों में आपको सबसे ज्यादा पोषण मिलेगा ना कि बासी चीजों में। हमारा शरीर भी इसी प्रकार से बना है। इसे प्रोसेस्ड और बासी भेाजन पचाने में दिक्कतें आती हैं। इसके अलावा मैदा आदि की जगह पर साबुत अनाज का सेवन करें।

2. बैलेंस डाइट खाइये
इसके लिये सिंपल फार्मूला है- अपने हर भोजन में आयुर्वेदिक टेस्ट को पैद कीजिये, जैसे मीठी, नमकीन, खट्टा, तीखा, कसैला और कसैला। माना गया है कि इन 6 टेस्ट को अगर आप अपने भोजन में शामिल करेंगे तो आपका भोजन पूरी तरह से बैलेंस हो जाएगा और आपको पेट भरने का एहसास होगा। इस तरह से आप बाहर का स्नैक नहीं खाएंगे और ओवरईटिंग से भी बच जाएंगे।

3. ढेर सारी सब्जियों और फलों का सेवन करें
अलग-अलग रंगों वाले फलों और सब्जियों में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, इनका सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। लाल रंग वाले कुदरती खाद्य पदार्थों जैसे सेब, टमाटर, रास्पबेरी, लाल अमरूद, राजमा, चेरी, स्टा्रबेरी आदि में कई एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। हरी सब्जियों और फलों में पाया जाने वाला विटामिन के आंखों, हड्डियों और दांतों के लिए लाभदायक रहता है।

4. जितना हो कच्ची चीज़े खाएं
जब हम कच्चे फल और सब्जियां खाते हैं तो वह पोषण हमारे शरीर के कोने कोने तक पहुंचता है। अधपका या कच्ची साग सब्जी खाने से पेट एक दम ठीक रहता है और पाचन क्रिया मजबूत होती है।
ऐसा करने से उनके पोषक तत्व बचे रहते हैं। आयुर्वेद सलाह देता है कि आपको भाप में पकाई हुई सब्जियों का सेवन करना चाहिये जिससे पेट हमेशा सही काम करे। अगर आपको सलाद खाना है तो लंच के समय इसे खाना एकदम सही रहता है।

5. मसालों का प्रयोग करें
अगर आप अपने रोजाना के भोजन में मसालों का प्रयेाग करते हैं, तो उससे ना खाने का स्वाद बढता है बल्कि उसका पोषक तत्व भी बढ जाता है। मसालों से खाना अच्छी तरह से हजम होता है और पेाषक तत्व अच्छी तहर से शरीर दृारा ग्रहण भी होता है।

6. चबाकर करें भोजर
भोजन करते समय जल्दबाजी न करें। भोजन धीरे-धीरे, प्रेमपूर्वक व इस शुद्ध भाव से करें कि इससे मेरे बल, बुद्धि, आयु व आरोग्य की वृद्धि हो रही है। अधचबा खाना जब पेट में जाता है, तो वैसा भोजन पचाने के लिए आंतों पर अधिक दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से आंतें कमजोर होने लगती हैं।

दो बार मल त्याग
अगर हमारा पाचन सही नहीं है तो हमारे शरीर में विषैले तत्व इकठ्ठा होने शुरु हो जाएंगे। सामान्यतः व्यक्ति दिन में दो बार भरपेट भोजन करता है, जिसका दो बार ही मल बनता है। लेकिन अधिकतर व्यक्ति इस मल को केवल एक ही बार- सुबह के समय उत्सर्जित करते हैं। अतः एक समय का मल बड़ी आंत में ही पड़ा रह जाता है। यह पड़ा हुआ मल कब्ज, गैस, भारीपन, आलस्य, रक्त विकार, चर्म रोग, वात रोग आदि का कारण बनने लगता है। इसलिए दिन में दो बार- सुबह व शाम रात्रि भोजन से पहले शौच अवश्य जाएं।

पानी खूब पिएं
अपने शरीर को तरो ताजा रखना काफी जरुरी है इसलिये पानी पीना बहुत जरुरी है। ऐसे में गरम पानी शरीर से गंदगी को बाहर निकालता है। बर्फ वाला पानी नहीं पीना चाहिये क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिये खराब होता है। वहीं कैफीन, सोडा और शराब भी आपके शरीर को हानि पहुंचाते हैं।



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