Latest Updates
-
World Thalassemia Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व थैलेसीमिया दिवस? जानें इसका महत्व और इस साल की थीम -
Mother's Day 2026: डिलीवरी के बाद हर महिला को करने चाहिए ये योगासन, जल्दी रिकवरी में मिलेगी मदद -
Mother's Day 2026: मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, 50 के बाद जरूर करवाएं उनके ये 5 जरूरी टेस्ट -
Mother’s Day Special: बेटे की जिद्द ने 70 साल की उम्र में मां को दी हिम्मत, वायरल हैं Weightlifter Mummy -
कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम? जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए किया गया नॉमिनेट -
सुबह खाली पेट भीगी हुई किशमिश खाने से सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे, कब्ज से लेकर एनीमिया से मिलेगी राहत -
Rabindranath Tagore Jayanti 2026 Quotes: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती के मौके पर शेयर करें उनके ये अनमोल विचार -
Aaj Ka Rashifal 7 May 2026: आज धनु और कर्क राशि के लिए बड़ा दिन, पढ़ें सभी 12 राशियों का हाल -
Aaj Ka Rashifal 6 May 2026: मिथुन और कन्या राशि वालों की चमकेगी किस्मत, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान -
Mother's Day पर मां का मुंह कराएं मीठा, बिना ओवन और बिना अंडे के घर पर तैयार करें बेकरी जैसा मैंगो केक
लीवर में टॉक्सिन जमा होने से बढ़ता है मोटापा, जानिये लक्षण और रोकथाम
लीवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर से विषैले पदार्थों को मल-मूत्र के रूप में बाहर निकालता है। यह एक जरूरी प्रक्रिया है क्योंकि हमारा शरीर ऐसे विषाक्त पदार्थों से भरा है।
ज्यादा देर तक इन्हें शरीर में रखने पर लीवर धीमी गति से काम करने लगता है और विषाक्त पदार्थों को सही तरीके से बाहर निकालने में परेशानी होती है।
यह फैट सेल के रूप में पेट के आसपास जमा होने लगता है। लीवर में फैट की मात्रा अधिक होने पर फैटी लीवर बीमारी उत्पन्न हो जाती है। लीवर स्वाभाविक रूप से एक फैटी ऑर्गन है और लीवर में हर समय कुछ फैट जमा रहता है।


लीवर में जब फैट लीवर के वजन से पांच से दस प्रतिशत से अधिक हो जाता है तो फैटी लीवर बीमारी का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसके अलावा हमारा लीवर विषाक्त पदार्थों को शरीर से सही तरीके से नहीं निकाल पाता, कैलोरी कम नहीं कर पाता या सही तरीके से काम नहीं करता है।
जब यह सही तरीके से काम नहीं करता है तो लीवर फैट को मेटाबोलाइज करता है। पेट वसा को बाइल के माध्यम से चारों ओर भेजता है और फिर वापस ऑर्गन में आ जाता है। इस आर्टिकल में हम लीवर संबंधी बीमारियों के कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं।

वजन बढ़ना :
जैसा कि आप जानते हैं कि लीवर ही शरीर का एक ऐसा अंग है जो वसा को मेटाबोलाइज करता है। जब लीवर सही तरीके से काम नहीं करता है तो फैट जमा होने लगता है जिसकी वजह से वजन बढ़ता है।

एलर्जी :
एक हेल्दी लीवर एंटीबॉडी उत्पन्न करता है और यह एलर्जी को नष्ट करता है। जब लीवर सही तरीके से काम नहीं करता है तो शरीर एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों को जमा करने लगता है। शरीर हिस्टामिन उत्पन्न करता है जो एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों को नष्ट करता है। जब हिस्टामिन अधिक हो जाता है तो शरीर में खुजली और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

थकान :
विषाक्त पदार्थ मसल्स टिश्यू के मेटाबोलिज्म में बाधा उत्पन्न करता है जिसके कारण शरीर में दर्द और थकान होती है। अधिक समय तक थकान रहने पर चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और गुस्सा आता है। यह लीवर संबंधी बीमारियों का मुख्य लक्षण है। शरीर में अधिक विषाक्त पदार्थ होने का यह सबसे बड़ा लक्षण है।

अधिक पसीना आना :
जब लीवर को अधिक श्रम करना पड़ता है तो लीवर के कार्य में कमी होने लगती है और लीवर बड़ा हो जाता है। चूंकि लीवर सबसे बड़ा अंग है इसलिए यह शरीर के अन्य अंगों को ऊष्मा देता है और ज्यादा पसीना निकलने पर शरीर अपने आप ठंडा हो जाता है।

मुंहासे दूर नहीं होते हैं :
लीवर में विषाक्त पदार्थों के जमा होने से हार्मोन असंतुलित हो जाते है। जिसके कारण चेहरे पर मुंहासे निकलने लगते हैं। जब लीवर सुस्त पड़ जाता है तो त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। जब तक लीवर सही तरीके से काम नहीं करेगा तब तक इस समस्या से निजात पाने का कोई और तरीका नहीं है।

सांसों में बदबू :
मुंह पूरी तरह से साफ होने के बावजूद अगर आपकी सांसों में बदबू आती है तो आपके लीवर में समस्या है। यह लीवर संबंधी बीमारियों का मुख्य लक्षण है।

लीवर की बीमारी के इलाज की विधि :
फैटी लीवर बीमारी उचित आहार लेने से ठीक हो सकती है। डेंडिलियन रूट, केला, स्वीट पोटैटो, लीवर और जिंजर रूट फैटी लीवर बीमारी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।



Click it and Unblock the Notifications