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क्या आप जानते हैं, तिरुपति में बाल चढ़ाने के बाद क्या होता है उनका?
क्या आप जानते है,तिरुपति मंदिर में बाल मुंडवाने के बाद वहां लगने वाले बालों के ढे़र के साथ क्या होता है? आइए जानते है..
अगर आप तिरुपति मंदिर गए है तो वहां आपने महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को बालों को मुंडवाते हुए तो देखा ही होगा। ये तो आपको मालूम होगा ही कि मन्नत पूरी होने के चलते लोग ऐसा करते है? लेकिन क्या आप जानते है कि बाल मुंडवाने के बाद इन बालों के साथ क्या होता है? दरअसल जिन बालों को गंदगी का ढे़र या कचरा समझा जाता है वो बाल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिकने के लिए चले जाते है।
असल में इन्हीं बालों का बहुत बड़ा बाजार है। सुनकर हैरानी होगी लेकिन यह सच है। सौंदर्य और कॉस्मेटिक जगत में सुंदर बाल की चाह रखने वाले लोगों की वजह से हमारे बाल करोड़ो में बिकते है।
इन बालों के बाजार के लिए हर लेवल पर काम जारी है, झड़ते बालों से लेकर सैलून और मन्नत के लिए काटे जाने वाले ये बाल बालों का बिजनस करने वाले व्यापारियों के लिए बहुत बेशकिमती होते है। और दिनों दिन इस बिजनस में सूखे और कटे हुए बालों की डिमांड और कीमत की वजह से इन्हें ब्लेक गोल्ड भी कहा जाता है। आइए डालते है एक नजर 'ब्लेक गोल्ड' यानी कि बालों के करोड़ो के मार्केट पर।

मंदिर है आसान माध्यम
हमारे देश में मुंडन करवाना एक आम परम्परा है, लेकिन दक्षिण में तिरुपति और तिरुमाला जैसे मंदिरों में पुरुष, बच्चों सहित महिलाएं इच्छा पूरी होने पर सर मुंडवाती है और अपने बालों को भगवान के भेंट स्वरूप चढ़ाती है। फिर उन्हीं में से कुछ बालों को दूसरों के सिर में लगाकर व्यापारी लाखों रुपए तक कमाते हैं। बालों के बिजनस से जुड़े लोगों के लिए कटे हुए बाल इक्ट्ठे करने के लिए यह सबसे आसान माध्यम होता है। 2014-2015 में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने करीब 200 करोड़ रुपए में बालों की ब्रिकी की थी।
ऐसा अनुमान है कि ब्रिटेन अकेला ही हर साल करीब साढ़े चार करोड़ टन बालों का आयात करता है ताकि उसके गंजे नागरिकों के सिर पर बाल नजर आ सकें।

अफ्रीकन महिलाओं में है ज्यादा डिमांड
अफ्रीका में इन दिनों कृत्रिम मानव बाल का बिजनस काफी फल फूल रहा है। आलम यह है कि घने खूबसूरत बालों की चाह रखने वाली अफ्रीकन महिलाएं इसके लिए दो गुना पैसा खर्च करने तक के लिए तैयार है। एक स्टडीज में खुलासा हुआ है कि अफ्रीका में सूखे बालों का बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है। सालाना यहां औसतन 6 बिलियन डॉलर का बिजनस किया जाता है।

वर्जिन हेयर चाहिए
मन्नत के लिए कटे इन बालों को 'वर्जिन हेयर' कहा जाता है क्योंकि इनमें से ज्यादातर महिलाएं अपने बालों को खूबसूरत बनाने के लिए किसी तरह का शैंपू या कैमिकल नहीं लगातीं।
हालांकि यह बाल काले रंग के हैं लेकिन इन्हें फैक्ट्री में ले जाकर ब्लीच किया जाएगा और अंग्रेजों की की डिमांड के अनुसार इन्हें डिफरेंट शेड्स दिए जाते है। एक बार इन्हें कलेक्ट कर लिया जाए उसके बाद इन्हें ट्रकों और विमानों में लादकर फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। इनका ट्रांसपोर्टेशन काफी गुप्त रखा जाता है साथ ही फैक्ट्रियां भी इन बालों यानी ब्लैक गोल्ड को लेकर सतर्क होती हैं।

चीनी बालों कि हैं कम डिमांड
इन बालों का बाजार इतना बड़ा है कि इसके लिए कुछ दलाल भी सक्रिय रहते हैं और लोगों को अपने बाल देने के लिए रुपए देकर ललचाते हैं। मसलन कुछ दलाल एशिया और पूर्वी यूरोप की यात्रा पर जाते हैं और महिलाओं को उनके बालों के लिए नगद ऑफर करते हैं।
पूर्वी यूरोप के बालों की भी खूब मांग हैं क्योंकि यह नर्म और प्राकृतिक रूप से ब्रिटिश कलर के होते हैं। सायबेरिया और यूक्रेन में हर महीने बाल कटवाने का आयोजन किया जाता है। यहां इनकी कीमत काफी कम मिलती है। इसके अलावा दक्षिण अमेरिका के देशों खासतौर पर ब्राजील और पेरू के बालों को इनकी मोटाई के लिए खरीदा जाता है। इन सब में चीनी बालों की सबसे कम मांग होती है क्योंकि यह स्ट्रेट और काफी पतले होते हैं।

ये है प्रोसेसिंग
मंदिर में चढ़ाए गए बालों को प्रोसेसिंग के लिए कारखाने में ले जाया जाता है। प्रोसेसिंग के पहले चरण में इन्हें हाथों से सुलझाया जाता है। हाथों से लाखों टन बालों को सुलझाना काफी कष्टकारी होती है। कारखाने में कामगार पतली सूइयों की मदद से इन्हें सुलझाते हैं तब ये बाल प्रोसेसिंग के अगले चरण के लिए तैयार हो पाते हैं।
सुलझाए जाने के बाद इन बालों को लोहे के एक कंघे से झाड़कर साफ किया जाता है। इसके बाद इन बालों को उनकी लंबाई के अनुसार अलग-अलग बंडल में बांधा जाता है। उसके बाद बालों के बंडलों कीटाणुरहित बनाने के लिए तनु अम्ल के घोल में डुबोया जाता है। साफ किए गए बालों सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले बालों को ऑस्मोसिस बाथ कराया जाता है ताकि उनके क्यूटिकल्स नष्ट हुए बिना उन पर लगे दाग-धब्बे छूट जाएं। इन साफ और स्वस्थ बालों से महिलाओं और पुरुषों के लिए रंग-बिरंगे बिग बनाए जाते हैं और उन्हें उन देशों को निर्यात किया जाता है जहां इनकी काफी मांग होती है।
इनकी कीमत की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई बार इन्हें "काला सोना" भी कहा जाता है।

इन बातों से समझे इस बिजनस को
- बालों के बाजार में उम्र का भी खासा महत्व है। जैसे कि उदाहरण के तौर पर अगर कोई 24 साल का है तो उसके बाल सबसे बेहतर क्वालिटी के माने जाएंगे क्योंकि इनमें केरेटिन सबसे स्वस्थ्य होता है।
- बालों को लेकर इतनी मांग है कि इन्हें घर-घर जाकर ढूंढा जता है। मसलन एक महिला के दिनभर में औसत 50-100 बाल गिर जाते हैं और व्यापारी इन्हें भी जाया नहीं होने देते। एशिया, पूर्वी यूरो और दक्षिण अमेरिका में पेडलर्स घर-घर जाकर इन गिरे हुए बालों को कलेक्ट करते हैं। केवल एशिया में ही इस तरह के करीब 5 लाख लोग सक्रिय हैं।
- मध्यप्रदेश के बालों की क्वालिटी भी उतनी बेहतर नहीं है। ये रुखे और कमजोर होते हैं। बाजार में गुजरात के बालों की मांग सबसे अधिक है। वहां के बाल मजबूत और चमकदार होते हैं।
- तिरुपति मंदिर से ही महिलाओं के सबसे अधिक बाल आते हैं।
- बालों के व्यापार का सबसे बढिय़ा सीजन क्रिसमस के बाद शुरू होता है जो अप्रेल-मई तक चलता है। होली व शादियों के मौसम में कारोबार जमकर चलता है। बारिश में बालों का व्यवसाय बंद रहने के बाद एक बार फिर अक्टूबर यानी दिवाली के समय शुरू होता है।
- फैक्ट्री में इन बालों को हाथ से सुलझाया जाता है। एक व्यक्ति को केवल 150 ग्राम बालों को सुलझाने में एक दिन का वक्त लगता है और पैसा भी नहीं मिलता। यहां वैसे ही बालों को सुलझाया जाता है जैसे आप घर पर कंघी से सुलझाते हैं। इसके बाद इन्हें लंबाई के आधार पर अलग किया जाता है।
- अंग्रेजों के लिए सुनहरें बालों के लिए इन्हें ओस्मोसिस बाथ दी जाती है। इससे बालों का काला रंग निकल जाता है और वो गोरे हो जाते हैं। इसमें बालों की चमक बनी रहती है। इसके बाद यह बाजार में किलो के भाव से बजे जाते हैं। यहां से यह पैक कर वितरण के लिए तैयार किए जाते हैं। यहीं से असली पैसा कमाना शुरू होता है।
- बाजार से यह बाल जब सलून में पहुंचते हैं तो सलून वाले इनकी दूगनी कीमत लेते हैं। 100 पाउंड में खरीदे गए 50 एक्सटेंशन की यह सलून डबल कीमत लेते हैं।
- होली से पहले दो हजार रुपए तक भी भाव पहुंच जाता है, क्योंकि कलरफुल विग की डिमांड बढ़ जाती है।
- कंघी से झड़े बालों को ट्रांसप्लांट करना और इससे विग बनाना आसान होता है। इसीलिए इन बालों का कारोबार शुरू हुआ। इन झड़े बालों को साफ करके एक तरह के कैमिकल में रखा जाता है। फिर इसे सीधा कर उपयोग में लाया जाता है।
- जबलपुर शहर के सिहोरा, मंडला, डिंडोरी और शहडोल के आसपास के इलाकों में फेरी वाले कंघी से झड़े हुए बालों को खरीदते हैं। इसे वे स्थानीय स्तर पर ही बड़े व्यापारियों को बेचते हैं। ये व्यापारी फिर कोलकाता, चेन्नई और आंध्रप्रदेश में इन्हें बेच आते हैं।कोलकाता, चेन्नई, आंध्रप्रदेश विदेशी व्यापारियों का गढ़ माना जाता है। गुजरात के बालों की सप्लाई विदेशों में सबसे ज्यादा होती है। बाल व्यापार में सबसे ज्यादा सक्रिय बंगाल के मुस्लिम परिवार हैं।
- भारतीय बालों का बाजार पूरी दुनिया में फैला है। ये बाल यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और कनाडा तक जाते हैं। पुरुषों के बालों का इस्तेमाल विग, दाढ़ी और नकली मूंछे बनाने के लिए होता है।
- विदेशी ग्राहकों के असली बाल बेचने वालों के पास हर तरह की वैरायटी होती है। काले, लाल, सुनहरे, घुंघराले या सीधे बाल। 2015 में भारत ने 2000 करोड़ रुपए के बाल बेचे।

ऐसी रहती है डिमांड

डबल हो जाती है किमत
अंग्रेजों के लिए सुनहरें बालों के लिए इन्हें ओस्मोसिस बाथ दी जाती है। इससे बालों का काला रंग निकल जाता है और वो गोरे हो जाते हैं। इसमें बालों की चमक बनी रहती है। इसके बाद यह बाजार में किलो के भाव से बजे जाते हैं। यहां से यह पैक कर वितरण के लिए तैयार किए जाते हैं। यहीं से असली पैसा कमाना शुरू होता है।
बाजार से यह बाल जब सलून में पहुंचते हैं तो सलून वाले इनकी दूगनी कीमत लेते हैं। 100 पाउंड में खरीदे गए 50 एक्सटेंशन की यह सलून डबल कीमत लेते हैं।
होली से पहले दो हजार रुपए तक भी भाव पहुंच जाता है, क्योंकि कलरफुल विग की डिमांड बढ़ जाती है।




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