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कोरोना से रिकवर होने वाले बच्चों में दिखा मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम, जानें कब है चिंता की बात
कोरोना महामारी के बीच बच्चों में कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद मिल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के मामले सामने आ रहे हैं। इस संक्रमण के मामले महाराष्ट्र में सामने आए है। 2 से 12 साल की बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस उम्र के 6 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाल रोग विशेषज्ञ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ संजीव जोशी ने बताया है कि जिन परिवारों में कोरोना संक्रमण फैला है उनमें कोविड एंटीबॉडी का निर्माण हो सकता है,जिससे एमआईएस-सी हो सकता है। ऐसे में माता-पिता जो हाल ही में कोविड से ठीक हुए हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों में लक्षणों पर शुरुआत से ही नजर रखें।

क्या है मिल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम
मिल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम ( एमआईएससी) में शरीर में जहरीले तत्व उत्पन्न होने लगते हैं। ये पूरे शरीर में फैल जाते है, इसका असर शरीर के अंगों पर पड़ता है। इससे शरीर के कई अंग काम करने बंद कर देते है जिसकी वजह से बच्चों की जान चली जाती है। यह बीमारी कोरोना वायरस से जुझ रहे बच्चों या फिर कोविड 19 से ठीक हुए बच्चों को हो सकती है। इस बीमारी में बच्चों को बुखार रहता है, नसों और मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इस बीमारी में अंग काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में इलाज के दौरान बच्चों की मौत भी हो सकती है।

मिल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम लक्षण
इस बीमारी में तेज बुखार आता है। पेट में दर्द, लाल आंखे, लाल चकते, हाथ पैरों में सूजन, कमजोरी, उल्टी, डायरिया, ब्लड प्रेशन बढ़ना इस सिंड्रोम के लक्षण है। बच्चों में इन लक्षण को देखते ही इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

मिल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम 15 साल के कम उम्र के बच्चों में होता है
सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों की उम्र 15 साल से कम है। वहीं जिन बच्चों की उम्र पांच साल से कम हैं, उन्हें हृदय संबंधी परेशानी कम होती है। 10 साल अधिक उम्र के बच्चों में ये सिंड्रोम घातक साबित हो सकता है। 10 साल के बच्चों में बीपी और हृदय की मांसपेशी में सूजन जैसे तकलीफ देखने को मिली है।



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