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जानें, गर्भपात के आघात से कैसे उभरें
गर्भपात एक दर्दनाक प्रक्रिया है जिससे होकर कई महिलाओं को गुजरना पड़ता है। अगर किसी महिला को हाल ही में गर्भपात हुआ है तो वो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने में काफी समय ले लेती है।
गर्भपात एक दर्दनाक प्रक्रिया है जिससे होकर कई महिलाओं को गुजरना पड़ता है। अगर किसी महिला को हाल ही में गर्भपात हुआ है तो वो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने में काफी समय ले लेती है।
कई बार गर्भपात, मां के लाइफस्टाइल अच्छे न होने की वजह से भी हो जाता है। अगर कोई 35 वर्ष से कम आयु की महिला गर्भवती होती है तो उसे गर्भपात के चांसेंस मात्र 10 से 15 प्रतिशत होते हैं जबकि उम्र बढ़ने पर ये बढ़ जाते हैं।

प्रथम तीन महीनों में गर्भपात होने का चांस बहुत ज्यादा रहता है। इसीलिए कई महिलाएं अपनी गर्भावस्था को छुपाती हैं। ऐसे में अगर किसी महिला का गर्भपात हो जाता है तो उसे शारीरिक और मानसिक रूप से आघात पहुँचता है। और उन्हें इससे उभरने में काफी समय लग जाता है।
शरीर सही होना: गर्भपात होने पर शरीर दुर्बल हो जाता है। गर्भावस्था के लक्षण धीमे-धीमे कम होने लगते हैं। एक या दो हफ्ते में ब्लीडिंग भी रूक जाती है। साथ ही कमजोरी बहुत ज्यादा महसूस होती है जिसे सही होने में महीने भर का समय लग जाता है।

इस अवधि में महिला को यौन संक्रमण आदि होने का खतरा भी रहता है। इसलिए, उसे इस दौरान यौन सम्बंध आदि बनाने से बचना चाहिए।

ब्लीडिंग से कपड़े खराब होने से बचने के लिए पैड का इस्तेमाल करना चाहिए न कि टैम्पून का। साथ ही अगर तबियत बहुत ज्यादा बिगड़े तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए: महिला को शरीर के अलावा, मन पर भी गहरा असर होता है। उसे बच्चे के साथ जो लगाव हो जाता है वो उससे उभर नहीं पाती है। ऐसे में परिवार को सहारा देना अति आवश्यक होता है।
कई महिलाएं इसके लिए खुद को भी जिम्मेदार मानने लगती है और दुख में रहती हैं। ऐसे में उनके पार्टनर को कोशिश करनी चाहिए कि वो खुश रहें और अकेली न रहें। उन्हें दोस्तों या परिवार के साथ ही अगले कुछ दिनों के लिए छोड़ दें।



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