Latest Updates
-
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
डायबिटिक को रोजा रखते हुए इन चीजों का खास रखना चाहिए ध्यान
हालांकि डॉक्टर डायबिटीज के मरीजों को लंबे समय भूखा-प्यासा ना रहने की सलाह देते हैं।
रमजान का महीना जारी है। जाहिर हैं रोजा रखने वाले लोगों को पूरे दिन भूखा-प्यासा रहना होता है। वैसे रोजा रखना एक निजी फैसला है लेकिन डायबिटीज के मरीज भी रोजा रख लेते हैं। हालांकि डॉक्टर डायबिटीज के मरीजों को लंबे समय भूखा-प्यासा ना रहने की सलाह देते हैं।
उपवास से मेटाबोलिज्म प्रभावित हो सकता है। इसलिए इन दिनों खासकर डायबिटीज के मरीजों को डायट प्लान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि रोजा रखने वालों को 12 से 15 घंटे भूखा-प्यासा रहना पड़ता है। इससे डायबिटीज के मरीजों को समस्या हो सकती है, जबकि उन्हें नियमित और समय पर खाने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर रोज रखने वाले टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की तुलना में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अधिक खतरा होता है।
चूंकि इस बार रमजान गर्मियों में है जिस वजह समय दिन का समय काफी लंबा होता है। डायबिटीज के मरीजों को रोजा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और ब्लड ग्लूकोज लेवल की जांच कराते रहना चाहिए।

टाइप 1 में होता है ज्यादा खतरा
टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित और रिकरंट हाइपोग्लाइसीमिया से पीड़ित लोगों को उपवास की दौरान ज्यादा परेशानी होती है। टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया और हाइपरग्लाइसीमिया भी हो सकते हैं, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज़ वाले लोगों की तुलना में इन्हें कम खतरा होता है।

हाइपोग्लाइसीमिया का रहता है खतरा
उपवास के दौरान ब्लड प्रेशर में गिरावट (हाइपोग्लाइसीमिया) का खतरा होता है जिससे आपको बेचैनी और बेहोशी हो सकती है। जबकि ब्लड प्रेशर के अधिक बढ़ने (हाइपरग्लाइसीमिया) का खतरा होता है जिसमें धुंधला दिखना, सिरदर्द, थकान और प्यास लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको इस तरह की कोई परेशानी होती है, तो आपको रोजा नहीं रखना चाहिए।

डायबिटीज के मरीज इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच कराएं।
- ज्यादा खाने बचें। अपनी भूख के अनुसार ही खाएं।
- अपना रोजा शुगर फ्री से ही खोलें और कैफीन वाली चीजें खाने से बचें।
- सीमित मात्रा में मिठाई खाएं।
- अपने खाने में बहुत सारे फल, सब्जियां, दाल और दही शामिल करें।
- खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतराल रखें।
- तली हुई चीजें खाने से बचें।



Click it and Unblock the Notifications
