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गेंदे के तेल से होने वाले स्वास्थ्य लाभ
भारत में मेरीगोल्ड को गेंदे के नाम से जाना जाता है। केलैन्ड्यूला लेटिन शब्द “केलेंडे” से निकला है जिसका अर्थ है “छोटा कैलेण्डर”, क्योंकि यह फूल अधिकाँश महीने के प्रारंभ में खिलता है। प्राचीन इजिप्ट में यह फूल न केवल वर्जिन मेरी को सम्मान स्वरुप चढ़ाया जाता था बल्कि इसे इसके तरोताज़ा करने वाले गुण के कारण भी जाना जाता था।
केलैन्ड्यूला ऑइल या मेरीगोल्ड ऑइल में प्रदाहनाशी गुण पाए जाते हैं। इसका उपयोग मांसपेशियों में तनाव के कारण आई हुई सूजन या घाव की सूजन को दूर करने के लिए किया जाता है।

यह चोट के कारण आई हुई सूजन को दूर करने में भी सहायक है। केलैन्ड्यूला ऑइल त्वचा की समस्याओं जैसे सोरेसिस, डर्मटाईटिस और एक्जिमा से भी राहत दिलाता है। इन समस्याओं के कारण होने वाली त्वचा की जलन से भी राहत दिलाता है। इसके प्रदाहनाशी गुण के कारण इस तेल का उपयोग शीतदंश, स्पाईडर वेंस, पैर के अल्सर और वेरिकोस वेन्स के उपचार में भी किया जाता है।
केलैन्ड्यूला ऑइल में एंटी-सेप्टिक और एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं अत: इसका उपयोग छोटे कट्स, घाव, कीड़े के काटने, बेड सोर और मुंहासों के उपचार में भी किया जाता है। इसमें एंटी फंगल गुण भी होता है जो रिंगवर्म, दाद और एथलीट फुट के उपचार में भी सहायक होता है। केलैन्ड्यूला ऑइल दाग धब्बों के उपचार में भी सहायक होता है।
यह कोलेजन के स्तर को बढ़ाता है तथा धब्बे बनाने वाले उतकों को बनने से रोकता है। यह संवेदनशील त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। इसका उपयोग शुष्क त्वचा के लिए मॉस्चराइज़र की तरह या गंभीर रूप से फटी हुई त्वचा के उपचार में किया जा सकता है। यह डाइपर रैश के उपचार में भी सहायक होता है।

पारंपरिक रूप से इसका उपयोग कब्ज़, पेट दर्द और पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियों के इलाज में किया जाता है। यह लिवर तथा गॉल ब्लेडर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए भी किया जाता है।
हालाँकि केलैन्ड्यूला ऑइल के कुछ दुष्परिणाम भी होते हैं। अत: इसका उपयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए। गर्भवती तथा स्तनपान करवाने वाली माताओं को मौखिक रूप से इसका उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।

कुछ लोगों को केलैन्ड्यूला ऑइल से एलर्जी हो सकती है। अत: इसका उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट कर लेना चाहिए। सर्जरी के दौरान या इसके बाद अन्य दवाओं के साथ केलैन्ड्यूला ऑइल का सेवन करने पर उनींदेपन की समस्या हो सकती है। अत: सर्जरी से 15 दिन पहले इसका उपयोग करना बंद कर देना चाहिए। केलैन्ड्यूला ऑइल घर पर आसानी से बनाया जा सकता है:

गेंदें के कुछ सूखे फूल लें तथा उसे एक सूखे और साफ़ कांच के जार (मर्तबान) में रखें। इस जार में ऑलिव ऑइल डालें। ध्यान रहे कि कम से कम एक इंच की जगह छोड़ें ताकि फूलों को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। अच्छे से मिलाएं तथा जार का ढक्कन लगा दें। इस जार को गर्म स्थान पर रख दें तथा दिन में एक बार इसे हिलायें। चार से छह सप्ताह बाद तेल को मलमल के कपड़े से छान लें तथा इसे ठंडे और अँधेरे स्थान पर रखें।
इस तेल का उपयोग एक साल तक किया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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