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अचानक से आ जाए किसी को पैनिक अटैक ऐसे करें मदद, जाने लक्षण
पैनिक अटैक आने से व्यक्ति बहुत ज्यादा डर जाता है। यह एक प्रकार का एंग्जायटी डिसऑर्डर होता है लेकिन इसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा घबरा जाता है। पैनिक अटैक आने के पीछे दिमाग में होने वाली असमानता, एल्कोहल आदि का सेवन करना, बहुत ज्यादा तनाव में होना और जेनेटिक आदि कई कारण हो सकते हैं। किसी अन्य व्यक्ति या आपके किसी दोस्त को अचानक पैनिक अटैक आने पर आपको उनकी मदद करनी पड़ सकती है। ऐसे में आपका यह जानना जरुरी होता है कि पैनिक अटैक आने पर व्यक्ति की मदद कैसे की जाती है। आइए जानते हैं कि किसी अन्य व्यक्ति को पैनिक अटैक आने पर उसकी मदद कैसे कर सकते हैं
पैनिक अटैक के लक्षण शरीर की अन्य समस्याओं के कारण भी उत्पन्न हो जाते हैं। हृदय रोग, अस्थमा, श्वास समस्या, हार्मोन में गड़बड़ी, किसी संक्रामक रोग या खून में किसी तरह की रासायनिक गड़बड़ी होने पर भी पैनिक अटैक के लक्षण हो सकते हैं। कुछ दवाओं का विपरीत असर भी ऐसी स्थिति उत्पन्न कर देता है।

क्या होता है पैनिक अटैक?
पैनिक अटैक अचानक से किसी बात का डर हावी होने, लंबे समय तक तनाव या अधिक असहज होने की स्थिति में आता है। पैनिक अटैक किसी भी रुप में सामने आ सकता है। ये कभी एंग्जाइटी डिसॉर्डर, पैनिक डिसॉर्डर, सामाजिक भय या फोबिया के रूप में सामने आता है। इस दौरान ब्लड सर्कुलेशन में तेजी या कमी आ जाती है। इसके अलावा सिहरन और शरीर कांपने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

पैनिक अटैक के लक्षण
- सांस लेने में तकलीफ होना।
- हृदय और छाती में दर्द होना।
- काफी तेजी से दिल धड़कना,
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- हाथ-पैरों में सूनापन
- सांसों का फूलना।
- पेट में दर्द होना या बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।

पैनिक अटैक को न समझे हार्ट अटैक
पैनिक अटैक में इंसान का हाल हार्ट अटैक के जैसा ही हो जाता है लेकिन इसमें दर्द नहीं होता। न सीने में और न ही शरीर के किसी और अंग में। चूंकि दोनों में एड्रेनेलिन हॉर्मोन का स्राव होता है इसलिए कई बार हार्ट अटैक और पैनिक अटैक में पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। - पैनिक अटैक अक्सर तभी होता है, जब आप किसी तरह की मानसिक या शारीरिक तनाव में हो या लम्बे समय से आपको कोई भय सता रहा हो। जांच और इलाज के बाद पता चलता है कि यह अचानक पैदा हुई समस्या है, जिसमें सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन बढ़ जाना और सीने में दर्द जैसी समस्या भी होती है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करें वरना परिणाम कुछ और भी हो सकते हैं।

वॉर्निंग सिग्नल
वैसे तो पैनिक अटैक होने की कोई खास वजह नहीं होती लेकिन हां, ये एंग्जाइटी से जुड़ा होता है। डायबीटीज, ब्लड प्रेशर, दिल के मरीज और अस्थमा के मरीजों के लिए इस तरह का अटैक ‘वॉर्निंग सिग्नल' हो सकता है। कोई भी परिस्थिति हो मरीज को हमेशा शांत रहने की जरुरत होती है।

शांत रहें
दूसरे व्यक्ति को संभालने के लिए आपका शांत रहना जरुरी होता है। शांत रह कर अपने दोस्त को संभालें ताकि उन्हें लगे की सब ठीक है।

उन्हें सकारात्मक बनाएं रखें
किसी डर के हावी होने या कुछ अनहोनी का अंदेशा होने पर पैनिक अटैक आता है। जो आसानी से शांत नहीं होता है। ज्यादा नेगेटिव सोचने से स्थिति और भी बुरी बन सकती है। इसलिए सकारात्मक रहें और मरीज को भी सकरात्मक बनाएं रखें।

उनके आस-पास रहें
जब किसी व्यक्ति को पैनिक अटैक आता है तो वह बेहद घबरा जाता है। ऐसे में जरुरी है कि आप उन्हें अकेला न छोड़े। पैनिक अटैक 20-30 मिनट में शांत हो जाता है इसलिए उनके साथ रहें और उन्हें सांत्वना देते रहे और उन्हें समझाते रहें।



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