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क्या कच्चे अंडे खाना भी फायदेमंद होता है? जानिये अंडे खाने का सही तरीका
अंडों को लेकर भी लोगों में काफी मतभेद हैं कुछ लोगों का मानना है कि कच्चे अंडे नहीं खाने चाहिए वहीँ कुछ लोग कहते हैं कि कच्चे अंडे भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
अंडों में इतने अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं कि पूरी दुनिया में नाश्ते के लिए इसे सर्वोत्तम डिश माना जाता है। छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक हर किसी को रोजाना अंडे खाने चाहिए।
हालांकि अंडों को लेकर भी लोगों में काफी मतभेद हैं कुछ लोगों का मानना है कि कच्चे अंडे नहीं खाने चाहिए वहीँ कुछ लोग कहते हैं कि कच्चे अंडे भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
आपको बता दें कि उबले अंडों की ही तरह कच्चे अंडों में भी प्रोटीन और हेल्दी फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन, मिनरल और आंखों के लिए फायदेमंद एंटी ऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
एक बड़े साइज़ के कच्चे अंडें का वजन लगभग 50 ग्राम होता है और इसमें विटामिन ए, विटामिन बी-2, विटामिन बी-5, विटामिन बी-12, सेलेनियम फॉस्फोरस, फोलेट और प्रोटीन पाया जाता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि कच्चे अंडे तो बहुत ज्यादा फायदेमंद है तो रुकिए, आपको बता दें कि इससे कई खतरे भी हैं। इस आर्टिकल में हम आपको कच्चे अंडें से होने वाले नुकसान के बारे में बता रहे हैं।

1. प्रोटीन के अवशोषण में रुकावट :
अंडें प्रोटीन के मुख्य स्रोत माने जाते हैं लेकिन जब आप कच्चे अंडें खाते हैं तो ये शरीर द्वारा प्रोटीन को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर देते हैं। जब आप उबले हुए अंडे खाते हैं तो 90% प्रोटीन शरीर द्वारा अवशोषित हो जाता है लेकिन कच्चे अंडें खाने पर सिर्फ 50% ही प्रोटीन अवशोषित हो पाता है। इसके अलावा उबले अंडों द्वारा प्राप्त प्रोटीन आसानी से पच भी जाता है।

2. बायोटिन के अवशोषित होने में रुकावट :
बायोटिन वाटर सोल्यूबल बी विटामिन होता है जिसे हम विटामिन बी-7 के नाम से जानते हैं। यह विटामिन शरीर को ग्लूकोज और फैटी एसिड बनाने में मदद करता है। जब आप कच्चे अंडे खाते हैं तो यह विटामिन ठीक से अवशोषित नहीं हो पाता है जिस वजह से ग्लूकोज और फैटी एसिड बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है।

3. बैक्टीरिया से संक्रमित :
कच्चे और अधपके अंडों में साल्मोनेला नामक हानिकारक बैक्टीरिया पाया जाता है। यह सिर्फ अंडें की बाहरी परत पर ही नहीं बल्कि अंडों के अंदर भी पाया जाता है। अगर आप ऐसे अंडे खाते हैं तो आप फ़ूड पाजनिंग के शिकार हो सकते हैं।
आइये जानते हैं कि साल्मोनेला बैक्टीरिया कैसे अलग अलग उम्र के लोगों को प्रभावित करता है।

a. छोटे और यंग बच्चे :
कम उम्र के बच्चों को यह बैक्टीरिया बहुत जल्दी प्रभावित करता है और इम्युनिटी सिस्टम को खराब कर देता है।

b. गर्भवती महिलायें :
इस बैक्टीरिया के कारण गर्भवती महिलाओं के युटेरस में क्रैम्प होने लगते हैं और कुछ मामलों में इसके कारण प्री-मैच्योर बर्थ जैसी समस्या भी हो जाती है।

c. व्यस्क लोग :
65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए यह बैक्टीरिया बहुत ज्यादा हानिकारक है और इससे फ़ूड पाजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।

d. इम्यून सिस्टम :
जिन लोगों की इम्युनिटी सिस्टम पहले से ही कमजोर है वो अगर इस बैक्टीरिया की चपेट में आते हैं तो उनकी हालत बिगड़ सकती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को कच्चे अंडे कभी नहीं खाना चाहिए। इसलिए कच्चे अंडों का कम सेवन करें और खरीदते समय इन बातों का ज़रूर ध्यान रखें।

पहला बिंदू-
हमेशा अंडों को सुपर मार्किट से खरीदें और उनकी एक्सपायरी डेट ज़रूर चेक कर लें।

दूसरा बिंदू-
उन्हीं अंडों को खरीदें जिन्हें फ्रिज में स्टोर करके रखा गया हो।

तीसरा बिंदू-
इन अंडो को घर लाकर भी तुरंत फ्रिज में रख दें क्योंकि अगर आप इन्हें सामान्य तापमान पर

चौथा बिंदू-
रखेंगे तो इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है।

पांचवा बिंदू -
कभी भी टूटे हुए या दिखने में गंदे अंडों को ना खरीदें।



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