Latest Updates
-
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव
अचानक से शरीर में क्यों जम जाते है नील के निशान, कहीं ये खतरनाक बीमारी का संकेत तो नहीं!
आपने कई बार नोटिस किया होगा कि आपके शरीर में कई जगह अचानक से नील के निशान जम जाते है, जहां कोई चोट न लगी हो? कई बार तो नील के निशान महीनों तक जमे रहते हैं और सबसे जरूरी सवाल, क्या आपके शरीर में हर वक्त नील के निशान पड़े रहते हैं? वैसे तो ये नील के निशान चोट लगने की वजह से नजर आते है।
अगर बिना चोट लगे शरीर में नील जमने के निशान दिखाए देने लगे तो ये चिंता करने की बात है। आइए जानते है बारे में शरीर में कब और कैसे नील के निशान जमते है और क्या ये इसके पीछे वजह।

क्यों पड़ते हैं नील के निशान?
त्वचा पर चोट लगने के बाद रक्त धमनियों को नुकसान पहुंचने से नील जम जाती है। इस तरह की चोट से खून रिसता है और आसपास की कोशिकाओं में फैल जाता है, जिससे कि नील जैसा निशान पड़ जाता है। चोट लगने पर ये शरीर की एक तरह की प्रतिक्रिया होती है। मेडिकल टर्म में इस स्थिति को कन्टूशन (contusion) या भीतरी चोट कहा जाता है। आइए जानते है शरीर में बिना चोट और बेवजह नील जमने के कारण!

बुढ़ापा आना
अक्सर आपने अपने घर में बड़े-बूढ़े लोगों के शरीर में नील जमने की स्थिति को देखा होगा। बुजुर्ग लोगों के हाथों के पीछे नील पड़ना एक सामान्य बात है। शरीर में दिखने वाले ये नील के निशान लाल रंग से शुरू होकर, पर्पल, और गहरे रंग के होते हुए फिर हल्के होकर गायब हो जाते हैं। इस प्रकार के निशान इसलिए पड़ते हैं क्योंकि रक्त धमनियां इतने साल सूरज की रोशनी का सामना करते हुए कमजोर हो जाती हैं।

ज्यादा एक्सरसाइज
शरीर में नील जमने का एक कारण ये अधिक एक्सरसाइज करना भी है। जो लोग जरुरत से ज्यादा एक्सरसाइज करते है जैसे वजन उठाना कई बार खुद को चोटिल भी कर देते है। जिसकी वजह से नील के निशान शरीर में उभरकर आ जाते हैं। एक्सरसाइज करने के लिए शरीर में जरुरत से ज्यादा मांसपेशियों पर जोर लगाना पड़ता है। जिसकी वजह से छोटी-छोटी रक्तवाहिनियों के पास नील के निशान जम जाते हैं।

विटामिन और मिनरल्स की कमी
कुछ विटामिन और मिनरल ब्लड क्लॉटिंग और जख्मों को भरने में खास भूमिका निभाते हैं। इनकी कमी होने से नील के निशान पड़े दिखाई दे सकते हैं।
• विटामिन K - ये खून को जमने में मदद करता है इस विटामिन की कमी से सामान्य रक्त जमने की प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ता है।
• विटामिन C - कोलोजन और अन्य घटक जो त्वचा और रक्त धमनियों में अंदरूनी चोट लगने से बचाव करते हैं। इसलिए विटामिन सी की कमी से नील के निशान पड़ सकते हैं और चोट ठीक होने में अधिक समय भी लग सकता है।
• मिनरल - ज़िंक और आयरन जैसे मिनरल्स चोट को सही करने के लिए आवश्यक मिनरल होते हैं। आयरन की कमी से एनीमिया भी हो जाता है जिसे नील पड़ने का एक बड़ा कारण भी माना जाता है।

वॉन विलीब्रांड डिजीज
वॉन विलीब्रांड डिजीज एक ऐसी अवस्था है, जिसके होने पर शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव होने लगता है। वॉन विलीब्रांड नामक प्रोटीन के स्तर में रक्त की कमी के कारण यह बीमारी होती है। ऐसे में चोट लगने के बाद बहुत अधिक खून बहने लगता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को छोटी सी चोट के बाद भी अक्सर शरीर में बड़े-बड़े नील के निशान दिखाई देने लगते हैं।

कैंसर और कीमोथेरेपी
अगर आपकी कीमोथेरेपी हो रही है और उसकी वजह से आपका ब्लड प्लेटलेट्स 400,000 से नीचे आ गया है, तो आपके शरीर में बार-बार इस तरह के नील के निशान दिख सकते हैं।

थ्रोंबोफिलिआ
ब्लीडिंग डिसऑर्डर जैसे कि थ्रोंबोटिक थ्रोंबोसाइटोपेनिया पर्प्यूरा (टीटीपी) या आईडियोपेथिक थ्रोंबोसाइटोपेनिक पर्प्यूरा (आईटीपी) जिनमें कि प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, इनके कारण भी शरीर की ब्लड क्लॉट की क्षमता कम हो जाती है, जिससे कि नील के निशान पड़ते हैं।

एहलर्स-डेन्लस सिंड्रोम
कई बार शरीर में नील आनुवांशिक कारणों के वजह से भी जम जाती है। इसका एक कारण कोलोजन विकार र्भी हो सकता है। इसकी एक वजह कोशिकाओंऔर रक्तधमनियां का कमजोर होना और आसानी से टूट जाना भी होता हैं। जिसके वजह से शरीर में कई जगह अत्यधिक निशान पड़ना, घाव देर से भरना, इंटरनल ब्लीडिंग या वक्त से पहले मृत्यू, भ्रूण को नुकसान आदि हैं।

दवाइयां और सप्लीमेंट
कुछ दवाइयों और सप्लीमेंट के इस्तेमाल के कारण भी शरीर पर नील के निशान पड़ने लगते हैं। वार्फेरिन और एस्पिरिन जैसे खून को पतला करने वाली कुछ दवाइयों के कारण खून जमने से रुक जाता है। इसके अलावा प्राकृतिक सप्लीमेंट जैसे जिन्को बिलोबा, मछली का तेल और लहसुन का अधिक इस्तेमाल भी खून को पतला कर देता है। जिससे कारण शरीर पर नील के निशान पड़ने लगते है।



Click it and Unblock the Notifications