चबाने और चूसने की आवाज से होने लगती है चिढ़न, जानिए कौनसी बीमारी है आपको

क्‍या आपके साथ भी ऐसा कुछ होता है कि आपके पास बैठे किसी शख्‍स के चबा-चबाकर खाने की आवाज की वजह से आपको गुस्‍सा आने लगता है या आप एकदम से विचल‍ित हो जाते है तो आप मिसोफोनिया नाम की बीमारी से ग्रस्‍त है। जी हां, ये एक तरह का मानसिक विकार होता है जो इंसानों को किसी अप्रिय लगने वाली आवाजों की वजह से होता है। भारतीयों में यह स्थिति बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है। देश में प्रतिवर्ष करीब 10 लाख से भी कम मामले सामने आते है।

लेकिन सामान्‍यता समस्‍या से हर कोई ग्रस्‍त है लेकिन लोगों में इसके पैमाने अलग-अलग तरह से नापे जाते हैं, आइए जानते है इस बीमारी के बारे में।

क्‍या होती है मिसोफोनिया

क्‍या होती है मिसोफोनिया

कान में आवाजों का गूंजना मिसोफोनिया कहलाता है। इसको समान्य भाषा में - कान का बजना कहते हैं जिसमें कानों में अचानक घंटी बजने लगती है या कानों में सनसनी सी उत्‍पन्‍न हो जाती है। ये आवाजें आपके आसपास सामान्‍य आवाजों में से एक होती है जिससे आपको एकदम से चिढ़न होने लगती है जैसे डकार लेने की आवाज, चबा-चबाकर खाने की आवाज, दांतों की पीसने की आवाज। ये आवाजें काफी परेशान करने वाली होती हैं। इस रोग से ग्रसित व्‍यक्ति इन ध्‍वनियों से विचल‍ित हो जाता है।

क्‍या ये एक मानसिक विकार है?

क्‍या ये एक मानसिक विकार है?

मिसोफोनिया एक तंत्रिका मनोविकार है, जो ध्वनि के कारण गुस्से और घबराहट के वजह से एक असमान प्रतिक्रिया के रूप में सामने आता है। जब इससे ग्रसित व्‍यक्ति अपने आसपास मौजूद अप्रिय ध्‍वनि को सुनता है तो इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। जिस तरह ओसीडी (ऑब्‍सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) एक तरह की मानसिक है, जिसमें इंसान एक तरह का काम बार-बार दोहराता है और उन्‍हें गंदगी देखते ही गुस्‍सा आने लगता है। उसी तरह मिसोफोनिया भी एक तरह का विकार है, जिसमें व्‍यक्ति चबाने या चूसने जैसी अप्रिय आवाजों को सहन नहीं कर पाता है और असामान्‍य व्‍यवहार करता है।

इसके लक्षण

इसके लक्षण

जिन लोगों को मिसोफोनिया होता है वो च्विंग, स्मैकिंग, स्लरपिंग, स्नीफिंग, स्नीजिंग, गल्पिंग, बर्पिंग, ब्रीथिंग, स्नोरिंग, खांसना, सीटी बजाना, चाटना, आदि आवाजों के संपर्क में आने से गुस्से में आ जाते हैं और चिल्लाने लगते हैं और उन्‍हें चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। इसके अलावा ऐसे लोगों को अचानक पसीना आने लगता है और दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं।

 लाइफ स्‍टाइल में करे थोड़ा बदलाव

लाइफ स्‍टाइल में करे थोड़ा बदलाव

मिसोफोनिया समेत अन्य न्यूरो-मनोवैज्ञानिक विकार, गलत लाइफस्‍टाइल शैली के वजह से सामने आती है। सोने के समय में सुधार, तनाव के स्तर में कमी, रोजाना एक्सरसाइज और हेल्‍दी डाइट से मिसोफोनिया से प्रभावित व्यक्ति की स्थिति में सुधार ला सकती है।

ये है इस बीमारी का इलाज

ये है इस बीमारी का इलाज

मिसोफोनिया का इलाज कॉग्निटिव (संज्ञानात्मक) बिहेवियरल थेरेपी और टिन्नीटस (कान में घंटी की आवाज या गूंज) ट्रेनिंग से किया जाता है। बहुत कम ऐसी स्थिति होती है जब इस विकार को दवाईयों के माध्‍यम से दूर किया जाता है।

ऐसे मानसिक विकारों के इलाज के दौरान मस्तिष्‍क को इस तरह तैयार किया जाता है कि वो किसी भी ध्‍वनि पर उग्र प्रतिक्रिया न दें। इसके अलावा जिन आवाजों से आपको समस्‍याएं होती है उनके प्रभाव को खत्‍म करने के ल‍िए नॉइजबॉक्स की मदद से बैकग्राउंड में न्यूट्रल आवाज निकालना इलाज किया जाता है।

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