जिसे आप मामूली बवासीर समझ रहे हैं, कहीं वो कोलन कैंसर का संकेत तो नहीं! जानें कैसे मालूम करें

बवासीर आम है और आमतौर पर ये गंभीर नहीं मानी जाती है। इनका अक्सर घरेलू उपचार से इलाज कर ल‍िया जाता है, और कई बार तो इसके ल‍िए डॉक्टर के पास जाने की भी आवश्यकता नहीं होती है।

लेकिन बवासीर के कुछ लक्षण, विशेष रूप से मलाशय से रक्तस्राव, अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं, ये बात गंभीर स्थिति के रुप में सामने आ सकते है, जैसे कोलन कैंसर। विशेषज्ञों की मानें तो अगर 40 वर्ष की आयु के बाद मलाशय से रक्‍तस्‍त्राव की समस्‍या होती है तो ऐसे में इसे हल्‍के में न लें, डॉक्‍टर को जरुर दिखाएं।

बवासीर के लक्षणों में सबसे आम लक्षण ये है क‍ि आप टॉयलेट सीट पर खून के छींटे देख सकते है, इसके अलावा शौच के बाद रक्‍त देखना। अन्य सामान्य लक्षणों में मलाशय में दर्द, दबाव, जलन और खुजली जैसे समस्‍या होती हैं। इसके अलावा मलाशय में गांठ होने की दिक्‍कत भी हो सकती है।

बवासीर के लिए ये सभी लक्षण सामान्य हैं और 75 प्रतिशत लोगों को कभी न कभी बवासीर की समस्‍या हो सकती है। तो फिर, आप कैसे और कब जानेंगे क‍ि ये कुछ और ही गंभीर समस्‍या हैं?

कैसे करें डायग्‍नोसिस?

कैसे करें डायग्‍नोसिस?

जब लक्षण एक से अधिक बीमारियों के कारण होते हैं, तो डॉक्टर इसे डिफरेंशियल डायग्नोसिस कहते हैं। यहां बवासीर के लक्षणों के पांच अलग-अलग कारण हैं जिनके बारे में आपको जानना आवश्यक है:

कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर

कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर

ये कैंसर मलाशय के आस-पास हो सकता हैं और रक्तस्राव और असुविधा का कारण बन सकता हैं। जो बवासीर के लक्षणों के समान है। वैसे 40 साल की उम्र से पहले रेक्टल और कोलन कैंसर दुर्लभ हैं। कोलन कैंसर के लक्षणों में लगातार रक्तस्राव, मल त्याग की आदतों या मल त्याग के आकार में बदलाव, पेट के निचले हिस्से में दर्द और अप्रत्याशित वजन घटना शामिल हो सकते हैं।

 इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज

यह स्थिति, अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रॉन की बीमारी शामिल होती है। जिसकी वज‍ह से रेक्‍टल ब्‍लीडिंग और असुविधा हो सकती है। दोनों प्रकार के आईबीडी दीर्घकालिक रोग हैं जो आमतौर पर युवा वयस्कों में देखने को मिलती है। लक्षणों में ऐंठन, दस्त, वजन घटना और बुखार शामिल होते हैं।

एनल फिशर

एनल फिशर

एनल फिशर छोटे-छोटे आंसू होते हैं, जैसे पेपर कट, एनल कैनाल में जो बवासीर की तरह काम कर सकते हैं।" एनल फिशर की वजह से दर्द, जलन और रक्तस्राव हो सकता है। वे किसी भी उम्र में हो सकते हैं और आमतौर पर ये कब्ज के कारण होते हैं। एनल फिशर को बवासीर की तरह घरेलू उपचारों से आसानी से ठीक क‍िया जा सकता है।

जेनिटल वार्ट्स

जेनिटल वार्ट्स

जेनिटल वार्ट्स, कई यौन संक्रमित बीमारियों (एसटीडी) में से एक है जो एनल एरिया में बढ़ सकता है। इसी वजह से भी रक्तस्राव और असुविधा हो सकती है। जेनिटल वार्ट्स मानव पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होते हैं, और इनका इलाज करना जरुरी होता है। बिना इलाज के कारण ये बढ़ते रहेंगे जिसकी वजह से रेक्टल कैंसर होने की संभावना भी बढ़ जाती है। "क्लैमाइडिया और गोनोरिया सहित अन्य एसटीडी, एनल एरिया में भी हो सकते हैं और इसकी वजह से जलन और रक्तस्राव जैसी समस्‍याएं आम है।

इन लक्षणो पर डॉक्‍टर को जरुर दिखाएं

इन लक्षणो पर डॉक्‍टर को जरुर दिखाएं

आपको पहली बार मलाशय से रक्तस्राव हुआ है।

आपको मलाशय से भारी रक्तस्राव होता है।

आपको मलाशय से खून बह रहा है जो घरेलू ट्रीटमेंट से भी सही नहीं हो रहा है।

आपको बवासीर के अन्य लक्षण हैं, जैसे दर्द, दबाव, खुजली और जलन की समस्‍या है।

आपको बवासीर के लक्षणों के साथ-साथ बुखार, वजन घटना, पेट में दर्द या आंत्र की आदतों में बदलाव जैसे अन्य लक्षण भी हैं।

"बवासीर आम हैं, लेकिन बवासीर की समस्‍या के लक्षणों को हल्‍कें में न लें। ज्‍यादा गंभीर लक्षण होने पर आपको गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट या कोलन और रेक्टल सर्जन के पास जानें की सलाह दी जा सकती है।

Story first published: Thursday, September 16, 2021, 15:58 [IST]
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