क्‍या आपकी छठी इंद्री काम करती हैं, इन संकेतो से जाने

क्‍या आपको अचानक से आपके आसपास कभी-कभी किसी अनहोनी की आशंका होने लगती है? या आप अचानक से किसी जगह से इसल‍िए उठकर चले जाते हो क्‍योंकि आपको लगता है कि वो जगह आपके अनुकूल नहीं है? हम सब में छठी इंद्रिय मौजूद होती है जिसे सिक्‍स्‍थ सेंस भी कहा जाता है। लेकिन हम सब में से बहुत कम लोगो की छठी इंद्रिय काम करती है। सिक्‍सथ सेंस दृष्टि, सूंघने की शक्ति, स्वाद, सुनने की शक्ति और स्पर्श के अलावा हमें पूर्वाभास कराने का क्षमता रखता है।

Know your sixth sense

सिक्‍स्‍थ सेंस का जाग्रत होना व्यक्ति के आध्यात्मिक होने की निशानी है लेकिन हर व्यक्ति को अपने इन गुणों का पता नहीं होता। आप अक्‍सर ऐसे लोगों से जरुर मिले होंगे जो आपको कुछ बुरा होने के खतरों के बारे में संकेत दे देते है और उनकी कही बात सच जरुर होती है। जो इस बात की तरफ इशारा करती है उनकी सिक्‍स्‍थ सेंस यानी छठी इन्द्रिय जागृत हो चुकी है। शास्त्रों में छठी इंद्रिय को देव मानव से जोड़कर जाता है और अध्यात्म में इसे 'दूरदर्शी दृष्टि' होना कहता है। तो आइए जानते है कैसे मालूम चलता है कि किसी व्यक्ति की छठी इंद्रिय जाग्रत हो चुकी हैं?

कभी भी जाग्रत हो सकता है

कभी भी जाग्रत हो सकता है

सिक्स सेंस जाग्रत होने की भी एक प्रक्रिया होती है। बहुत कम मामलों में यह जन्‍म के साथ पाया जाता है। अधिकांश मामलों में किसी खास उम्र में जाकर जाग्रत किया जा सकता है। इसके जाग्रत होने की कोई उम्र सीमा भी नहीं होती, अलग-अलग मनुष्यों में यह अलग-अलग होता है। लेकिन इतना अवश्य है कि इसकी जागृत होने की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती।

अचानक से संवेदनशील हो जाना

अचानक से संवेदनशील हो जाना

अगर कोई मिलनसार और सक्रिय व्‍यक्ति अचानक से उसे भीड़-भाड़ वाली जगहों पर घुटन महसूस होने लगती है। यह इस प्रक्रिया की पहली अवस्था और लक्षण है जहां आप खुद को सामाजिक रिश्तों से दूर करने लगते हैं और एकांत की तलाश शुरु कर देते हो।

सर्तकता बढ़ जाती है

सर्तकता बढ़ जाती है

जैसे जैसे छठी इन्द्रिय जागृत होने लगती है। उस व्‍यक्ति का आईक्‍यू लेवल और सर्तक होने की क्षमता भी विकसित होने लगती है। इस वजह से उसमें दूसरों के मन के विचारों और भावनाओं को पढ़ने और समझने की क्षमता विकसित होने लगती है। ऐसे में आप यह भी सोचने लगते हैं कि सामने वाला भी आपके विचार पढ़ सकता है और यह सोच-सोचकर आप विचलित होने लगे हैं।

विचल‍ित सा महसूस होना

विचल‍ित सा महसूस होना

छठी इन्द्रिय को प्राप्त करने की प्रक्रिया में मस्तिष्क अपनी चेतना को निचले स्तर से ऊपरी स्तर पर ले जा रहा होता है। यह एक धीमी प्रक्रिया होती है जो आपमें निष्क्रियता पैदा करता है। इस समय आप अकेला रहना पसंद करते हैं और खुद दूसरे काम में मन नहीं लगा पाते हैं। इस समय आपकी एकाग्रता में भी कमी आती है।

अवसाद में रहना

अवसाद में रहना

छठी इन्द्रिय‍ विकसित होने के कारण मस्तिष्‍क की चेतना पुरानी ऊर्जा को मुक्त कर देती है। जैसे-जैसे ये आपके मस्तिष्‍क से मुक्‍त होने लगती है। वैसे-वैसे आप पुरानी परिस्थितियों को याद कर निराश और हताश महसूस होने लगते हैं। बस धैर्य के साथ अपने शरीर से उन ऊर्जाओं को मुक्त होने दें और इस अवस्था के गुजरने का इंतजार करें।

बार-बार नींद खुलना

बार-बार नींद खुलना

इस अवस्था में आपको अजीब विद्युत तरंगें, सौर एवं चंद्र लहरें, ब्रह्मांडीय तरंगें और गांगेय केंद्र से उत्पन्न ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। दरअसल क्रिस्टल मानव शरीर अविश्वनीय रूप से संवेदनशील होते हैं जिसके कारण ऐसा अनुभव होता है

मौत का पूर्वाभास

मौत का पूर्वाभास

कुछ इंसान, खासतौर से जो लोग बुजुर्ग है आपने देखा होगा कि अपनी मुत्‍यु के बारे में पहले से भविष्‍यवाणी कर देते हैं। जिन लोगों का सिक्‍स्‍थ सेंस काम करता है वो लोग अपनी मुत्‍यु के 10-15 दिन पहले ही अपनी मुत्‍यु का पूर्वाभास कर लेते है और वो लोग दूसरों को जीवन और मुत्‍यु से जुड़े ज्ञान बांटने में लग जाते हैं।

दैवीय-आत्‍मीय शक्ति का महसूस होना

दैवीय-आत्‍मीय शक्ति का महसूस होना

कई लोग अक्‍सर दैवीय शक्तियों के बारे में बताते है और अपने जिंदगी से जुड़े इन अनुभवों के बारे में बताते है। अक्‍सर जिन लोगों की छठी इन्द्रिय काम करती है उन्‍हें दैवीय शक्तियों का अहसास होता है। वो अपने आसपास मौजूद सकरात्‍मक और नकरात्‍मक दोनों तरह की शक्तियां महसूस करने की क्षमता रखते है।

आंखों की दृष्टि जाने के बाद भी

आंखों की दृष्टि जाने के बाद भी

जिन लोगों की सिक्‍स्‍थ सेंस जागृत हो चुकी है वो लोग अपने आसपास के माहौल में हर छोटे से छोटे परिर्वतन को महसूस कर लेते हैं। अगर किसी व्‍यक्ति की आंखों की रोशनी चली जाती है तो अक्‍सर आपने देखा होगा कि वो बिना रोशनी के भी अपना काम आसानी से कर लेते हैं। वजह ये होती कि उनका सिक्‍स्‍थ सेंस काम करने लगता है आंखों की रोशनी जाने पर अंधेरा सिर्फ आंखों के आगे छाया होता है। लेकिन आपका सिक्‍स सेंस आपके आसपास का नक्‍शा तैयार करके आपके मस्तिष्‍क में चित्रण करने लगता है जिसकी वजह से आप अपने आसपास की हर चीज को महसूस करने लगते हैं।

समान दिखने वाले रंगों में भी अंतर कर पाना

समान दिखने वाले रंगों में भी अंतर कर पाना

जी हां, आपने नोटिस किया होगा कि हम में से कई लोग बेबी पिंक और मर्जेंटा पिंक में अंतर नहीं कर पाते हैं? हालांकि कई लोगों के साथ ये समान समस्‍या होती है। लेकिन जिन लोगों का सिक्‍स्‍थ सेंस काम करता है। वो एक जैसे दिखने वाले समान रंग जो कि समान नहीं होते हैं उनमें भी आसानी से फर्क पहचान कर लेते हैं। यहां तक वो दो रंगों से मिलकर बनने वाले कलर को भी आसानी से पहचान लेते हैं।

Story first published: Saturday, November 10, 2018, 9:45 [IST]
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