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जानें महात्मा गांधी के वो भाषण जिसने आजादी की जंग को दिया नया मोड़

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हर साल 2 अक्टूबर का दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस साल देश महात्मा गांधी की 151वीं जयंती मनाने जा रहा है। इस मौके पर स्कूल, कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मगर इस बार देश और दुनिया में फैले कोरोना वायरस महामारी के चलते इन कार्यक्रमों में काफी बदलाव किये जाएंगे।

महात्मा गांधी के मानने वाले देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मौजूद हैं। गांधी ने भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने और उन्हें हिंदुस्तान को छोड़ने पर मजबूर करने के लिए कई आंदोलन किए। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा गांधी बनने के सफर से सभी वाकिफ हैं। आज इस लेख में महात्मा गांधी के उन चुनिंदा भाषणों के बारे में जानते हैं जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बना।

महात्मा गांधी का बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिया भाषण (4 फरवरी 1916):

महात्मा गांधी का बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिया भाषण (4 फरवरी 1916):

"अगर हमें स्वराज्य प्राप्त करना है, तो हमें इस प्यार करने वाली स्वतंत्रता को (ब्रिटिश साम्राज्य) अपनाना होगा और जो लोग खुद स्वतंत्रता में भाग नहीं लेना चाहते हैं, यह उन लोगों का आजादी दिलाने वाला समुदाय नहीं होगा।"

महात्मा गांधी ने इस भाषण के जरिये पहली बार बनारस में देश के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के संकेत दिए थे। अंग्रेज हुकूमत से भारत को आजाद कराने की आग को भड़काने वाला यह पहला भाषण था।

महात्मा गांधी का दांडी मार्च भाषण (11 मार्च 1930):

महात्मा गांधी का दांडी मार्च भाषण (11 मार्च 1930):

"हमने विशेष रूप से एक अहिंसात्मक संघर्ष की खोज में, अपने सभी संसाधनों का उपयोग करने का संकल्प किया है। क्रोध में कोई भी गलत निर्णय न लें।"

यह भाषण ऐतिहासिक दांडी नमक मार्च की पूर्व संध्या पर दिया गया था।

इस अवसर पर महात्मा गांधी ने भारतीयों से विदेशी शराब और कपड़े, करों का विरोध करने और (ब्रिटिश) अदालतों व सरकारी कार्यालयों से दूरी बनाकर रहने को कहा।

महात्मा गांधी का गोलमेज सम्मेलन भाषण (30 नवंबर 1931):

महात्मा गांधी का गोलमेज सम्मेलन भाषण (30 नवंबर 1931):

"मैं यह कहने की हिम्मत करता हूं कि भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच यह संघर्ष ब्रिटिश आगमन की एकजुटता का कारण है और तुरंत इस संबंध को ग्रेट ब्रिटेन और भारत के बीच दुर्भाग्यपूर्ण, कृत्रिम व अप्राकृतिक संबंधों से प्राकृतिक संबंधो में परिणत कर दिया जाता है। अगर ऐसा होता है, तो स्वैच्छिक साझेदारी को छोड़ दिया जाए, अगर दोनों में से एक भी पार्टी भंग हो जाती है, तो आपको प्रतीत होगा कि हिन्दू, मुसलमान, सिख, यूरोपीय, एंग्लो इंडियन, ईसाई, अछूत, सभी एक साथ एकजुटता से रहते हैं।"

महात्मा गांधी ने अपने पहले गोलमेज सम्मेलन में यही भाषण दिया था। गांधी ने साहसिक रूप से अंग्रेजों को स्पष्ट चुनौती दी और भारत की एकता और धर्मनिरपेक्ष भावना का प्रदर्शन किया।

महात्मा गांधी का ‘भारत छोड़ो‘ भाषण (8 अगस्त 1942):

महात्मा गांधी का ‘भारत छोड़ो‘ भाषण (8 अगस्त 1942):

"मेरा मानना है कि दुनियाभर के इतिहास में, स्वतंत्रता के लिए हमारे वास्तविकता से ज्यादा यथार्थवादी लोकतांत्रिक संघर्ष नहीं रहा है।

महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को स्वेच्छा से भारत छोड़ने के लिए काफी प्रयास किए।

महात्मा गांधी का अंतिम भाषण (12 जनवरी 1948):

महात्मा गांधी का अंतिम भाषण (12 जनवरी 1948):

"मेरी यह अभिलाषा है कि सभी हिंदू, सिख और मुसलमान अपने दिल में भाईचारे की भावना बनाएं। वह उसके बाद हमेशा तक जीवित रहे। आज यह अस्तित्वहीन हैं। यह एक ऐसा राज्य है जहां कोई भारतीय देशभक्त नाम के योग्य नहीं है, जो समता के साथ विचार कर सकता हो।"

भारत आजाद तो हो गया लेकिन इसके साथ ही देश को भारी कीमत भी चुकानी पड़ी थी। आजादी की जंग के दौरान एक एकता का जन्म हुआ था, मगर दर्दनाक और हिंसक विभाजन ने सांप्रदायिक एकता को खंडित कर दिया था।

गांधी एक बार फिर देश की जनता के बीच एकता का वो सूत्र पिरोना चाहते थे।

English summary

Gandhi jayanti 2020: Mahatma Gandhi Famous Speeches in Hindi

Gandhi Jayanti Special: Here are some famous speeches of Mahatma Gandhi in Hindi.