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जानिए योग से जुड़े 5 मिथक और उनका सच
एक तरफ योग को पूरी दुनिया में स्वीकार कर इसके जरिए निरोग के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ योग से जुड़ी कुछ भ्रांतियां हैं जिन्हें लोग सच मानते हैं।
योग ने पिछले दशक में बेहद लोकप्रियता हासिल की है। वैज्ञानिक रूप से इससे विभिन्न तरीकों से शरीर को मदद मिलती है। योग ना केवल आपके पूरे शरीर को सुंदर बनाता है, बल्कि आपके शरीर और मन पर गहरा प्रभाव भी छोड़ता है।
एक तरफ योग को पूरी दुनिया में स्वीकार कर इसके जरिए निरोग के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ योग से जुड़ी कुछ भ्रांतियां हैं जिन्हें लोग सच मानते हैं। योग एक्सपर्ट संधगुरु आपको इन मिथकों का सच बता रहे हैं।

1) योग कुछ और नहीं बस असंभव आसन है
लोग समझते हैं कि योग में केवल कुछ आसन ही करने होते हैं, जिन्हें करने से फिट रह सकते हैं। योग एक तकनीक है जिसके अभ्यास के दौरान हर आसन के लिए सांसों की गति के नियंत्रण का खास तरीका होता है, जिसमें चूक होने पर बड़ा नुकसान हो सकता है। योग केवल शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी व्यक्ति का विकास करती है। इसके लिए अभ्यास और एकाग्रता दोनों आवश्यक है।
2) योग एक एक्सरसाइज है
बेशक योग एक बेहतर वर्कआउट है लेकिन संधगुरु की मानें, तो अगर आप एक बेहतर वर्कआउट करना चाहते हैं, तो इससे बेहतर आपके लिए कुछ नहीं है। योग सिर्फ आपके शरीर को स्वस्थ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपको धीरे-धीरे दिव्य, आध्यात्मिक अनुभव की ओर ले जाता है। सद्गुरु का कहना है कि आपका शरीर ईश्वरीय ज्ञान को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक पोत के रूप में काम कर सकता है, और योग आपको उस अद्भुत अनुभव की ओर ले जाता है।

3) संगीत के साथ कर सकते हैं योग
योग करने के लिए एकाग्रता की आवश्यकता होगी। योग में सांसों का अभ्यास किया जाता है। एक्सपर्ट्स सांसों के उतार-चढ़ाव को महसूस करने और उस पर ही कंसंट्रेट करने को कहते हैं। संगीत चलाने से एकाग्रता भंग होती है। इसलिए योग करते समय संगीत नहीं सुनना चाहिए। योग केंद्रों और स्टूडियोज में आजकल संगीत के साथ योग करवाया जाता है, इस वजह से लोगों को लगता है कि संगीत के साथ योग कर सकते हैं। यह गलत है।
4) किताब से सीख सकते हैं योग
आजकल दुकानों में योग सिखाने का दावा करने वाली कई किताबें मिल जाती हैं। लेकिन इनसे योग सीखना खतरनाक हो सकता है, योग सीखने के लिए एक ट्रेनर या गुरु का होना जरूरी है जो आसन को करने की सही विधि बता सके। किताबें योग सीखने की प्रेरणा दे सकती हैं, योग सिखा नहीं सकती। किताबों यह जरूर लिखा होता है कि योग का आसन कैसे लगाएं लेकिन आसन लगाने के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में किताबों में नहीं या बहुत कम लिखा होता है।

5) योग एक रूटीन को फॉलो करता है
संधगुरु के अनुसार, योग आपके पूरे जीवन का एक हिस्सा बन जाता है, और यह सिर्फ दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। बहुत से लोग सोचते हैं कि योग के अभ्यास के लिए दिन के दौरान थोड़ी देर का समय पर्याप्त होता है, लेकिन योग की कला उस दो घंटों से भी ज्यादा है। सही ढंग से अभ्यास करने पर योग आपके अंदर और बाहर पूरी भावना को बदल सकता है और आपको नए दृष्टिकोणों से प्रेरित करता है
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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