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अगर आप भी बर्थ कंट्रोल पिल्स खाती है तो पहले इसे जरुर पढ़ ले..
लेकिन ये बात सच है कि इस दवा के नियमित सेवन के बहुत सारे साइड इफेक्ट होते हैं जिसमें वजन का बढ़ना आम होता है।
जब कभी महिलाएं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बारे में सोचती है तो सबसे पहले उनके दिमाग में एक ही चिंता सताती है कि गर्भनिरोधक गोलियों के कारण उनका वजन बढ़ सकता है। लेकिन एक रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि यह एक गलत धारणा है। कुछ शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि गर्भनिरोधक गोलियां स्वास्थ्य के लिहाज से बिलकुल भी फायदेमंद नहीं हैं। इसलिए इन्हें लेने से पहले डॉक्टर को इस बात की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
कई महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से बचती हैं ताकि वे मोटी ना हो जाएं, लेकिन ये बात सच है कि इस दवा के नियमित सेवन के बहुत सारे साइड इफेक्ट होते हैं जिसमें वजन का बढ़ना आम होता है।

हार्मोनल लेवल पर निर्भर करता है
असल में बर्थ कंट्रोल पिल का असर महिला के हार्मोनल लेवल पर निर्भर करता है। क्योंकि हर इंसान का हार्मोन लेवल अलग होता है कहने का मतलब है कि जिस तरह आपके बहन या दोस्त का एस्ट्रोजेन लेवल अलग होता है उसी तरह बहन या दोस्त के ऊपर बर्थ कंट्रोल पिल का असर भी कम होता है। यानि बर्थ कंट्रोल पिल के कारण आपका कितना वज़न बढ़ेगा या नहीं बढ़ेगा वह आपके शरीर पर निर्भर करता है।

बर्थ कंट्रोल पिल का चुनाव करने से पहले सावधानी बरतें
बर्थ कंट्रोल लेने से वजन पर कुछ असर पड़ेगा कि नहीं उस दवा में कौन-सा हार्मोन है उस पर निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर से पूछकर आप बर्थ कंट्रोल पिल्स चुने। अगर मूल सामग्री में एस्ट्रोजेन है तो इसका मतलब है आपके शरीर में जल की मात्रा बढ़ेगी क्योंकि एस्ट्रोजेन के कारण फ्लूइड का उत्पादन बढ़ता है। जब चक्र के अंत में दवा खाना जब बंद करते हैं तब आप खुद को कुछ हल्का महसूस करते होंगे। यदि आप शरीर में पानी का वजन बढ़ने नहीं देना चाहते हैं तो बर्थ कंट्रोल पिल लेने के पहले ड्रोसपोरीनोन यानि प्रोजेस्टेरॉन कंपोनेन्ट ले क्योंकि इससे शरीर में जल की मात्रा नहीं बढ़ती है।

60 के दशक में हुई थी शुरुआत
दरअसल गर्भनिरोधक गोलियों की शुरुआत 60 के दशक में हुई। पहली जेनरेशन की गोलियों से महिलाओं में कई तरह के साइड इफेक्ट देखे गए थे। इन्हीं को सुधारने के लिए धीरे धीरे इनमें बदलाव किए गए और दूसरी, तीसरी और चौथी जेनरेशन की गोलियां बनाई गई। इन दिनों बाजार में 'थर्ड' और 'फोर्थ' जेनरेशन की गोलियां भी उपलब्ध हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

डॉक्टर से परामर्श जरुर लें
तीसरी और चौथी पीढ़ी की गर्भनिरोधक दवाईयां अमेरिका और यूरोप में ज्यादा बिक रही हैं। हालांकि भारत में अब भी दूसरी पीढ़ी की दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है। जब भी कोई महिला गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करती है तो उससे पहले उसे चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए। क्योंकि चिकित्सक इसके प्रति महिला को सही दिशा-निर्देश देते हुए गर्भनिरोधक के सही इस्तेमाल का तरीका बता सकते हैं, यह महिला के स्वास्थ्य के लिहाज से उचित है और इसके जरिए इसके दुष्प्रभाव को भी रोका जा सकता है।



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