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सावन में मेहंदी की जगह हाथ और पैरों में लगाएं आलता, देखें लेटेस्ट डिजाइन
सावन के इस पवित्र महीने मेहंदी लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। कई बार काम की वजह से महिलाओं के पास मेहंदी लगाने का टाइम नहीं होता है। अगर आपके पास भी मेहंदी लगाने का टाइम नहीं है तो आप हाथ पैरों में आलता का इस्तेमाल कर सकते है। आलता भी मेहंदी की तरह शुभ होता है। आलता भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है। बिहार और बंगाल में आलता सुहागन महिलाओं के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

आलता लगाने में ज्यादा समय नहीं लगता है। बता दे कि भगवान कृष्ण मां राधा के पैरों में खुद आलता लगाते थे। भारत में पहले महिलाएं हाथ पैरों में आलता लगाती थी। लेकिन बाद मुस्लिम शासकों के आने के बाद भारत में मेहंदी यानी हिना का चलन शुरु हो गया है। आज के समय में मेहंदी भारत में ट्रेंड बन गया है। मेहंदी के साथ साथ आलता का क्रेज आज भी महिलाओं में देखने को मिलता है। सावन में सोलह श्रृंगार करने के लिए आप पैरों में आलता लगा सकती हैं। चलिए देखते हैं आलता के लेटेस्ट डिजाइन।

सिंपल डिजाइन
आलता लगाने के सबसे बड़ा फायदा है कि आलता को सुखाने में ज्यादा समय नहीं लगता है। आलता लगाने के बाद रंग की भी चिंता करने की जरुरत नहीं होती है। बॉलीवुड फिल्मों से भी आलता काफी पॉपुलर हुआ है। फिल्मों में आलता के नए नए डिजाइन दिखाए गए थे।

खूबसूरत आलता डिजाइन
आलता का इस्तेमाल काफी सालों के किया जा रहा है। वहीं आलता में कई मॉर्डन डिजाइन भी लगाएं। सावन के महीने में मेहंदी लगाने की बजाए आप आलता का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आलता आउटलाइन डिजाइन
आप ब्रश की मदद से आलता से बारीक डिजाइन बना सकते हैं। आलता से आप एरेबिक, बेल डिजाइन बना सकते हैं। आलता के साथ आप व्हाइट कलर का आलता का इस्तेमाल कर डिजाइन में चार चांद लगा सकते हैं।

ट्रेंडी डिजाइन
सावन के महीने में आप सिंपल डिजाइन में आलता लगा सकते हैं। ब्रश की मदद से आप हाथ पैरो में आलता लगा सकते है। आलता का इस्तेमाल बंगाल, उड़ीसा और बिहार जैसे राज्यों में किया जाता है। आलता को सुहाग की निशानी माना जाता है। आलता को पान के पत्ते या फिर लाक से बनाया जाता है जो कि तनाव को कम करता है।



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