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'ग्राइप वाटर', बच्चों से लेकर बड़ों तक को पहुंचाए आराम!
ग्राइप वाटर, ऐसी दवा है जिसे बरसों से बिना पर्ची के भरोसे से बच्चों को दिया जा रहा है। बहुत सी जड़ी बुटियों से मिलकर बने इस वाटर से बच्चों सहित बड़ों को भी पेट दर्द, गैस और बेचैनी में राहत मिलती है। हालांकि ग्राइप वाटर, स्वाद में थोड़ा कड़वा होता है, इसी वजह से बैलेंस बनाने के लिए इसमें थोड़ा सादा पानी मिलाकर लिया जाता है। आइए जानते हैं, इस ग्राइप वाटर के फायदे, इसमें मिलाई जाने वाली औषधियों के बारें में और साथ ही इस पर की गई कुछ शोध के निष्कर्ष भी।

पेट दर्द में राहत
बच्चों का पाचन तंत्र बहुत ही संवेदनशील होता है, इसी वजह से पेट दर्द में बहुत जल्दी परेशान हो जाते हैं। ठीक इसी तरह बड़ों को भी पेट दर्द की तकलीफ होती है। ऐसे में ग्राइप वाटर बच्चों संग बड़ों को भी पेट दर्द में फायदा पहुंचाता है।

पांचन तंत्र पर नजर
बहुत सी जड़ी बुटियों के मिश्रण वाले ग्राइप वाटर की मदद से ना सिर्फ पेट दर्द ठीक होता है बल्कि इससे पेट संबंधी लगभग सभी तकलीफों से राहत मिलती है जैसे कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर उसे सुचारू रूप से चलने में मदद करना।

गैस व दर्द से छुटकारा
ग्राइप वाटर बच्चों के पेट को बहुत आराम पहुंचाता है, ठीक इसी तरह यह बड़ों को पेट में बनने वाली गैस से भी निजात देता है।

क्यों है सेहतमंद?
चूंकि ग्राइप वाटर बहुत सी जड़ी बुटियों से मिलकर बना होता है, इसलिए बच्चों को तो यह पेट दर्द से छुटकारा देता है साथ ही बड़ों के लिए भी दवा की तरह काम करता है। ग्राइप वाटर में लौंग, दालचीनी, इलायची और पीपरमेंट जैसी बहुत से तत्व मिलाए जाते हैं। आप चाहें तो इस ग्राइप वाटर को घर में भी बना सकते हैं, लेकिन इसकी सभी साम्रगी की मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों के बारे में थोड़ा विस्तार से।

ग्राइप वाटर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
सोडियम बाइकार्बोनेट: एसिडिटी कम करने वाला सोडियम बाइकार्बोनेट के साइड इफेक्ट्स बहुत ही कम है इसलिए इसे बहुत सी चीजों में इस्तेमाल किया जाता है।सौंफ: फाइबर, आयरन और विटामिन्स से भरी सौंफ में एंटीऑक्सीडेंट्स गुण भी होते हैं।
अदरक: बहुत से औषधियों गुणों वाली अदरक से जी घबराना और मॉर्निंग सिकनेस में बहुत हद तक राहत मिलती है।
कैमोमाइल ऑयल: शरीर को सुकून पहुंचाने वाले इस एसेंशियल ऑयल से नींद बड़ी अच्छी आती है। साथ ही यह बॉडी को रिलैक्स कर ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करता है। इसी वजह से माहवारी में होने वाले दर्द में भी राहत मिलती है।

क्या कहता है शोध
दुनिया भर में मां अपने बच्चे को पूरे विश्वास के साथ ग्राइप वाटर देती है। लेकिन अभी भी पूर्ण तौर पर पेट दर्द और गैस जैसी समस्या के लिए इस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है क्योंकि करीब 350 बच्चों पर हुए शोध में यह खुलासा हुआ है कि पेट दर्द, गैस इत्यादि जैसी समस्याओं में ग्राइप वाटर के मुकाबले स्तनपान करने वाले बच्चों को कम तकलीफ हुई।

सही डोज है जरूरी
जिस तरह डॉक्टर की बताई दवा की सही डोज लेनी होती है, ठीक उसी तरह ग्राइप वाटर की भी सही डोज लेना बहुत जरूरी होता है। पेट खराब होने, हिचकी आने या फिर दांतों में खुजली होने पर भी दिन में इसे 3-4 बार से ज्यादा ना लें। साथ ही ग्राइप वाटर की डोज आपकी लंबाई और वजन के मुताबिक भी तय की जाती है।



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