Latest Updates
-
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व
मानसिक विकारों से बचाता है वक्त पर खाना, सोना
(आईएएनएस)| हमारा शरीर एक एसी मशीन है, जो बेहद संतुलित ढंग से काम करती है। समय पर भोजन तथा समय पर सोने से न केवल जीवन बेहतर होता है, बल्कि यह मानसिक विकार को भी दूर रखता है। सरकाडियन रिद्म्स (शरीर के अंदर मौजूद जैविक घड़ी) 24 घंटे के चक्र का पालन करती है और हार्मोन तथा स्वभाव सहित शरीर की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करती है।
मोंट्रियल के डगलस मेंटल हेल्थ यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट तथा मैकगिल यूनिवर्सिटी की काई-फ्लोरियन स्टॉर्च ने कहा, "इस बात के भी सबूत हैं कि रोजाना की गतिविधियां शरीर में 24 घंटे के अलावा, चार घंटे के एक चक्र से प्रभावित होती हैं, जिसे अल्ट्रेडियन रिद्म्स कहते हैं।"

चार घंटे का अल्ट्रेडियन रिद्म्स मस्तिष्क में मौजूद एक मुख्य रसायन 'डोपामिन' से प्रेरित होता है। शरीर में जब डोपामिन का स्तर अनियंत्रित हो जाता है, तो चार घंटे का रिद्म्स 48 घंटे तक खिंच सकता है।
अनुवांशिक रूप से संशोधित चूहों पर किए गए अध्ययन में स्टॉर्च के दल ने इस बात का खुलासा किया कि नींद आने में दिक्कत, अल्ट्रेडियन रिद्म्स जेनरेटर में असंतुलन का परिणाम है, जबकि यह पहले सर्काडियन रिद्म्स में गड़बड़ी का परिणाम माना जाता था।
यह अध्ययन पत्रिका 'ईलाइफ' में प्रकाशित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
