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सुभाष चंद्र बोस जयंती: हर भारतीय को जानने चाहिए नेताजी के ये प्रेरक विचार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और कांग्रेस के प्रभावशाली नेता थे। इसके साथ ही वह अहम स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जिन्होंने न केवल भारत में बल्कि भारत से बाहर रहकर भी देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी अंतिम सांसों तक लड़ाई लड़ी। उनकी मृत्यु का रहस्य आज भी भले ही अनसुलझा रह गया हो, लेकिन उनके जीवन भर के अथक प्रयास जो उन्होंने हिंदुस्तान को स्वतंत्र कराने के लिए किए वो आज भी हमारे लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को कटक में हुआ था, जो तब के बंगाल प्रांत का ही हिस्सा था। उन्होंने 16 साल की आयु में ही विवेकानंद और रामकृष्ण के कार्यों को पढ़ लिया था और उनके विचारों से प्रभावित भी हो चुके थे। प्रेसीडेंसी कॉलेज से निकाले जाने के बाद स्कॉटिश कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त करके वे यूरोप जाकर सिविल सेवा में योगदान देने लगे, लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद वे सिविल सेवा को त्यागकर भारत आ गए। 1921 से 1932 के समय अंतराल में वे कांग्रेस के भीतर एक मुख्य कार्यकर्त्ता और नेता के रूप में उभरे। लेकिन 1939 में उन्होंने अलग होकर फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने अब से हर वर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही वर्षभर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन होगा। बोस की जयंती पर राष्ट्रवादी और प्रेरणादायी नारों के जरिए जानते हैं उनके विचार।

1.
केवल बातचीत से दुनिया में कोई वास्तविक बदलाव नहीं हो सका है।
-सुभाष चंद्र बोस

2.
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।
-सुभाष चंद्र बोस

3.
जब आज़ाद हिंद फौज खड़ी होती हैं तो वो ग्रेनाइट की दीवार की तरह होती हैं; जब आज़ाद हिंद फौज मार्च करती है तो स्टीमर की तरह होती हैं।
-सुभाष चंद्र बोस

4.
अगर संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़े, तब जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है।
-सुभाष चंद्र बोस

5.
यह हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता के लिए अपने खून पसीने का भुगतान करें। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से प्राप्त किये हुए आज़ादी के लिए, अंदर से उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।
-सुभाष चंद्र बोस

6.
हो सकता है एक विचार के लिए किसी एक की मृत्यु हो जाये, परन्तु उसके विचार उसकी मृत्यु के पश्चात अपने आप हजारों लोगों के जीवन में अवतार ले लेगा।
-सुभाष चंद्र बोस

7.
हमारे अंदर इच्छाशक्ति होनी चाहिए, मरने की भी इच्छाशक्ति, ताकि हमारा भारत ज़िंदा रह सके।
-सुभाष चंद्र बोस

8.
आज़ादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है।
-सुभाष चंद्र बोस



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