Latest Updates
-
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना
सावधान टीबी की दवा बना सकती है पागल

चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन में बतौर प्रोफेसर कार्य कर रहे प्रो. कुशवाहा का कहना है कि सिर्फ पागलपन ही नहीं आर्थराइटिस, त्वचा रोग, नेत्र सम्बंधी समस्याएं, बहरापन, प्रकाश से एलर्जी से बीमारियां हो सकती हैं। उनका कहना है कि एमडीआर टीबी यानि मल्टी डग रेजीडेंट क्षयरोग की ऐसी अवस्था जब दवाएं रोग पर असर नहीं करतीं और रोगी को विशेष
दवाएं दी जाती हैं। यह दवाएं दो-दो वर्र्ष तक चलती हैं। उनका कहना है कि कई बार दवाओं के रिएक्शन से अन्य बीमारियां होने लगती हैं और मरीज दवा खाना बंद कर देता है। यही कारण है कि मरीज का रोग अच्छा नहीं हो पाता। प्रो. कुशवाहा के अनुसार फिलहाल केजीएमयू में उनके अधीन ऐसा कोई मरीज भर्ती नहीं है कि जिसे दवा का रिएक्शन हुआ हो लेकिन इस प्रकार के दर्जनों मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं।
उधर टीबी विशेषज्ञ डा. आशुतोष दुबे का कहना है कि टीबी की दवाएं बहुत ही प्रभावशाली होती हैं यह क्षयरोग पर तो कार्य करती ही हैं साथ अन्य रोगों को भी जन्म दे देती हैं। उनका कहना है कि टीबी की दवा कई बीमारियों का कारण बन सकती है। डा. दुबे के अनुसार मरीज टीबी की दवा कई बार बीच में ही खाना बंद कर देता है क्योंकि उसे टीबी के अतिरिक्त कई अन्य समस्याएं हो जाती हैं। उन्होंने टीबी की दवा लम्बे समय तक खाने से सामान्यता घुटनों में दर्द व आंखों में समस्या आने लगती है जिस कारण मरीज दवा खाना बंद कर देता है। उन्होंने बताया कि मेडिकल साइंस में हुए सर्वे में यह बात साबित हुई कि टीबी की दवा के रिएक्शन से ही व्यक्ति में अन्य बीमारियां हो गयीं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
