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क्यों है गणेश जी को मोदक इतना प्रिय, जानिए

गणेश जी की पूजा में चाहे आप उनको कई प्रकार के भोग लगा दें किन्तु जब तक उन्हें मोदक का प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह इनका प्रिय भोग है। वैसे तो इन्हें लड्डू भी बहुत पसंद है किन्तु मोदक इन्हें सबसे अधिक प्रिय है।
शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका होता है उनकी पसंद का भोग लगाना यानी मोदक चढ़ाना। आइए जानते हैं क्यों गजानन को मोदक इतना ज्यादा भाता है।
मोद का अर्थ होता है ख़ुशी और क यानी छोटा सा भाग मतलब मोदक प्रसन्नता देने वाली मिठाई है। वैसे भी श्री गणेश को सबसे ज़्यादा खुश रहने वाला देवता माना गया है और मोदक उनकी बुद्धिमानी का भी परिचय देता है।

ऋषि अत्रि के यहां भोजन के लिए गए गणपति
एक कथा के अनुसार भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी को ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसूया ने भोजन के लिए आमंत्रित किया था। बाल गणेश को बहुत तेज़ भूख लगी थी इसलिए अनुसूया ने पहले उन्हें भोजन कराने का निर्णय लिया। कहते हैं अनुसूया भोजन परोसती जाती और गणेश जी खाते ही जाते, उनकी भूख तो जैसे शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। यह देख वहां मौजूद सब आश्चर्यचकित रह गए थे।
अंत में जब अनुसूया थक गई तो उन्हें एक उपाय सुझा, उन्होंने सोचा कि अगर गणेश जी को मीठा खिलाया जाए तो शयद उनकी क्षुधा शांत हो जाएगी। यह सोचकर उन्होंने एक विशेष प्रकार का मिष्ठान गणपति के आगे परोस दिया जिसे खाते ही वे आंनद से भर गए और एक ज़ोरदार डकार मारी। यह देख शिव जी का भी पेट भर गया और उन्होंने भी एक नहीं बल्कि 21 बार डकार मार डाली और कहा कि उन्हें अब भूख नहीं है।
यह सब देख देवी पार्वती एकदम हैरान थीं। तब उन्होंने अनुसूया से उस विशेष मिठाई के बारे में पूछा इस पर अनुसूया ने बताया कि यह मिष्ठान मोदक है।
अमृत से हुआ मोदक का निर्माण
पद्मपुराण के अनुसार मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है और माता पार्वती को एक दिव्य मोदक देवताओं से प्राप्त हुआ था। कहते हैं अपनी माता के मुख से मोदक के गुणों का वर्णन सुनकर गणेश जी मोदक खाने के लिए बड़े उतावले हो गए थे।
प्रचलित कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के लिए मोदक बनाये थे। पार्वती जी ने मोदक उन दोनों में बराबर बांटने का सोचा ताकि मोदक को खाकर दोनों भाई कला और साहित्य में निपुण हो जाएं। परन्तु दोनों भाई मोदक आपस में बांटना ही नहीं चाहते थे। तब देवी पार्वती को एक युक्ति सूझी उन्होंने दोनों के बीच एक प्रतिस्पर्धा करायी और कहा जो विजेता होगा सारे मोदक उसी को मिलेंगे। पार्वती जी ने उन्हें ब्रह्मांड का चक्कर लगाने के लिए कहा और साथ ही यह भी कहा कि जो पहले पहुंचेगा वही विजेता होगा। यह सुनकर कार्तिकेय जी ने तुरंत अपना वाहन मयूर उठाया और निकल गए लेकिन गणेश जी वहीं खड़े रहे। उन्होंने अपनी चतुराई दिखाई और अपनी माता पिता की परिक्रमा कर ली और कहा कि जहां मेरे माता पिता है वहीं समस्त ब्रह्मांड है।
गणेश जी की बुद्धिमता देख शिव जी और देवी पार्वती अत्यधिक प्रसन्न हुए और उन्होंने सारे मोदक उन्हें दे दिए।



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