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क्या बच्चों के लिए हैंड सैनिटाइजर सुरक्षित है?
हर मां अपने शिशु को कीटाणु से दूर रखना चाहती है। आखिरकार शिशु आसानी से संक्रमण की चपेट में जो आ जाते हैं। बच्चे फर्श पर खेलते हैं, जमीन पर घुटनों के बल चलते हैं और फिर वही गंदी उंगली अपने मुंह में ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादातर माएं हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करती हैं ताकि बच्चे को जर्म्स से दूर रखा जा सके। लेकिन सवाल ये उठता है कि हैंड सैनिटाइजर शिशु के लिए सही है या नहीं?

कभी-कभी साबुन के बजाय हैंड सैनिटाइजर का उपयोग किया जाना सही है। लेकिन बार-बार सैनिटाइजर से शिशु के खिलौनों की सफाई करना सही नहीं है। यह हानिकारक हो सकता है। यहां भी यही सवाल उठता है कि क्या हैंड सैनिटाइजर बच्चों के लिए सही है? हैंड सैनिटाइजर का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करना निम्न संभावित जोखिम की ओर इशारा करता है।

हैंड सैनिटाइजर में एल्कोहल होता है
हैंड सैनिटाइजर में एल्कोहल होता है जिसमें जर्म्स को खत्म करने की क्षमता होती है हालांकि यह शिशु के लिए बहुत जोखिमभरा होता है। ज्यादातर समय हाथ में एल्कोहल रगड़ने से यह हवा में घुल जाता है यानी वाष्प बनकर उड़ जाता है। लेकिन इसका कुछ हिस्सा त्वचा में मिल जाता है। यदि हैंड सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बाद शिशु अपने हाथ को मुंह में लेता है तो यह उसके पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे उसके पेट दर्द और यहां तक कि उसे उल्टी भी हो सकती है। कुछ बहुत ही गंभीर मामलो में शिशु के लिए यह जहर भी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक शिशु के लिए एल्कोहोल फ्री सैनिटाइजर का उपयोग करना सही रहता है। इन दिनों बाजार में खासकर बच्चों के लिए इस तरह के एल्कोहल फ्री सैनिटाइजर उपलब्ध हैं।

कमजोर हो सकती है इम्युनिटी
वैसे तो हैंड सैनिटाइजर अपने आप में शिशु की इम्युनिटी को प्रभावित नहीं करता। लेकिन जब आप शिशु के लिए आसपास के वातावरण को जर्म्स फ्री रखते हैं तो बच्चे की इम्युनिटी पावर को कुछ नहीं करना पड़ता। ठीक इसी तरह जब आप बच्चे को वैक्सीन या टीका लगवाते हैं तो शरीर में कम संख्या में किटाणु को प्रेरित करते हैं ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबाॅडीज का उत्पादन कर सके। अतः शिशु के लिए थोड़ा बहुत किटाणु के संपर्क में होना जरूरी है ताकि उसका प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत बना रहे और बाहरी जर्म्स से लड़ने में सक्षम हो। यहां तक कि बुखार के प्रति इम्युन सिस्टम जब प्रतिक्रिया करता है तो इससे यह पता चलता है कि शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र सही है या नहीं। वक्त के साथ-साथ शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता चला जाता है और अलग-अलग जर्म्स से लड़ने में बेहतर होता जाता है।
कुछ सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं जिन्हें मेमोरी टी सेल्स कहा जाता है। ये कोशिकाएं उन जर्म्स को याद रखती हैं कि जिनकी वजह से पिछली बार संक्रमण हुआ था। ये कोशिकाएं उन निश्चित जर्म्स से लड़ना सीख जाती हैं और अगली बार दोबार संक्रमण होने पर लड़ती हैं। यदि आपका शिशु इस प्रक्रिया से कभी नहीं गुजरता है तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कभी भी मजबूत नहीं हो पाएगी। हां, आपको यह ध्यान रखना जरूरी है कि शिशु किसी जानलेवा संक्रमण की चपेट में ना आ जाए। इसके लिए जरूरत के अनुसार सावधानियां भी बरती जानी चाहिए। जब सामान्य तौर पर जो बैक्टीरिया या वायरस के संपर्क में आप आते हैं उससे प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर होता है और आपका बच्चा संभावित जोखिमों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लड़ने में बेहतर होता है।
अतः अगली बार जब आपका बच्चा जमीन को छूने के बाद उंगली या हाथ अपने मुंह में ले तो ध्यान रखें कि यह प्राकृतिक है। इसके लिए उसे हर समय सैनिटाइजर देने की जरूरत नहीं है।

एलर्जी हो सकती है
सबसे पहली बात, जब आपके बच्चे को जरूरत से ज्यादा साफ वातावरण और माहौल मिलता है तो इससे वह मजबूत नहीं बल्कि कमजोर हो जाता है। इसका मतलब है कि उसे आसानी से कोई भी एलर्जी होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके साथ ही सैनिटाइजर में कई ऐसे रसायन और सुगंध का इस्तेमाल किया जाता है जिससे बच्चों को एलर्जी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को सुगंधरहित सैनिटाइजर देना उपयोगी होता है। इन दिनों बच्चों के लिए बाजार में हर्बल और ऑर्गेनिक विकल्प भी उपलब्ध है।

कब करें सैनिटाइजर का यूज
सैनिटाइजर का उपयोग कब किया जाए, यह जानना बहुत जरूरी है। जब आप सही तरह से सैनिटाइजर का यूज करते हैं तो सही मायनों में इसका फायदा उठा पाते हैं। कुछ मामलों में हैंड सैनिटाइजर का उपयोग किया जाना अच्छा होता है। उदाहरण स्वरूप अगर आप घर से बाहर हैं यानी अपने बच्चे के साथ पिकनिक गए हैं तो हैंड सैनिटाइजर का यूज किया जा सकता है।
यदि आप किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने गए हैं तो हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें क्योंकि बच्चा बीमार व्यक्ति के संपर्क में आया है। लेकिन फर्श पर रखे खिलौनों को छूने पर बच्चे का बार-बार हैंड सैनिटाइज कराना सही नहीं है।



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